यमन की सऊदी अरब पर और भयानक हमलों की तैयारी
सना चार सप्ताह तक चले संघर्ष और रियाद पर तीन सैन्य समीकरण स्थापित करने के बाद अब युद्ध के दूसरे चरण के लिए तैयार है। सैन्य सूत्रों के अनुसार, इस चरण में सऊदी अरब की धरती पर ऐसे हमले किए जा सकते हैं, जो तेल नाकाबंदी से भी अधिक दर्दनाक होंगे।
फ़ार्स न्यूज़ एजेंसीके अनुसार, कल शाम यमन के सशस्त्र बलों के प्रवक्ता द्वारा पिछले एक महीने में सऊदी अरब को हुए नुकसान और हताहतों के संबंध में बयान जारी किए जाने के बाद राजनीतिक पर्यवेक्षकों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री और हवाई सैन्य तनाव बढ़ाने के “दूसरे चरण” में प्रवेश करने की सना की तैयारी की बात कही है।
लेबनानी अख़बार अल-अख़बार ने आज गुरुवार को रशीद अल-हद्दाद के लेख में लिखा कि सना की सेनाओं ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री और हवाई सैन्य तनाव बढ़ाने के दूसरे चरण में प्रवेश की तैयारी के तहत दावा किया है कि पिछले कुछ हफ्तों में वे तीन सैन्य समीकरण स्थापित करने में सफल रही हैं।
पहला समीकरण “नाकाबंदी के बदले नाकाबंदी” था, जो लाल सागर के दक्षिण से उत्तर तक, अदन की खाड़ी और अरब सागर से होकर लागू किया गया। दूसरा समीकरण यमन के पश्चिम से पूर्व तक, किसी भी स्थान पर सऊदी सैनिकों के जमावड़े और उनके ठिकानों को निशाना बनाना था। तीसरा समीकरण “निवारण और सीधा जवाब” था, जिसके तहत यमन के हवाई क्षेत्र के उल्लंघन का जवाब सऊदी अरब की धरती के भीतर रणनीतिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर दिया गया।
यमन के सशस्त्र बलों के प्रवक्ता ब्रिगेडियर याह्या सरीअ ने सैन्य अभियानों के “पहले चरण” की उपलब्धियों का विवरण देते हुए कहा कि यमनी बलों ने पिछले महीने की 20 तारीख से अब तक सऊदी अरब के 8 तेल टैंकरों को निशाना बनाया है। इनमें 5 लाल सागर में और 3 अदन की खाड़ी तथा अरब सागर में थे।
उन्होंने यह भी कहा कि यमनी बलों ने सऊदी अरब के 48 तेल टैंकरों को लाल सागर और अरब सागर से गुजरने से रोक दिया और उन्हें वापस लौटने के लिए मजबूर किया।
सरीअ के बयान के अनुसार, सना की सेनाओं ने बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन के जरिए सऊदी अरब की गहराई में कई हवाई निवारक अभियान चलाए। उनके अनुसार, इन हमलों ने अपने लक्ष्यों को सटीक रूप से निशाना बनाया और सऊदी तेल कंपनी अरामको की दक्षिणी और पूर्वी क्षेत्रों में स्थित सुविधाओं को व्यापक नुकसान पहुंचाया।
यमनी प्रवक्ता ने कहा कि यन्बू, नजरान, जिज़ान और अबहा क्षेत्रों में कुल 9 हमले किए गए। इसके अलावा पूर्वी क्षेत्र से देश के अन्य इलाकों तक ईंधन पहुंचाने वाली प्रणाली को भी निशाना बनाया गया।
उन्होंने कहा, “ये अभियान सऊदी हमलों के जवाब में किए गए, जिनमें सना के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और हुदैदा बंदरगाह को निशाना बनाया गया था। इनका उद्देश्य राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा के समीकरण को मजबूत करना था।”
सरीअ ने सऊदी अरब को भविष्य में किसी भी तनाव बढ़ाने वाली कार्रवाई के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा कि यमन की प्रतिक्रिया व्यापक होगी।
उन्होंने अल-मुख़ा के तट पर दो सैन्य जहाजों के डूबने और उनमें आग लगने का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, इन जहाजों पर सऊदी हथियार और सैनिक सवार थे। उन्होंने कहा कि लाल सागर में कथित समुद्री डकैती की गतिविधियों में शामिल 10 से अधिक युद्धक नौकाओं का भी यही हश्र हुआ।
अल-मुख़ा के जानकार सूत्रों ने कहा कि यमनी बलों ने इस शहर के तट पर स्थित एक नौसैनिक अड्डे को निशाना बनाकर उसकी युद्धक क्षमता को पूरी तरह निष्क्रिय कर दिया है।
सऊदी सैनिकों की रसद और उनके जमावड़े वाले ठिकानों को निशाना बनाने के संबंध में सरीअ ने बताया कि अल-रुवैक, अल-अबरी, अल-वदीआ, मारिब और अल-मुख़ा क्षेत्रों में 14 सैन्य अभियान चलाए गए। उनके अनुसार, इन अभियानों में सैकड़ों “दुश्मन सैनिक” मारे गए या घायल हुए, जिनमें सऊदी कमांडर और अधिकारी भी शामिल थे।
अल-हद्दाद ने आगे लिखा कि रियाद के खिलाफ चार सप्ताह चले सैन्य अभियानों के परिणामों की घोषणा ऐसे समय में की गई है, जब सना ने अपनी मांगों की सीमा भी बढ़ा दी है।
सरीअ के अनुसार, सना की नई मांगों में यमनी जनता के खिलाफ सऊदी आक्रमण का पूर्ण अंत, किसी भी रूप या नाम से मौजूद विदेशी कब्जे वाली सेनाओं की वापसी, सऊदी समर्थित लड़ाकों को आर्थिक और सैन्य सहायता देना बंद करना तथा यमनी जनता की संपदा उन्हें वापस सौंपना शामिल है।
यमन की समुद्री नाकाबंदी शुरू होने के समय उसकी मुख्य मांगें संयुक्त राष्ट्र के “रोडमैप” के आधार पर समझौतों को लागू करना थीं। यह रोडमैप 2023 के अंत में तैयार हुआ था और इसमें समुद्री तथा हवाई नाकाबंदी हटाना, 2014 की सूची के अनुसार सरकारी कर्मचारियों के वेतन का भुगतान, युद्धबंदियों और हिरासत में लिए गए लोगों के मामले को पूरी तरह सुलझाना तथा यमन के विभिन्न प्रांतों के बीच बंद किए गए रास्तों को खोलना शामिल था।
सना के पर्यवेक्षकों के अनुसार, नई मांगों से संकेत मिलता है कि अंसारुल्लाह रियाद के साथ तनाव का स्तर बढ़ाने की तैयारी कर रहा है और उसके पास ऐसे सैन्य विकल्प मौजूद हैं, जिनका इस्तेमाल पहले चरण में नहीं किया गया।
इसी संदर्भ में सैन्य सूत्रों ने अल-अख़बार से कहा कि सरीअ का बयान एक नए चरण की शुरुआत की चेतावनी है, जो सऊदी अरब के लिए पहले चरण से भी अधिक दर्दनाक हो सकता है।
इन सूत्रों ने कहा कि सना के सैन्य विकल्पों में से एक विकल्प युद्ध को सऊदी अरब की “दक्षिणी सीमाओं” तक ले जाना और सीमा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर जमीनी सैन्य अभियान चलाना है।
अंसारुल्लाह आंदोलन के करीबी कुछ नेताओं ने भी पिछले दिनों सऊदी अरब द्वारा पश्चिमी तट तथा मारिब और अल-जौफ़ प्रांतों में अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने के जवाब में सऊदी साम्राज्य की दक्षिणी सीमाओं पर नए मोर्चे खोलने और संघर्ष को तेज करने की मांग की है।


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