“ऑस्कर” विजेता ब्रिटिश फ़िल्म निर्माता ने की ट्रंप की आलोचना: आज के दौर में सच और झूठ के बीच अंतर करना मुश्किल

“ऑस्कर” विजेता ब्रिटिश फ़िल्म निर्माता ने की ट्रंप की आलोचना: आज के दौर में सच और झूठ के बीच अंतर करना मुश्किल

ऑस्कर पुरस्कार विजेता ब्रिटिश फ़िल्म निर्माता डैनी बॉयल ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस प्रवृत्ति की आलोचना की है, जिसके तहत वे तथ्यों को ‘फ़ेक न्यूज़’ (फ़र्ज़ी ख़बर) करार देते हैं। बॉयल ने कहा कि आज के दौर में सच और झूठ के बीच अंतर करना लगातार मुश्किल होता जा रहा है। लंदन फ़िल्म फ़ेस्टिवल में अपनी नई फ़िल्म ‘इंक’ (Ink) के ब्रिटिश प्रीमियर के अवसर पर उन्होंने ट्रंप के सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ का ज़िक्र करते हुए कहा कि दुनिया का सबसे शक्तिशाली व्यक्ति किसी तथ्य को फ़र्ज़ी ख़बर क़रार देता है और अपने प्लेटफ़ॉर्म पर झूठ को सच के रूप में पेश करता है।

डैनी बॉयल ने 12 अक्टूबर को लंदन फिल्म फेस्टिवल में अपनी फिल्म ‘इंक’ की स्क्रीनिंग के अवसर पर समाचार एजेंसी एएफपी से बातचीत करते हुए कहा कि मीडिया में लोगों का ध्यान आकर्षित करने की होड़ ने सच्चाई और पत्रकारिता के मूल्यों को प्रभावित किया है। उनके अनुसार, इस प्रवृत्ति की शुरुआती झलक 1960 के दशक के उत्तरार्ध में दिखाई देने लगी थी, जब ऑस्ट्रेलियाई मूल के मीडिया कारोबारी रूपर्ट मर्डोक ने ब्रिटिश अखबार ‘द सन’ को एक पारंपरिक समाचार पत्र से बदलकर सनसनीखेज़ ख़बरों और घोटालों पर ध्यान केंद्रित करने वाले लोकप्रिय अख़बार में तब्दील करना शुरू किया।

बॉयल ने कहा, “अब हम ध्यान आकर्षित करने वाली इस अर्थव्यवस्था की क़ीमत चुका रहे हैं। अब किसी को नहीं पता कि सच क्या है। दुनिया का सबसे शक्तिशाली व्यक्ति किसी तथ्य को फ़र्ज़ी ख़बर क़रार देता है और अपने ट्रुथ सोशल पर झूठ को अपना सच बताता है।”

उनका इशारा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस कार्यशैली की ओर था, जिसमें वह अपने ख़िलाफ़ प्रकाशित होने वाली खबरों को अक्सर ‘फेक न्यूज़’ यानी फ़र्ज़ी ख़बर बताते हैं। बॉयल के अनुसार, यह स्थिति उस व्यापक बदलाव को दर्शाती है, जिसमें ख़बरों की लोकप्रियता, पाठकों का ध्यान और व्यावसायिक लाभ पत्रकारिता के मानकों पर हावी हो सकते हैं।

बॉयल की नई फिल्म ‘इंक’ इसी बदलाव की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को सामने लाती है। फिल्म में रूपर्ट मर्डोक के ब्रिटेन आगमन और अखबार ‘द सन’ में आए व्यापक बदलाव को विषय बनाया गया है। फिल्म में मर्डोक को एक ऐसे कारोबारी के रूप में दिखाया गया है, जो ब्रिटिश समाचार पत्र उद्योग की स्थापित परंपराओं को बदलना चाहता है। फिल्म यह भी दिखाती है कि किस तरह यौन संबंधों से जुड़ी खबरों, घोटालों और सनसनीखेज़  सामग्री ने अख़बार की बिक्री बढ़ाने में भूमिका निभाई।

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