ग़ाज़ा में फ़िलिस्तीनियों के नरसंहार के खिलाफ चेन्नई में ज़बरदस्त रैली

ग़ाज़ा में फ़िलिस्तीनियों के नरसंहार के खिलाफ चेन्नई में ज़बरदस्त रैली

ग़ाज़ा में इज़रायल के अत्याचार और फ़िलिस्तीनियों के नरसंहार के खिलाफ चेन्नई में पेरियार के अनुयायियों के संगठनों ने ज़बरदस्त रैली और जनसभा का आयोजन किया। इसमें विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, सांसदों, सामाजिक संगठनों के सदस्यों और दक्षिण भारत की फ़िल्म इंडस्ट्री की कई मशहूर हस्तियों ने भाग लिया। इनमें डीएमके की सहयोगी पार्टी ‘वीसीके’ के नेता और सांसद थोल थिरूमावलवन, विधायक थनियारसु, ‘एमएमके’ के नेता जौहरुल्लाह, ‘कटप्पा’ के किरदार से मशहूर अभिनेता सत्यराज, जाने-माने अभिनेता प्रकाश राज, फ़िल्म निर्देशक वेट्रिमारन और कई अन्य हस्तियां शामिल थीं, जबकि जनता की भारी भीड़ मौजूद रही। रैली में जुटे लोगों की संख्या हज़ारों में थी।

ग़ाज़ा की घटनाओं को नरसंहार करार देते हुए अभिनेता प्रकाश राज ने कहा, ‘‘यह विरोध उन सबका है जो इंसानियत के पक्ष में आवाज़ उठाते हैं। कुछ लोग पूछते हैं कि ऐसे प्रदर्शन की क्या ज़रूरत है? अगर अन्याय के खिलाफ बोलना राजनीति है, तो हां यह राजनीति है और हम बोलते रहेंगे।’’ उन्होंने युद्ध के आम लोगों पर पड़ने वाले असर पर एक कविता पढ़ी, जिसका सार था — ‘‘जंगें खत्म हो जाएंगी, नेता हाथ मिलाकर चले जाएंगे। लेकिन कहीं एक बूढ़ी मां बेटे का इंतजार करती रहेगी, एक पत्नी पति का इंतजार करती रहेगी और बच्चे अपने पिता का इंतजार करेंगे। यही सच्चाई है। हो सकता है हमें न पता हो कि यह ज़मीन किसने छोड़ी, लेकिन यह जरूर मालूम है कि इसकी क़ीमत आज भी कोई चुका रहा है।’’

एक और कविता पढ़ते हुए उन्होंने कहा, ‘‘अगर मैं चाहूं कि, मेरी शायरी राजनीति से मुक्त हो, तो मुझे पक्षियों की आवाज़ सुननी होगी। लेकिन पक्षियों की आवाज़ सुनने के लिए ज़रूरी है कि लड़ाकू जहाज़ों की गड़गड़ाहट बंद हो।’’

अभिनेता सत्यराज ने ग़ाज़ा में जारी क़त्लेआम की निंदा करते हुए कहा कि, यह ‘‘असहनीय और इंसानियत का अपमान’’ है। उन्होंने हैरानी जताई कि ‘‘ऐसे हमले करने के बाद ये लोग चैन से कैसे सो सकते हैं?’’ उन्होंने कहा, ‘‘कुछ लोग पूछते हैं कि चेन्नई में विरोध का क्या फायदा? लेकिन आज के सोशल मीडिया के दौर में यह संदेश दुनिया भर में फैल जाएगा। कलाकारों का फ़र्ज़ है कि वे ऐसे कार्यक्रमों में शामिल हों। अगर हमारी शोहरत इंसानियत और आज़ादी के काम न आए तो फिर यह शोहरत बेकार है।’’ फ़िल्मकार वेट्रिमारन ने ग़ाज़ा में हो रही हिंसा को ‘‘सुनियोजित नरसंहार’’ करार दिया।

वीसीके सांसद थिरूमावलवन ने कहा कि ‘‘पेरियार की राजनीति का मतलब है उन लोगों के लिए लड़ना जो जुल्म का शिकार हैं। फिलिस्तीन के समर्थन में यह रैली उसी जज़्बे का प्रतीक है। यह फिलिस्तीन की आज़ादी की मांग करने वाली आवाज़ है।’’ उन्होंने कहा कि दुनिया भर में जहां भी विवाद है — चाहे फिलिस्तीन हो, श्रीलंका हो या यूक्रेन — अमेरिका का साम्राज्यवादी हाथ वहां मौजूद है। ‘मे-17’ आंदोलन के नेता थिरू मोरगन गांधी ने कहा कि ‘‘हमास को आतंकवादी कहना ग़लत है, वह आज़ादी की आंदोलन है। जो देश हमास को आतंकवादी कहते हैं, वही असली आतंकवादी हैं।’’

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