भाजपा नेताओं के वो बयान जो किसानों की नीयत पर उठा रहे हैं सवाल

Formers Protest:किसान पिछले 19 दिनों से कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं उनके आंदोलन के बारे में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के नेताओं तरह तरह की बयानबाज़ी कर रहे हैं जो किसानों की नाराजगी कई बराबर कर रहा है.

मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री कमल पटेल ने अपने एक ताज़ा बयान में आंदोलन कर रहे किसान संगठनों को ‘कुकुरमुत्ता’ कहकर संबोधित किया है.

मध्य प्रदेश की बीजेपी सरकार में कृषि मंत्री कमल पटेल ने ये बयान 14 दिसंबर को उज्जैन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिया. कमल पटेल ने कहा, ‘‘ये किसान संगठन ‘कुकुरमु्त्तों’ की तरह उग आए हैं. ये किसान नहीं हैं, बल्कि व्हीलर डीलर और एंटी नेशनल हैं.”
कमल पटेल के इस बयान पर किसानों में नाराजगी है. लेकिन ये पहला मामला नहीं है जब सत्ताधारी पक्ष की तरफ से ऐसा बयान आया हो, इससे पहले भी कुछ ऐसे बयान दिए गए हैं जो किसानों के आंदोलन पर ही सवाल उठाने वाले थे.

मध्य प्रदेश की एक और मंत्री ऊषा ठाकुर ने भी किसानों को निशाने पर लिया. मंत्री ऊषा ठाकुर ने कहा कि पंजाब और हरियाणा में उच्च कोटि के दलाल प्लानिंग के साथ किसान आंदोलन चला रहे हैं और इसमें टुकड़े-टुकड़े गैंग भी शामिल हो गई है.

कुछ दिनों पहले केंद्र में मोदी सरकार के मंत्री भी आंदोलन को लेकर बेतुका बयान दे चुके हैं जो चर्चा और विवाद का केंद्र बने. किसान संगठनों के साथ मीटिंग करने वाले केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि ये आंदोलन अब किसानों का नहीं रह गया है, क्योंकि इसमें वामपंथी और माओवादी तत्व शामिल हो गए हैं. गोयल ने कहा था कि आंदोलन के जरिए ऐसे लोगों की जेल से रिहाई की मांग की जा रही हैं जो राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के लिए सजा काट रहे हैं.

पीयूष गोयल के अलावा केंद्रीय मंत्री रानासाहेब दानवे भी किसान आंदोलन को लेकर विवादित बयान देते हुए कहा था कि देश में जो किसान आंदोलन चल रहा है उसके पीछे चीन और पाकिस्तान का हाथ है. इतना ही नहीं, आंदोलन के साथ आतंकवाद और खालिस्तान का दाग भी लगाया जा रहा है. इस बात को लेकर हर तरफ नाराजगी भी देखी जा रही है कि किसान आतंकवादी या खालिस्तानी कैसे हो सकता है.

हरियाणा के कृषि मंत्री जेपी दलाल भी रानासाहेब दानवे जैसा ही बयान दे चुके हैं. जेपी दलाल ने कहा है कि किसान का नाम आगे करके बहुत सारे लोग हैं, विदेशी ताकतें हैं, चीन है, पाकिस्तान है, भारत के दुश्मन देश हैं, वो सरकार को अस्थिर करना चाहते हैं.

यूपी के कानपुर से लोकसभा सांसद और बीजेपी नेता सत्यदेव पचौरी भी किसान आंदोलन पर सवाल उठाते हुए कहा था कि किसान आंदोलन के जरिए खालिस्तान समर्थक फिर से अपने पैर जमा रहे हैं और इन लोगों के मंसूबे विध्वंसकारी हैं.और कुछ राष्ट्रविरोधी ताकतें इस आंदोलन से जुड़ रही हैं.

एक और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी किसान आंदोलन को लेकर कहा: कि आंदोलन में किसानों के हित की बात नहीं हो रही है, इस आंदोलन में विदेशी ताकत घुस रही है और खालिस्तान व शरजील इमाम के पोस्टर लगाए जा रहे हैं.

कुल मिलाकर सरकार और सत्ताधारी दल की तरफ से कई ऐसे बयान सामने आ चुके हैं जो किसान आंदोलन की विश्वसनीयता और नीयत पर ही सवाल खड़े रहे हैं. किसान नेता भी कह रहे हैं कि सरकार आंदोलन में फूट डालना चाहती है. किसान नेताओं का यह भी कहना है कि सरकार ने आंदोलन को भड़काने और फूट डालने की पूरी कोशिश की है लेकिन हमारा आंदोलन शांतिपूर्ण रहेगा और हम आंदोलन को जीत तक जारी रखेंगे.

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