पश्चिम एशिया में हिज़्बुल्लाह के नए समीकरण; क्या क्षेत्र में बड़े बदलाव की आहट है?
हिज़्बुल्लाह ने हाल के महीनों में जिस प्रकार अपनी सैन्य रणनीति और जवाबी क्षमताओं का प्रदर्शन किया है, उसने पूरे पश्चिम एशिया की राजनीति और सुरक्षा समीकरणों को प्रभावित किया है। विशेष रूप से दक्षिणी लेबनान से किए गए ड्रोन और मिसाइल अभियानों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रतिरोधी धड़े अब केवल रक्षात्मक भूमिका में नहीं हैं, बल्कि वे इज़रायली सैन्य और सुरक्षा ढांचे को सीधे चुनौती देने की क्षमता भी रखते हैं।
हिज़्बुल्लाह अपने और आत्मघाती ड्रोन हमलों के ज़रिए बड़ी संख्या में ज़ायोनिस्टों को हताहत कर रहा है। यही कारण है कि, इज़रायली अधिकारी भय और चिंता में हैं।
“लेबनान के घटनाक्रम और हिज़्बुल्लाह के नेतृत्व में प्रतिरोध की राष्ट्रवादी तथा साहसपूर्ण नीतियाँ, नए पश्चिम एशिया के निर्माण, अरब और इस्लामी उम्मत की गरिमा की पुनर्स्थापना, और अमेरिकी-इज़रायली उपनिवेशवादी परियोजना की विफलता का सबसे स्पष्ट प्रतीक हैं।”
दक्षिणी लेबनान में इज़रायली सैन्य ठिकानों, निगरानी केंद्रों और सैनिक जमावड़ों पर लगातार हमलों ने इज़रायली नेतृत्व के भीतर चिंता बढ़ा दी है। इज़रायली मीडिया में भी यह स्वीकार किया जा रहा है कि हिज़्बुल्लाह के पास अब अत्याधुनिक ड्रोन तकनीक, सटीक मिसाइलें और लंबी लड़ाई लड़ने की क्षमता मौजूद है। यही कारण है कि उत्तरी इज़रायल के कई इलाकों में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।
Israeli Defense Forces के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह मानी जा रही है कि हिज़्बुल्लाह अब पारंपरिक युद्ध शैली तक सीमित नहीं है। वह साइबर, ड्रोन, खुफिया और मनोवैज्ञानिक युद्ध जैसे कई मोर्चों पर समानांतर दबाव बना रहा है। इससे इज़रायल की सुरक्षा रणनीति पर भी गंभीर प्रश्न उठने लगे हैं।
अरब जगत के प्रसिद्ध विश्लेषक अब्दुल बारी अतवान ने हिज़्बुल्लाह के महासचिव शेख़ नईम क़ासिम और लेबनान की संसद के अध्यक्ष नबी। बेरी के हालिया भाषणों का उल्लेख करते हुए लिखा कि ये भाषण एक बड़े परिवर्तन का संकेत हैं। उनके अनुसार यह परिवर्तन क्षेत्र और इस्लामी उम्मत को अपमान, पराजय और कमजोरी की वर्तमान स्थिति से बाहर निकाल सकता है तथा प्रभावी विकल्प यानी हर रूप में प्रतिरोध, विशेषकर सशस्त्र संघर्ष, की ओर वापस ले जा सकता है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, यदि यह स्थिति इसी प्रकार जारी रहती है तो पश्चिम एशिया में अमेरिकी प्रभाव और इज़रायली प्रभुत्व को नई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। कई विश्लेषक इसे “नए पश्चिम एशिया” की शुरुआत के रूप में देख रहे हैं, जहाँ क्षेत्रीय शक्तियाँ बाहरी हस्तक्षेप के बजाय अपने राजनीतिक और सुरक्षा निर्णय स्वयं लेने की दिशा में आगे बढ़ सकती हैं।
हालाँकि दूसरी ओर, कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ यह चेतावनी भी दे रहे हैं कि यदि तनाव और बढ़ा तो लेबनान, इज़रायल और पूरे क्षेत्र में व्यापक युद्ध का खतरा पैदा हो सकता है, जिसके गंभीर मानवीय और आर्थिक परिणाम सामने आ सकते हैं।


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