इज़रायल-फिलिस्तीन को लेकर भारत की नीति में कोई बदलाव नहीं: पीएम मोदी

इज़रायल-फिलिस्तीन को लेकर भारत की नीति में कोई बदलाव नहीं: पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंन्द्र मोदी ने ट्वीट करके ही इस बात की जानकारी दी है कि इज़राइल-फिलिस्तीन को लेकर भारत की नीति में कोई बदलाव नहीं आया है। उन्होंने कहा, कि ‘फ़िलिस्तीनी प्राधिकरण के राष्ट्रपति महामहिम महमूद अब्बास से बात की है। ग़ज़्ज़ा के अल अहली अस्पताल में नागरिकों की मौत पर अपनी संवेदना व्यक्त की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हम फ़िलिस्तीनी लोगों के लिए मानवीय सहायता भेजना जारी रखेंगे। क्षेत्र में आतंकवाद, हिंसा और बिगड़ती सुरक्षा स्थिति पर अपनी गहरी चिंता साझा की। इजराइल-फिलिस्तीन मुद्दे पर भारत की लंबे समय से चली आ रही सैद्धांतिक स्थिति को दोहराया।

इजराइल-फिलिस्तीन पर भारत का रुख पहले की तरह ही जस का तस है और इसमें कोई बदलाव नहीं आया है। यह बात खुद प्रधानमंत्री मोदी ने ही कही है। वह भी फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास से बातचीत में ही। पहले वह लगातार इज़राइल के समर्थन की बात कहते रहे थे।

7 अक्टूबर के हमले के तुरंत बाद ही उन्होंने ट्वीट कर इज़राइल के साथ खड़े होने की बात कहते हुए ट्वीट कर दिया था। बाद में भी वह फिर से वही बात दोहराते रहे थे। इसी वजह से लगातार सवाल उठ रहे थे कि क्या पीएम मोदी ने भारत की विदेश नीति फिलिस्तीन को लेकर बदल दी है?

क़रीब हफ़्ते भर पहले विदेश मंत्रालय को भी इस पर सफ़ाई देनी पड़ी थी कि भारत के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। ऐसा इसलिए ता कि हमास ने जब इज़राइल पर हमला किया था तो पहली प्रतिक्रिया में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि वह ‘इज़राइल में आतंकवादी हमलों की ख़बर से सदमे’ में हैं और भारत इस कठिन समय में इजराइल के साथ एकजुटता के साथ खड़ा है।

पीएम मोदी के इस बयान से एक बड़ा संदेश गया था और सवाल उठा था कि क्या फिलिस्तीन पर भारत का रुख बदल गया है? लगातार यह सवाल पूछा जाता रहा था, लेकिन विदेश मंत्रालय की ओर से साफ़ तौर पर कुछ भी नहीं कहा गया था।

13 अक्टूबर को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने एक बयान में कहा था, ‘इस संबंध में हमारी नीति लंबे समय से और लगातार वही रही है। भारत ने हमेशा सुरक्षित और मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर रहने वाले एक संप्रभु, स्वतंत्र और व्यवहार्य फिलिस्तीन राज्य की स्थापना और इजराइल के साथ शांति से रहने के लिए सीधी बातचीत बहाल करने की वकालत की है।’

बता दें कि भारत ने शुरुआत से ही फिलिस्तीन के मुद्दे का समर्थन किया है। 1947 में भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में फिलिस्तीन के विभाजन के खिलाफ मतदान किया था। फिलिस्तीन के नेता यासर अराफात कई बार भारत आए। उनके इंदिरा गांधी से लेकर अटल बिहारी वाजपेयी तक के नेताओं से अच्छे संबंध रहे। 1999 में तो फिलिस्तीनी नेता यासर अराफात तत्कालीन पीएम वाजपेयी के घर पर उनसे मिले थे।

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