ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ दिल्ली से मुंबई तक ज़ोरदार प्रदर्शन
घोषणा के अनुसार, विपक्ष की लगभग सभी पार्टियों ने गांधी जयंती के अवसर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और एसआईआर (SIR) के ख़िलाफ़ दिल्ली से लेकर मुंबई तक कई शहरों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किए। प्रदर्शन में शामिल हजारों युवाओं, जिनमें जेन-जी की संख्या अधिक थी, महत्वपूर्ण हस्तियों और आम नागरिकों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की जोरदार मांग की।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन, कई महत्वपूर्ण लोग हिरासत में
दिल्ली के जंतर-मंतर पर पुलिस द्वारा अनुमति नहीं दिए जाने के बावजूद विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक, छात्र और युवा संगठनों के कार्यकर्ता सुबह से ही यहां पहुंचने लगे थे। पुलिस ने प्रदर्शन को रोकने के लिए बड़े पैमाने पर कार्रवाई करते हुए 1,100 से अधिक लोगों को हिरासत में ले लिया था। इसके बावजूद प्रदर्शन किया गया।
हिरासत में लिए जाने वालों में सीपीआई (एम) के महासचिव एम. ए. बेबी, वृंदा करात, आइसा की अध्यक्ष नेहा बोरा, सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव, आरजेडी के सांसद मनोज कुमार झा, आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह, दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी, सौरभ भारद्वाज, संजीव झा, एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ और विभिन्न छात्र संगठनों के कार्यकर्ता शामिल थे। इस दौरान कवरेज के लिए वहां पहुंचे कई पत्रकारों को भी पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा।
जंतर-मंतर खाली, प्रदर्शनकारी फिर पहुंचे
जंतर-मंतर की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने अलग-अलग स्थानों पर रोककर बसों में भर लिया। एक अनुमान के अनुसार, 40 से अधिक बसों में प्रदर्शनकारियों को विभिन्न पुलिस थानों में ले जाया गया। एसएफआई के कार्यकर्ताओं के एक बड़े समूह को अशोका रोड पर रोका गया, जबकि आइसा, डीवाईएफआई, एनएसयूआई और अन्य संगठनों के कार्यकर्ताओं को भी पुलिस ने अलग-अलग स्थानों पर रोक दिया।
लगभग 350 छात्रों और कार्यकर्ताओं का एक समूह उपराष्ट्रपति के आवास की ओर से जंतर-मंतर की तरफ बढ़ा, लेकिन पुलिस ने उसे भी रोक दिया। हालांकि, बाद में छोड़े जाने के बाद ये कार्यकर्ता एक बार फिर जंतर-मंतर के पास पहुंच गए और वहीं प्रदर्शन करने लगे। इस दौरान जोरदार नारेबाजी हुई और सरकार के खिलाफ नारे लगाए गए।
मुंबई में भी बड़ा प्रदर्शन
पेपर लीक के खिलाफ दिल्ली में हुए प्रदर्शन के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कथित मनमानी के खिलाफ काकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की ओर से मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में किया गया प्रदर्शन शहर के इतिहास के बड़े प्रदर्शनों में शामिल हो गया।
गांधी जयंती के अवसर पर शुक्रवार को पार्टी प्रमुख अभिजीत दपके के नेतृत्व में दादर स्थित शिवाजी पार्क में ‘जेल भरो आंदोलन’ किया गया। इसमें शामिल होने के लिए युवाओं का सैलाब उमड़ पड़ा। युवाओं की संख्या इतनी अधिक थी कि शिवाजी पार्क जैसे विशाल मैदान में तिल रखने तक की जगह नहीं थी। इसके कारण बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी मैदान के चारों ओर घेरे के रूप में जमा हो गए। मंच से अभिजीत दपके सहित कई महत्वपूर्ण हस्तियों ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित किया। इनमें नसीरुद्दीन शाह, शबाना आजमी और अन्य लोग शामिल थे।
महात्मा गांधी की तस्वीर वाली टी-शर्ट
महात्मा गांधी की तस्वीर वाली टी-शर्ट पहने अभिजीत दपके और उनके साथियों ने मंच संभाला। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण रहने की अपील की और इतने बड़े जनसमूह के बावजूद संयम के साथ अपनी बातें रखीं। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि यदि इस प्रदर्शन के बाद भी ज्ञानेश कुमार को नहीं हटाया गया तो दिल्ली में इससे भी बड़ा और अधिक तीव्र प्रदर्शन किया जाएगा।
प्रदर्शन में महत्वपूर्ण हस्तियों की भागीदारी
काकरोच जनता पार्टी के इस प्रदर्शन का समर्थन करने के लिए महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी, अभिनेता नसीरुद्दीन शाह, अभिनेत्री शबाना आजमी, संगीतकार विशाल ददलानी और अन्य लोग भी प्रदर्शन में पहुंचे। शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे भी इस प्रदर्शन में शामिल होने वाले थे, लेकिन बुखार होने के कारण वे उपस्थित नहीं हो सके। हालांकि, उन्होंने अपनी समर्थन का संदेश भेजा।
प्रदर्शनकारियों ने हाथों में पोस्टर और तख्तियां उठा रखी थीं तथा नारेबाजी करते हुए अपनी मांगें रखीं। अभिजीत दपके ने इतनी बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी देखकर एक्स पर पोस्ट किया, ‘‘आज पूरा मुंबई शिवाजी पार्क में आ गया है।’’
शबाना आजमी:
‘‘वोट देना हमारा बुनियादी संवैधानिक अधिकार है। अगर इस अधिकार को ही हमसे छीन लिया जाएगा तो हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। वोट देने के अधिकार को बचाने के लिए चलाई जा रही इस मुहिम के लिए मैं अभिजीत दपके और युवाओं को बधाई देती हूं।’’
तुषार गांधी:
‘‘1942 से जब भी युवाओं ने विरोध-प्रदर्शन की कमान संभाली है, क्रांति जरूर आई है। जय जवान, जय किसान आंदोलन और उसके बाद भी युवाओं के माध्यम से कई क्रांतियां आईं। आज भी युवा गलत सिस्टम के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं और मुझे विश्वास है कि इससे भी बदलाव निश्चित है।’’
विशाल ददलानी:
‘‘मुझे इस आंदोलन से जुड़कर बेहद खुशी हो रही है। यह आंदोलन तब तक जारी रखा जाना चाहिए, जब तक ‘ज्ञानू’ से इस्तीफा नहीं ले लिया जाता। आज मतदान के अधिकार की रक्षा के लिए युवाओं की भीड़ देखकर गांधी जयंती का एहसास दिल से हो रहा है।’’
आशुतोष रांका:
‘‘पिछले कई वर्षों से प्रधानमंत्री की दुकान चलाने वाला मास्टरमाइंड ज्ञानेश कुमार ही है। उसी ने देश के 13 करोड़ भाजपा-विरोधी मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए हैं, जो कुल मतदाताओं का 15 प्रतिशत है। बाबा साहब आंबेडकर द्वारा दिए गए अधिकार को ज्ञानेश कुमार ने छीनने का काम किया है।’’


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