सीबीआई पर मद्रास हाई कोर्ट का कटाक्ष, पिंजरे में बंद तोता हो आज़ाद

सीबीआई पर मद्रास हाई कोर्ट का कटाक्ष, पिंजरे में बंद तोता हो आज़ाद मद्रास हाई कोर्ट ने सीबीआई की स्वतंत्रता पर सवाल उठाते हुए दिशा निर्देश जारी करते हुए कहा है कि केंद्र सरकार से कहा है कि सीबीआई को आजाद संस्था बनाने की दिशा में कदम उठाए।

सीबीआई पर कटाक्ष करते हुए मद्रास उच्च न्यायालय ने कहा है कि सीबीआई को अधिक आजादी दिए जाने की जरूरत है ताकि पिंजरे में बंद तोते को रिहा किया जा सके। मद्रास हाई कोर्ट ने सीबीआई को पिंजरे में बंद तोते की तरह बताया है।

मद्रास हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को कई निर्देश जारी करते हुए केंद्रीय एजेंसी को अधिक शक्ति और अधिकार क्षेत्र के साथ वैधानिक दर्जा प्रदान करने वाला एक अधिनियम लाने को कहा है ताकि यह केंद्रीय चुनाव आयोग और सीएजी की तरह अधिक स्वतंत्र हो जाए और निष्पक्ष निर्णय ले सके।

अदालत की खंडपीठ ने कहा कि जब कोई संवेदनशील एवं जघन्य अपराध होता है तथा स्थानीय पुलिस की ओर से उचित जांच नहीं होती तो हमेशा सीबीआई जांच की मांग उठती रही है। लोगों को सीबीआई पर विश्वास है। लेकिन बहुत दुख की बात है कि सीबीआई यह कहकर किसी भी जांच से पैर खींच लेती है कि उसके पास जरूरी संसाधन एवं जनशक्ति नहीं है और वह जांच करने में सक्षम नहीं है।

अदालतों के समक्ष सीबीआई का यह । चने का बहुत पुराना है एवं सामान्य सा तरीका है। अदालत ने कहा है कि सीबीआई के लिए अलग कैडर हो। उसके पास प्रतिनियुक्ति पर निर्भर रहने के बजाय अधिकारियों का एक समर्पित कैडर होना चाहिए ताकि वह अपने अनुसार नियुक्ति कर सके।

अदालत के अनुसार सीबीआई फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला, संसाधन एवं बजट की कमी जैसी कई बाधाओं का सामना कर रही है। याद रहे कि इससे पहले 2013 में सर्वोच्च न्यायालय ने भी कहा था कि सीबीआई पिंजरे में बंद तोते की भांति है जो अपने मालिक की इच्छा अनुसार बोलता है।

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