माइक्रोसॉफ्ट के सर्वर पर बड़ा साइबर हमला
दुनिया की सबसे बड़ी आईटी कंपनी माइक्रोसॉफ्ट पर एक गंभीर साइबर हमला हुआ है, जिसमें उसके शेयरपॉइंट सर्वर सॉफ्टवेयर को निशाना बनाया गया है। जानकारी के मुताबिक इस हमले से लगभग 100 संस्थाएं प्रभावित हुई हैं, जिनमें से दो ने इसकी पुष्टि की है।
माइक्रोसॉफ्ट ने शनिवार को एक चेतावनी जारी करते हुए बताया कि कंपनी की शेयरपॉइंट ऐप के उन सर्वरों पर हमला जारी हैं जो संस्थाओं के भीतर दस्तावेजों की साझेदारी और सहयोग के लिए व्यापक रूप से उपयोग किए जाते हैं।
कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि वे सर्वर जो माइक्रोसॉफ्ट के अपने क्लाउड पर चल रहे हैं, इस हमले से प्रभावित नहीं हुए हैं। इस साइबर हमले को ‘ज़ीरो डे’ कहा गया है क्योंकि इसमें उस कमजोरी का फायदा उठाया गया है जो पहले कभी सामने नहीं आई थी। इस तकनीक के ज़रिए हैकर्स कमजोर सर्वरों में घुसकर एक ‘बैकडोर’ (गुप्त प्रवेश) स्थापित कर सकते हैं और उसके बाद लगातार उन संस्थाओं तक पहुंच बनाए रख सकते हैं जिन्हें उन्होंने निशाना बनाया है।
नीदरलैंड्स की साइबर सुरक्षा कंपनी ‘आईसिक्योरिटी’ के मुख्य हैकर वायशा बर्नार्ड ने बताया कि शुक्रवार को जब उनके एक क्लाइंट को निशाना बनाया गया, तो उनके संस्थान ने इंटरनेट पर स्कैन किया, जिससे लगभग 100 प्रभावित संस्थाएं सामने आईं। उन्होंने बताया कि यह संख्या उस समय की है जब हमले की तकनीक अभी बड़े पैमाने पर सार्वजनिक नहीं हुई थी।
वायशा बर्नार्ड ने इन संस्थाओं की पहचान उजागर करने से इनकार किया लेकिन बताया कि संबंधित राष्ट्रीय अधिकारियों को इसकी जानकारी दे दी गई है। ‘शैडो सर्वर फाउंडेशन’ ने भी इस साइबर हमले में 100 संस्थाओं के प्रभावित होने की पुष्टि की है और बताया कि इनमें ज़्यादातर संस्थाएं अमेरिका और जर्मनी की हैं, जिनमें सरकारी विभाग भी शामिल हैं।
ब्रिटेन की साइबर सुरक्षा कंपनी ‘सोफोस’ के थ्रेट इंटेलिजेंस निदेशक रिफ पलिंग ने कहा कि अभी तक जो भी हमले हुए हैं, वे एक ही हैकर या समूह की कार्रवाई प्रतीत होते हैं, लेकिन स्थिति कभी भी बदल सकती है। माइक्रोसॉफ्ट ने एक बयान में कहा है कि कंपनी ने सुरक्षा से संबंधित अपडेट्स जारी कर दिए हैं और उपयोगकर्ताओं को तुरंत उन्हें इंस्टॉल करने की सलाह दी है।
फिलहाल यह साफ नहीं हो पाया है कि इन हमलों के पीछे कौन है, लेकिन इंटरनेट ट्रैफिक पर निगरानी रखने वाली कंपनी गूगल का मानना है कि हाल के कुछ साइबर हमलों के पीछे चीन का हाथ हो सकता है। वाशिंगटन स्थित चीनी दूतावास ने इस मामले पर अभी कोई टिप्पणी नहीं की है।
गौरतलब है कि चीन और अमेरिका के बीच कारोबारी और डिजिटल टकराव नया नहीं है। दोनों देश एक-दूसरे के आईटी सिस्टम को निशाना बनाते रहे हैं। कभी-कभी अमेरिका ने रूस और ईरान पर भी साइबर हमले करने का आरोप लगाया है।
हालांकि, माइक्रोसॉफ्ट पर हुए इस ताज़ा साइबर हमले को लेकर अभी तक किसी पक्ष ने खुलकर कुछ नहीं कहा है। इस हमले की वजह से थोड़ी देर के लिए कंपनी का कामकाज प्रभावित हुआ, लेकिन विशेषज्ञों की मदद से स्थिति पर काबू पाने की कोशिशें जारी हैं और उम्मीद है कि जल्द ही सभी सेवाएं बहाल हो जाएंगी।


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