जामिया मिल्लिया इस्लामिया में परीक्षा प्रश्न पर विवाद, प्रोफेसर निलंबित

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में परीक्षा प्रश्न पर विवाद, प्रोफेसर निलंबित

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में एक परीक्षा प्रश्न को लेकर गंभीर विवाद उत्पन्न हो गया, जिसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने सोशल वर्क विभाग के एक वरिष्ठ प्रोफेसर को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई तब सामने आई जब परीक्षा में शामिल एक प्रश्न पर कुछ समूहों द्वारा कड़े आपत्तियां जताई गईं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सोशल वर्क विभाग के बीए (ऑनर्स) पहले सेमेस्टर की परीक्षा में “सोशल प्रॉब्लम्स इन इंडिया” के पेपर में एक विकल्पी प्रश्न शामिल था, जिसमें छात्रों से कहा गया था कि वे भारत में मुस्लिम अल्पसंख्यकों के खिलाफ अत्याचारों पर उदाहरणों के साथ चर्चा करें।

यह प्रश्न परीक्षा के बाद जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, इस पर हंगामा शुरू हो गया और मामला तेजी से राजनीतिक और वैचारिक रूप ले गया।

विवाद बढ़ने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए ज़ीरो टॉलरेंस नीति अपनाई और संबंधित प्रोफेसर वीरेंद्र बालाजी शहरे को तुरंत निलंबित कर दिया। विश्वविद्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि परीक्षा के माध्यम से किसी भी प्रकार के विवादास्पद या संवेदनशील विचारों को बढ़ावा देना स्वीकार्य नहीं है, क्योंकि इससे शैक्षणिक वातावरण प्रभावित हो सकता है।

विश्वविद्यालय ने इस पूरे मामले की जांच के लिए एक उच्च समिति का गठन किया है। समिति यह जांच करेगी कि प्रश्न पत्र तैयार करने की प्रक्रिया में कहाँ गलती हुई और क्या यह प्रश्न जानबूझकर किसी विशेष उद्देश्य के तहत शामिल किया गया था या नहीं। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि भविष्य में परीक्षा प्रश्नों के लिए अनुमोदन प्रक्रिया को और सख्त बनाया जाएगा।

प्रोफेसर की निलंबन के बाद छात्रों और शैक्षणिक समुदाय में मिश्रित प्रतिक्रियाएँ देखने को मिली हैं। कुछ छात्रों का कहना है कि जब पाठ्यक्रम में अल्पसंख्यकों और सामाजिक मुद्दों का उल्लेख है, तो ऐसे प्रश्न पर आपत्ति करना निरर्थक है। वहीं, सोशल मीडिया पर कई लोगों ने निलंबन का विरोध करते हुए इसे शैक्षणिक स्वतंत्रता पर चोट करार दिया, जबकि कुछ समूह प्रशासन के फैसले को सही मान रहे हैं।

विश्वविद्यालय की वेबसाइट के अनुसार, प्रोफेसर वीरेंद्र बालाजी पिछले 22 वर्षों से जामिया मिलिया इस्लामिया में शिक्षण कार्य कर रहे हैं। उनके शोध क्षेत्रों में ग्रामीण और शहरी विकास, दलित और जनजातीय मामलों, सामाजिक समावेशन और बहिष्कार, तथा शिक्षा और सामाजिक विकास शामिल हैं। उन्होंने जेएनयू से एमफिल और पीएचडी की है और दिल्ली विश्वविद्यालय और नागपुर विश्वविद्यालय में भी शिक्षण किया है। प्रोफेसर ने अब तक इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है।

जामिया के रजिस्ट्रार शेख साफी अल्लाह की ओर से जारी एक नोटिस में कहा गया है कि प्रोफेसर का निलंबन अगले आदेश तक कायम रहेगा। नोटिस में नियमों के अनुसार एफआईआर दर्ज करने का उल्लेख जरूर किया गया है, हालांकि विश्वविद्यालय अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि फिलहाल एफआईआर दर्ज करने का कोई निर्णय नहीं हुआ है।

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