ममता को दिया शिवसेना ने झटका, विपक्ष के लिए UPA ज़रूरी

ममता को दिया शिवसेना ने झटका, विपक्ष के लिए UPA ज़रूरी कांग्रेस को हाशिए पर धकेलने की ममता बनर्जी की कोशिशों को शिवसेना ने जोर का झटका दिया है।

ममता को झटका देते हुए शिवसेना ने कहा है कि मजबूत विपक्ष के लिए यूपीए जरूरी है। कांग्रेस का सफाया करने के लिए भाजपा और मोदी सरकार का मिशन समझ में आता है और यह उनका एजेंडा भी है लेकिन मोदी और उनकी प्रवृत्ति के विरुद्ध संघर्ष करने वाले भी कांग्रेस को खत्म करने पर तुले हुए सबसे गंभीर चिंता का विषय है।

ममता बनर्जी हाल ही में मुंबई की तीन दिवसीय यात्रा पर गई हुई थी। उनकी इस यात्रा ने विपक्षी दलों में थोड़ी हलचल पैदा की है। कुछ नहीं तो शब्दों के बाण तो चल ही रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी के मुक़ाबले में मजबूत विकल्प देने के लिए सब एकमत है लेकिन कौन साथ रहे, किसे बाहर रखा जाए इसको लेकर अभी विपक्ष में विवाद है और जब तक विपक्ष एकजुट नहीं होता, कोई न्यूनतम साझा कार्यक्रम नहीं बनता तो भाजपा का मजबूत विकल्प देने की बात हवा-हवाई ही है।

शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में लिखा है कि अपने अपने राज्य और टूटे-फूटे किले संभालने के लिए कम से कम एकमत होना जरूरी है। इस एकता का नेतृत्व कौन करेगा यह बाद की बात है। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी घायल शेरनी की तरह लड़ी और भाजपा को चारों खाने चित करते हुए जीती। देश ने ममता बनर्जी के संघर्ष को सलाम किया। उन्होंने पश्चिम बंगाल में भाजपा, कांग्रेस, वामपंथी सभी का सफाया कर दिया। यह बात सच है लेकिन फिर भी राष्ट्रीय राजनीति से कांग्रेस को दूर रखकर सियासत करना यानी मौजूदा फासिस्ट राज की प्रवृत्ति को बल देने के समान है।

कांग्रेस का पिछले दस वर्षों में इस तरह पिछड़ना चिंता की बात है। कांग्रेस का सफाया हो यह सत्ताधारी दल और मोदी मंडली का एजेंडा है लेकिन मोदी और उनकी प्रवृत्ति से लड़ने वाले भी कांग्रेस को खत्म करने पर तुल जाएं यह एक गंभीर चिंता का विषय है। गाड़ी अगर अपने ट्रैक से उतर जाए उसे फिर ऊपर चढ़ने नहीं देना है और कांग्रेस की जगह हमें लेना है यह मंसूबा खतरनाक है।

शिवसेना के मुखपत्र ने कांग्रेस के ही नेताओं को कांग्रेस के इस दुर्भाग्य का जिम्मेदार बताया है। सामना में कहा गया है कि जिन लोगों ने जिंदगी भर कांग्रेस में रहते हुए सत्ता का सुख प्राप्त किया आज वही कांग्रेस का गला दबा रहे हैं। G-23 नामक असंतुष्ट कांग्रेस नेताओं के गुट ने कांग्रेस में रहते हुए सत्ता का सुख भोगा है लेकिन इस ग्रुप के तेजस्वी मंडल ने कांग्रेस की स्थिति को सुधारने के लिए क्या किया है ?
आज आज़ाद जैसे लोग कांग्रेस को श्राप दे रहे हैं कि 2024 में कांग्रेस की स्थिति अच्छी नहीं रहेगी। जो भाजपा को लगता है वही इस मंडली को लगता है। इसे एक संयोग ही कहा जाएगा।

लोकसभा चुनाव में अगर कांग्रेसो का आंकड़ा पार नहीं करती तो राष्ट्रीय स्तर पर कोई बदलाव नहीं होगा इसलिए भाजपा चाहती है कि कांग्रेस को हर हाल में रोकना है यही नीति अगर मोदी और भाजपा के विरुद्ध मोर्चा संभालने वाले लोग भी रखें तो बदलाव कैसे होगा

मुंबई आकर ममता बनर्जी का यह सवाल करना कि कांग्रेस नीत यूपीए कहां है मौजूदा समय में यह प्रश्न अनमोल है यूपी 80 तत्वों में नहीं है उसी तरह एनडीए भी नहीं है मोदी सरकार को आज इंडिया की आवश्यकता नहीं है लेकिन विपक्ष को यूपीए की आवश्यकता है यूपीए के समानांतर दूसरा गठबंधन बनाना अर्थात भाजपा को मजबूत करना है

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