सोनम वांगचुक के साथ अपराधियों जैसा सुलूक, कोर्ट दखल दे

नई दिल्ली: लद्दाख के शिक्षाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की जारी भूख हड़ताल को लेकर मामला अब दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया है। जंतर-मंतर पर चल रहे उनके अनशन के दौरान स्वास्थ्य स्थिति बिगड़ने का हवाला देते हुए एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। याचिका में अदालत से वांगचुक को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने और जरूरत पड़ने पर अनशन समाप्त कराने के निर्देश देने की मांग की गई है।

सोनम वांगचुक पिछले 18 दिनों से जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे हैं। वह कई मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, जिनमें NEET UG पेपर लीक मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी शामिल है।

उनके समर्थकों का कहना है कि लंबे समय से भोजन नहीं लेने के कारण उनकी सेहत तेजी से खराब हो रही है। वांगचुक की गिरती सेहत को देखते हुए 68 वर्षीय एक वकील ने दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। याचिका में केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को निर्देश देने की मांग की गई है कि वे वांगचुक को अस्पताल पहुंचाएं और उनकी जान बचाने के लिए आवश्यक मेडिकल सहायता उपलब्ध कराएं।

याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की पीठ ने सुनवाई की। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए इसे बुधवार को फिर सूचीबद्ध करने की बात कही है।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील आर.के. सैनी ने अदालत में कहा कि एक सामाजिक कार्यकर्ता अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए विरोध कर रहा है, लेकिन लंबे समय तक भूख हड़ताल करना उसके जीवन के लिए खतरा बन सकता है।

याचिका में दावा किया गया है कि वांगचुक का वजन करीब 8.5 किलो तक कम हो गया है और अगर अनशन जारी रहा तो उनकी स्थिति और गंभीर हो सकती है।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि सरकार वांगचुक के साथ उचित संवेदनशीलता नहीं दिखा रही है। याचिका में कहा गया है कि प्रशासन को उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए तुरंत कदम उठाने चाहिए।

याचिकाकर्ता ने अदालत से आग्रह किया है कि जरूरत पड़ने पर वांगचुक को अस्पताल ले जाकर तरल आहार और जरूरी पोषण उपलब्ध कराया जाए।

सोनम वांगचुक ने 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। यह प्रदर्शन शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों और NEET UG पेपर लीक मामले को लेकर उठाई गई मांगों के समर्थन में किया जा रहा है।

अब सभी की नजरें दिल्ली हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर हैं, जहां अदालत वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति और प्रशासनिक कदमों पर विचार करेगी।

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