आज़ादी के बाद पहली बार केंद्र में कोई मुस्लिम मंत्री नहीं

आज़ादी के बाद पहली बार केंद्र में कोई मुस्लिम मंत्री नहीं

नई दिल्ली: नरेंद्र मोदी ने लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली है। पीएम मोदी बीजेपी के पहले और देश के दूसरे प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने लगातार तीसरी बार सत्ता की हैट्रिक लगाई है। नरेंद्र मोदी के साथ 71 मंत्रियों ने रविवार को मंत्री पद की शपथ ली। मोदी सरकार 3.O के मंत्रिमंडल में एक भी मुस्लिम चेहरे को जगह नहीं मिली है। आजादी के बाद केंद्र की यह पहली सरकार है, जिसके मंत्रिमंडल के गठन में किसी भी मुसलमान को प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया। इस तरह नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में मुस्लिम प्रतिनिधित्व का सिलसिला तीन से शुरू होकर अब शून्य पर आ गया है।

आख़िरी बार प्रधानमंत्री मोदी के पिछले कार्यकाल में आख़िरी मुस्लिम मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी थे। वैसे, इस बार बीजेपी से कोई भी मुस्लिम सांसद नहीं चुना गया है। दूसरे दलों से भी सांसदों की संख्या में भी कमी आई है। पिछले चुनाव में 27 के मुकाबले इस बार 2024 के लोकसभा चुनाव में महज 23 मुसलमान उम्मीदवार ही चुनाव जीतकर आए हैं। वैसे, इस बार दलों ने मुस्लिम प्रत्याशियों को उतारने में भी झिझक दिखाई थी। कांग्रेस ने 19, सपा ने 4, आरजेडी ने दो, टीएमसी ने 6 और बसपा ने 22 मुस्लिम प्रत्याशी उतारे थे। एनडीए ने चार मुस्लिमों को टिकट दिया था जिसमें से एक उम्मीदवार बीजेपी की ओर से था। इनमें से कोई जीत नहीं सका।

जनसंघ से होते हुए जनता पार्टी और बीजेपी के शुरुआती दौर से पार्टी में मुस्लिम लीडरशिप हुआ करती थी। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के दौर में बीजेपी के वरिष्ठ मुस्लिम नेताओं में सिकंदर बख्त, आरिफ बेग, मुख्तार अब्बास नकवी और शाहनवाज हुसैन हुआ करते हुए। सिकंदर बख्त और आरिफ बेग तो बीजेपी के संस्थापक सदस्यों में रहे हैं। शाहनवाज हुसैन और मुख्तार अब्बास नकवी जैसे नेता बीजेपी के टिकट पर लोकसभा चुनाव जीत दर्ज कर चुके है। शाहनवाज तीन बार लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं। बीजेपी के किसी मुस्लिम नेता के लिए लोकसभा चुनाव जीतना बहुत मुश्किल काम हुआ करता था।

बहरहाल, रविवार को जब मोदी सरकार का शपथ ग्रहण हो रहा था तो उसमें एक भी मुस्लिम को शामिल नहीं किया गया। उन्होंने ‘ज़्यादा बच्चे वाले’, ‘घुसपैठिए’ जैसे शब्द इस्तेमाल किए थे। उन्होंने मुस्लिमों के हवाले से कांग्रेस को निशाना बनाया। पीएम मोदी ने एक चुनावी रैली में कहा था, ‘उन्होंने (कांग्रेस ने) कहा था कि देश की संपत्ति पर पहला अधिकार मुसलमानों का है। इसका मतलब, ये संपत्ति इकट्ठी कर किसको बाँटेंगे? जिनके ज़्यादा बच्चे हैं उनको बाँटेंगे। घुसपैठिए को बाँटेंगे। …ये कांग्रेस का मैनिफेस्टो कह रहा है… कि माताओं-बहनों के सोने का हिसाब करेंगे। …जानकारी लेंगे और फिर संपत्ति को बाँट देंगे।

वैसे, मोदी के नेतृत्व में बीजेपी की छवि भी मुस्लिम विरोधी की दिख रही है। खुद प्रधानमंत्री मोदी ने हर लोकसभा चुनाव में ऐसे बयान दिए हैं जिससे कम से कम मुस्लिमों में तो संदेश अच्छा नहीं गया। जबकि आंध्र प्रदेश में उनकी सहयोगी पार्टी टीडीपी ने खुलकर मुस्लिम आरक्षण देने की बात कही है। उनकी पार्टी अपने इस बयान पर अभी भी क़ायम है।

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