पेजेशकियन का दिल्ली दौरा, BRICS के जरिए भारत का बड़ा कूटनीतिक दांव

नई दिल्ली: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन सितंबर में भारत दौरे पर आने वाले हैं। वह 12 और 13 सितंबर को दिल्ली में आयोजित होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच पेजेशकियन का भारत दौरा कूटनीतिक लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।

इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति के बीच द्विपक्षीय बैठक होने की संभावना है। दोनों नेताओं के बीच पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति, क्षेत्रीय सुरक्षा, व्यापार और ऊर्जा सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।

भारत लंबे समय से ईरान के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को बनाए रखने पर जोर देता रहा है। खासतौर पर चाबहार बंदरगाह भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण परियोजना है। इसके जरिए भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच का वैकल्पिक मार्ग मिलता है, जिससे पाकिस्तान पर निर्भरता कम होती है।

चाबहार को भारत की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और व्यापार रणनीति का अहम हिस्सा माना जाता है। यह बंदरगाह इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर से भी जुड़ा हुआ है, जिसके जरिए भारत को ईरान होते हुए रूस और यूरोप तक व्यापारिक संपर्क मजबूत करने का अवसर मिलता है।

भारत के लिए ईरान के साथ संबंधों का एक बड़ा पहलू ऊर्जा सुरक्षा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और समुद्री मार्गों को लेकर अनिश्चितता के बीच भारत की कोशिश है कि वह अपने ऊर्जा हितों को सुरक्षित रखे।

हुर्मुज जलडमरूमध्य भारत के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि खाड़ी क्षेत्र से आने वाली बड़ी मात्रा में ऊर्जा आपूर्ति इसी समुद्री मार्ग से गुजरती है। ऐसे समय में तेहरान के साथ संवाद भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो जाता है।

ईरान के BRICS में शामिल होने के बाद इस समूह में पश्चिम एशिया की भूमिका भी बढ़ी है। भारत के लिए यह मंच रूस, चीन और ईरान जैसे देशों के साथ संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है।

नई दिल्ली एक ओर अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ अपने संबंध मजबूत कर रही है, वहीं दूसरी ओर रूस और ईरान जैसे देशों के साथ भी रणनीतिक संवाद जारी रखे हुए है। यही संतुलन भारत की विदेश नीति की बड़ी विशेषता माना जाता है।

भारत और ईरान के बीच बढ़ता सहयोग पाकिस्तान के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है। चाबहार बंदरगाह के जरिए भारत को मध्य एशिया तक पाकिस्तान को दरकिनार करते हुए पहुंच बनाने का विकल्प मिलता है।

वहीं BRICS जैसे बहुपक्षीय मंच पर भारत और ईरान के बीच नजदीकी बढ़ने से क्षेत्रीय कूटनीति में नई संभावनाएं बन सकती हैं। पाकिस्तान भी अपनी विदेश और सुरक्षा नीति में पश्चिमी देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

ऐसे में पेजेशकियन का दिल्ली दौरा केवल एक औपचारिक यात्रा नहीं, बल्कि भारत की रणनीतिक स्वायत्तता, ऊर्जा सुरक्षा और पश्चिम एशिया में बढ़ती कूटनीतिक भूमिका का संकेत भी माना जा सकता है।

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