भारत–अमेरिका व्यापार समझौते के प्रमुख बिंदु

भारत–अमेरिका व्यापार समझौते के प्रमुख बिंदु

भारत-अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर जारी संयुक्त बयान में दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को नई मजबूती देने का दावा किया गया है। 6 फरवरी 2025 को जारी इस अंतरिम समझौते का ढांचा भविष्य में एक व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते की नींव तैयार करेगा। इसका उद्देश्य व्यापार बाधाओं को कम करना, बाजार तक पहुंच बढ़ाना और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना है।

समझौते के तहत भारत, अमेरिका से आयात होने वाले कई औद्योगिक, खाद्य और कृषि उत्पादों पर शुल्क पूरी तरह समाप्त करेगा या उसमें बड़ी कटौती करेगा। इनमें ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन, पशु आहार के लिए लाल ज्वार, बादाम, अखरोट और अन्य सूखे मेवे, ताजे और प्रसंस्कृत फल, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट्स शामिल हैं। इससे अमेरिकी कृषि और खाद्य उत्पादों को भारतीय बाजार में बेहतर अवसर मिलने की उम्मीद है।

दूसरी ओर अमेरिका भारत से निर्यात होने वाले वस्त्र, चमड़ा, जूते, प्लास्टिक, रबर, रासायनिक उत्पाद, घरेलू सजावट का सामान, हस्तशिल्प और कुछ मशीनरी पर 18 प्रतिशत जवाबी शुल्क लगाएगा। हालांकि, अंतरिम समझौते के सफल क्रियान्वयन के बाद कई महत्वपूर्ण भारतीय उत्पादों पर यह शुल्क पूरी तरह हटाने का प्रावधान किया गया है। इनमें जेनेरिक दवाएं, कीमती पत्थर और हीरे तथा विमान के पुर्जे प्रमुख हैं।

संयुक्त बयान के अनुसार अमेरिका राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कुछ शुल्क भी समाप्त करेगा, जिससे स्टील, एल्युमिनियम, तांबा और भारतीय विमानों व उनके पुर्जों के व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। भारत को ऑटोमोबाइल पुर्जों के लिए अमेरिकी बाजार में विशेष कम शुल्क वाला कोटा भी मिलेगा। दवा क्षेत्र में अलग से मूल्यांकन के बाद और रियायतें दिए जाने की संभावना जताई गई है।

दोनों देशों ने अहम क्षेत्रों में एक-दूसरे को प्राथमिकता के आधार पर बाजार तक पहुंच देने पर सहमति जताई है। भारत ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से लगभग 500 अरब डॉलर मूल्य की वस्तुएं खरीदने की योजना बनाई है, जिनमें ऊर्जा उत्पाद, विमान और उनके पुर्जे, कीमती धातुएं, उन्नत प्रौद्योगिकी उत्पाद जैसे जीपीयू और डेटा सेंटर उपकरण तथा कोकिंग कोल शामिल हैं।

इसके अलावा, प्रौद्योगिकी और डिजिटल व्यापार से जुड़ी बाधाओं को दूर करने पर भी सहमति बनी है। भारत अमेरिकी मेडिकल उपकरणों और आईटी उत्पादों के मानकों, परीक्षण और आयात लाइसेंस से जुड़े मुद्दों का समाधान करेगा और छह महीने के भीतर यह तय करेगा कि अमेरिकी या अंतरराष्ट्रीय मानकों को अपनाया जा सकता है या नहीं। दोनों देशों ने निवेश जांच, निर्यात नियंत्रण और आर्थिक सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का भी निर्णय लिया है।

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