न्यूयॉर्क: अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष में अमेरिकी नौसेना के विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन को लेकर एक अहम दावा सामने आया है। द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अब्राहम लिंकन के सामने पैदा हुई लॉजिस्टिक और सप्लाई से जुड़ी मुश्किलों की जड़ युद्ध के शुरुआती दिनों में ईरान की ओर से बहरीन स्थित अमेरिकी नौसैनिक अड्डे पर किए गए मिसाइल और ड्रोन हमले थे।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इन हमलों से अमेरिकी नौसेना के उस अहम बेस को काफी नुकसान पहुंचा, जो लंबे समय से खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य अभियानों के लिए रसद और आपूर्ति व्यवस्था का प्रमुख केंद्र रहा था।
अमेरिकी नौसेना के लिए बहरीन का ठिकाना केवल एक सामान्य सैन्य अड्डा नहीं था। यह पश्चिम एशिया में अमेरिकी नौसैनिक अभियानों के लिए ईंधन, हथियार, स्पेयर पार्ट्स और दूसरी जरूरी सैन्य सामग्री की आवाजाही में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है।
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, युद्ध के शुरुआती दौर में ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों ने इस सप्लाई ढांचे को नुकसान पहुंचाया। रिपोर्ट में इसे अमेरिकी नौसेना के क्षेत्रीय लॉजिस्टिक नेटवर्क के लिए बड़ा झटका बताया गया है।
इसका असर सीधे उन अमेरिकी नौसैनिक इकाइयों पर पड़ा, जो क्षेत्र में लगातार अभियान चला रही थीं। इनमें विमानवाहक पोत अब्राहम लिंकन भी शामिल था।
रिपोर्ट के अनुसार, बहरीन में मौजूद प्रमुख सप्लाई केंद्र को नुकसान पहुंचने और क्षेत्र के दूसरे बंदरगाहों पर भी ईरानी हमलों का खतरा बढ़ने के बाद पेंटागन को अपनी रणनीति बदलनी पड़ी।
अमेरिका ने अब अपने लॉजिस्टिक सपोर्ट के लिए ब्रिटेन के नियंत्रण वाले दूरदराज के दिएगो गार्सिया द्वीप का इस्तेमाल बढ़ाया। हिंद महासागर में स्थित यह सैन्य ठिकाना अमेरिकी अभियानों के लिए पहले से ही महत्वपूर्ण रहा है।
दिएगो गार्सिया, अब्राहम लिंकन की तैनाती वाले इलाके से करीब 3,500 किलोमीटर दूर बताया गया है। इसका मतलब है कि विमानवाहक पोत तक जरूरी सामान पहुंचाने के लिए अमेरिकी सेना को कहीं लंबा लॉजिस्टिक रास्ता अपनाना पड़ा।
युद्ध के दौरान किसी विमानवाहक पोत के लिए लगातार ईंधन, हथियार, स्पेयर पार्ट्स, भोजन और दूसरे जरूरी संसाधनों की आपूर्ति बेहद महत्वपूर्ण होती है। सप्लाई लाइन जितनी लंबी होगी, उसे बनाए रखना उतना ही जटिल और महंगा हो सकता है।
ऐसे में बहरीन के नजदीकी सप्लाई नेटवर्क के बाधित होने और दूर स्थित दिएगो गार्सिया पर निर्भरता बढ़ने से अमेरिकी नौसेना के अभियानों पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की संभावना पैदा हुई।
विमानवाहक पोत अपने आप में एक तैरता हुआ सैन्य अड्डा होता है। इसमें बड़ी संख्या में विमान, हजारों सैन्यकर्मी और भारी मात्रा में हथियार व उपकरण होते हैं। लगातार युद्ध अभियान चलाने के दौरान इसकी जरूरतें भी बहुत ज्यादा होती हैं।
लड़ाकू विमानों के लिए ईंधन और हथियारों की लगातार आपूर्ति के अलावा विमानवाहक पोत को रखरखाव के लिए स्पेयर पार्ट्स, तकनीकी उपकरण और अन्य सामग्री की जरूरत होती है।
इसलिए किसी क्षेत्रीय लॉजिस्टिक हब के क्षतिग्रस्त होने का असर केवल उस बेस तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उससे जुड़े समुद्री और हवाई अभियानों की पूरी सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है।
रिपोर्ट में सामने आई तस्वीर के मुताबिक, ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों ने अमेरिकी सेना के सामने सिर्फ सीधा सैन्य खतरा ही नहीं खड़ा किया, बल्कि उसकी लॉजिस्टिक व्यवस्था को भी चुनौती दी।
अगर किसी सैन्य अभियान में हथियार और जरूरी सामान समय पर अग्रिम मोर्चे तक नहीं पहुंच पाते, तो आधुनिक सेना की ऑपरेशनल क्षमता पर असर पड़ सकता है। खासकर विमानवाहक पोत जैसे बड़े प्लेटफॉर्म के मामले में यह चुनौती और महत्वपूर्ण हो जाती है।
बहरीन के सप्लाई नेटवर्क को नुकसान पहुंचने के बाद अमेरिकी सेना को वैकल्पिक व्यवस्था पर निर्भर होना पड़ा। दिएगो गार्सिया की ओर सप्लाई का रुख इसी रणनीतिक बदलाव का हिस्सा बताया जा रहा है।
बहरीन से हटकर दिएगो गार्सिया पर अधिक निर्भरता का सबसे बड़ा असर सप्लाई की दूरी पर पड़ता है। अब्राहम लिंकन से करीब 3,500 किलोमीटर दूर स्थित लॉजिस्टिक केंद्र तक सामान पहुंचाना और फिर उसे समुद्र के रास्ते वापस ऑपरेशन क्षेत्र तक भेजना एक जटिल प्रक्रिया है।
इसमें ज्यादा समय, ज्यादा परिवहन संसाधन और अधिक सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत पड़ सकती है। इसके अलावा युद्ध क्षेत्र के करीब मौजूद सप्लाई हब की तुलना में दूर स्थित बेस से तेजी से आपूर्ति करना कठिन हो सकता है।
अब्राहम लिंकन से जुड़ी यह स्थिति बताती है कि आधुनिक युद्ध में सिर्फ अत्याधुनिक विमान, मिसाइल और युद्धपोत ही निर्णायक नहीं होते। लॉजिस्टिक नेटवर्क भी किसी सैन्य अभियान की रीढ़ होता है।
यदि दुश्मन सप्लाई अड्डों, बंदरगाहों और परिवहन मार्गों को निशाना बनाने में सफल होता है, तो हजारों किलोमीटर दूर तैनात सैन्य ताकत को लगातार सक्रिय रखना मुश्किल हो सकता है।


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