फिलिस्तीन संकट पर नहीं बदला भारत का रुख, बातचीत से दो-राज्य समाधान की वकालत

भारत ने एक बार फिर इस्राईल-फिलिस्तीन विवाद के स्थायी समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति के जरिए दो-राज्य समाधान का समर्थन दोहराया है। विदेश मंत्रालय की सचिव प्रिया रंगनाथन ने फिलिस्तीनी नेतृत्व के साथ बैठक में गाजा की गंभीर मानवीय स्थिति पर चिंता जताई और फिलिस्तीन के लोगों के प्रति भारत के निरंतर समर्थन की बात कही।

रंगनाथन 16 से 21 अगस्त तक मिस्र, फिलिस्तीन और लेबनान की आधिकारिक यात्रा पर हैं। अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने मंगलवार को फिलिस्तीन की विदेश मामलों और प्रवासी मंत्री वर्सेन अघाबेकियन शाहिन से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच भारत-फिलिस्तीन संबंधों और क्षेत्र में जारी घटनाक्रम को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।

बैठक में गाजा की मौजूदा मानवीय स्थिति प्रमुख मुद्दों में रही। भारत ने कहा कि संकट का समाधान केवल मानवीय सहायता तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसके लिए प्रभावी कूटनीतिक प्रयास और स्थायी राजनीतिक समाधान की दिशा में बातचीत भी जरूरी है।

भारत लंबे समय से ऐसे दो-राज्य समाधान का समर्थन करता रहा है, जिसमें इस्राईल और फिलिस्तीन मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर शांतिपूर्ण ढंग से सह-अस्तित्व में रहें। नई दिल्ली का कहना है कि क्षेत्र में टिकाऊ शांति अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप और बातचीत के जरिए ही हासिल की जा सकती है।

बैठक में फिलिस्तीन की मौजूदा स्थिति, गाजा में जारी घटनाक्रम, मानवीय जरूरतों और भारत की विकास साझेदारी पर भी चर्चा हुई। रंगनाथन ने फिलिस्तीनी लोगों के लिए भारत के समर्थन को दोहराते हुए कहा कि शांति और स्थिरता कायम करने के प्रयासों में भारत अपनी भूमिका निभाता रहेगा।

दोनों पक्षों ने स्वास्थ्य, शिक्षा और क्षमता निर्माण से जुड़ी भारत समर्थित परियोजनाओं की भी समीक्षा की। भारत फिलिस्तीन के साथ विकास सहयोग के तहत कई कार्यक्रम चला रहा है, जिनमें प्रशिक्षण, छात्रवृत्ति और संस्थागत क्षमता बढ़ाने से जुड़ी पहल शामिल हैं।

फिलिस्तीनी विदेश मंत्री ने जनवरी 2026 में भारत की अपनी यात्रा को भी याद किया और नई दिल्ली के लगातार सहयोग के लिए आभार जताया। उन्होंने विकास परियोजनाओं, क्षमता निर्माण, छात्रवृत्तियों और मानवीय सहायता के साथ-साथ फिलिस्तीनी संस्थानों तथा संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों को भारत के सहयोग की सराहना की।

इस बैठक से एक बार फिर साफ हुआ कि गाजा संकट के बीच भारत मानवीय सहायता, संवाद और कूटनीति को प्राथमिकता देते हुए इस्राईल और फिलिस्तीन के बीच स्थायी राजनीतिक समाधान के लिए दो-राज्य व्यवस्था के अपने पुराने रुख पर कायम है।

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