ईरान के खिलाफ अमेरिका की आर्थिक जंग भी सैन्य कार्रवाई की तरह नाकाम होगी

रायुल यौम के प्रधान संपादक और प्रमुख फिलिस्तीनी विश्लेषक अब्दुलबारी अतवान ने दावा किया है कि ईरान के खिलाफ अमेरिका की आर्थिक लड़ाई भी सैन्य अभियान की तरह विफल हो सकती है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने जब ईरान पर आर्थिक प्रतिबंध और नाकेबंदी बढ़ाने का रास्ता चुना है, तो इसका मतलब है कि सैन्य दबाव से वह अपने लक्ष्य हासिल नहीं कर पाया।

अतवान ने अपने संपादकीय में लिखा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान की राजनीतिक और सैन्य ताकत को सही तरीके से समझ नहीं पा रहे हैं। उनके मुताबिक, इस्राईल से मिलने वाली गलत या भ्रामक जानकारी भी अमेरिकी नीति को प्रभावित कर रही है।

अतवान का कहना है कि जिस तरह अमेरिका की सैन्य कार्रवाई ईरान को अपनी शर्तें मानने के लिए मजबूर नहीं कर सकी, उसी तरह आर्थिक नाकेबंदी का परिणाम भी उम्मीद के मुताबिक नहीं आने वाला।

उन्होंने ईरान को बड़ा देश बताते हुए कहा कि उसके पास विशाल भूभाग, कृषि संसाधन, बड़ी आबादी और मजबूत घरेलू उद्योग हैं। इसलिए उनका दावा है कि आर्थिक दबाव के बावजूद ईरान अपनी जरूरतों का बड़ा हिस्सा घरेलू स्तर पर पूरा करने की क्षमता रखता है।

अतवान ने सैन्य कार्रवाई और आर्थिक नाकेबंदी के बीच अंतर बताते हुए कहा कि सैन्य अभियान का उद्देश्य कम समय में नतीजा हासिल करना होता है, जबकि आर्थिक प्रतिबंधों का असर आने में लंबा समय लग सकता है।

उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ट्रंप प्रशासन के पास इतना समय है कि वह आर्थिक दबाव के जरिए ईरान पर अपनी रणनीति का असर देख सके। उन्होंने अमेरिका की घरेलू राजनीति और आने वाले चुनावों का भी जिक्र किया।

लेख में अतवान ने दावा किया कि चीन और रूस ईरान के खिलाफ अमेरिकी आर्थिक नाकेबंदी का समर्थन करने के इच्छुक नहीं हैं। उनका कहना है कि खाड़ी के कई अमेरिकी सहयोगी देश भी ईरान के साथ सीधे टकराव से बचना चाहेंगे।

अतवान ने सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच मक्का में बने नए रक्षा सहयोग का भी उल्लेख किया और इसे पश्चिम एशिया में बदलते रणनीतिक समीकरण का संकेत बताया।

अतवान ने कहा कि अगर अमेरिका दोबारा सैन्य विकल्प अपनाता है तो ईरान इसके लिए तैयारी कर रहा होगा। उन्होंने कुछ ईरानी सैन्य अधिकारियों के बयानों का हवाला देते हुए कहा कि तेहरान अपने रक्षा और आक्रामक हथियारों का उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रहा है।

उनके मुताबिक, ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका या उसके सहयोगी कोई गलत कदम उठाते हैं तो उन्हें कड़ा जवाब दिया जाएगा।

अपने लेख के अंत में अतवान ने दावा किया कि पिछले वर्षों में अमेरिका और इजरायल के साथ टकराव के दौरान ईरान ने कई बार अपनी चेतावनियों को कार्रवाई में बदला है।

उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में स्थिति और स्पष्ट होगी और उनका अनुमान है कि ईरान तथा उसके सहयोगियों की ओर से नए कदम देखने को मिल सकते हैं।

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