मोदी सरकार किसानों के आगे नतमस्तक, एक और मांग पर सहमति जताई

मोदी सरकार किसानों के आगे नतमस्तक, एक और मांग पर सहमति जताई उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे राज्य में विधानसभा चुनाव नज़दीक आने के साथ ही मोदी सरकार किसानों के आगे आत्मसमर्पण करती नजर आ रही है।

 मोदी सरकार ने विधानसभा चुनाव में हार के डर से एक बार फिर किसानों के आगे घुटने टेक दिए हैं । साल भर से कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों पर कोई खास ध्यान न देने वाली मोदी सरकार ने विधानसभा चुनाव आते ही पहले तीनों कृषि कानूनो को वापस लिया अब किसानों की एक और मांग को स्वीकार करते हुए सरकार ने पराली जलाने को अपराध की श्रेणी से बाहर रखने की किसानों की मांग मान ली है ।

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने इस बात की जानकारी देते हुए कहा है कि किसान संगठनों ने किसानों द्वारा पराली जलाने को अपराध मुक्त करने के मांग की थी जिसे भारत सरकार ने स्वीकार कर लिया है ।

याद रहै कि हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का एलान किया था । तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने वाला विधेयक संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन पेश किया जाएगा । केंद्रीय कृषि मंत्री ने किसानों से आंदोलन खत्म करते हुए अपने अपने घर लौट जाने का आग्रह किया है।

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों ने पराली जलाने को अपराध मुक्त करने की मांग की थी सरकार ने इस मांग को भी स्वीकार कर लिया है। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने फसल विविधीकरण , एमएसपी प्रणाली और शून्य बजट खेती को और अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के मुद्दे पर विचार विमर्श करने के लिए एक समिति का गठन करने की घोषणा की थी जिसमें किसान संगठनों के प्रतिनिधि होंगे । अब किसानों को विरोध प्रदर्शन खत्म कर देना चाहिए। इन विरोध प्रदर्शनों का कोई मतलब नहीं रह गया है ।

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन ही विधेयक पेश किया जाएगा अतः किसानों को अपना प्रदर्शन खत्म करते हुए वापस लौट जाना चाहिए।

किसान आंदोलन के समय किसानों के खिलाफ दर्ज किए गए मुकदमों को वापस लिए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए तोमर ने कहा कि किसानों के खिलाफ दर्ज किए गए केसों को वापस लेने का अधिकार राज्य सरकार के अधीन आता है और राज्य सरकार ही इन मामलों की गंभीरता को देखते हुए निर्णय लेगी।

रही बात मुआवज़े की तो राज्य सरकारें अपनी नीतियों के अनुसार इस मुद्दे पर कोई निर्णय करेंगी । याद रहे कि इस महीने की 19 तारीख को ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा की थी।

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