गाजा युद्ध के बाद इस्राईली समाज में मानसिक संकट गहराया, तेजी से बढ़े आत्महत्या के मामले

तल अवीव: 7 अक्टूबर 2023 के बाद गाजा में शुरू हुए युद्ध का असर इस्राईली समाज की मानसिक सेहत पर भी पड़ रहा है। ब्रिटिश अखबार डेली टेलीग्राफ ने एक इस्राईली मानसिक स्वास्थ्य केंद्र के आंकड़ों के हवाले से दावा किया है कि युद्ध के बाद इस्राईली समाज में तनाव, चिंता और लंबे समय तक रहने वाली मनोवैज्ञानिक समस्याएं बढ़ी हैं। रिपोर्ट में आत्महत्या और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी मामलों में भी उल्लेखनीय वृद्धि का जिक्र किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इसी महीने इस्राईली सेना में आत्महत्या के तीन मामले सामने आए। इनमें दो महिलाएं और एक पुरुष शामिल हैं। इसके साथ ही 2026 की शुरुआत से अब तक सेना में आत्महत्या करने वाले सैनिकों की संख्या 17 हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार, यह पिछले 15 वर्षों में सेना में आत्महत्याओं का सबसे ऊंचा आंकड़ा है।

डेली टेलीग्राफ ने इस्राईल के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थानों में से एक क्लालित की एक स्टडी का हवाला देते हुए कहा कि गाजा युद्ध के बाद इस्राईली नागरिकों में पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) के मामलों में करीब 70 फीसदी वृद्धि हुई है।

PTSD एक ऐसी मानसिक स्थिति है, जो किसी बेहद भयावह या सदमे वाली घटना के बाद विकसित हो सकती है। इसमें व्यक्ति को बार-बार उस घटना की याद आना, बेचैनी, डर, नींद में परेशानी और सामान्य जीवन में लौटने में कठिनाई जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

पूर्वी तल अवीव स्थित एक बड़े मानसिक स्वास्थ्य अस्पताल के प्रमुख प्रोफेसर अमीर क्रिवी ने कहा कि आने वाले समय में PTSD से प्रभावित लोगों की संख्या और बढ़ सकती है।

उन्होंने कहा कि PTSD के आंकड़े केवल एक बीमारी की स्थिति नहीं बताते, बल्कि पूरे समाज में मौजूद व्यापक मानसिक स्वास्थ्य संकट की ओर इशारा करते हैं।

हालांकि, इन आंकड़ों में इस्राईली सेना के जवानों को शामिल नहीं किया गया है। इसकी वजह यह बताई गई है कि सैनिकों से जुड़े मानसिक स्वास्थ्य मामलों का उपचार सैन्य व्यवस्था के भीतर ही किया जाता है और सेना से संबंधित आंकड़ों तक सार्वजनिक पहुंच सीमित है।

प्रोफेसर क्रिवी ने मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव को लेकर भी चिंता जताई। उनके मुताबिक, जरूरत की तुलना में मनोचिकित्सकों और अन्य मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की संख्या पर्याप्त नहीं है। इससे युद्ध के बाद मानसिक समस्याओं से जूझ रहे लोगों को समय पर उपचार मिलना मुश्किल हो सकता है।

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि तनाव और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का उचित उपचार नहीं किया गया, तो कुछ प्रभावित लोग राहत पाने के लिए शराब या नशीले पदार्थों का सहारा ले सकते हैं।

इससे मानसिक स्वास्थ्य संकट और जटिल हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, युद्ध और लंबे समय तक बने रहने वाले तनाव के बीच मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाना आने वाले समय में बड़ी चुनौती साबित हो सकती है।

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