सऊदी समर्थित लड़ाके, अंसारुल्लाह के डर से हमास से मदद की गुहार लगा रहे हैं
यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन द्वारा सऊदी अरब और उसके समर्थक लड़ाकों के खिलाफ सैन्य अभियान तेज किए जाने के बीच, मारिब शहर के आदिवासी सूत्रों ने बताया है कि मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़े ‘इस्लाह’ पार्टी के नेता शहर को अंसारुल्लाह के नियंत्रण में जाने से रोकने के लिए हमास समेत विभिन्न आंतरिक और बाहरी पक्षों को मध्यस्थता के लिए शामिल करने की कोशिश कर रहे हैं।
फार्स समाचार एजेंसी के अंतरराष्ट्रीय समूह के अनुसार, अल-अखबार ने अपनी एक रिपोर्ट में लिखा है कि हमास की मध्यस्थता विफल होने की खबरों के बाद इस्लाह पार्टी की चिंता बढ़ गई है कि अंसारुल्लाह मारिब पर व्यापक सैन्य हमला कर सकता है। मारिब को सऊदी अरब समर्थित समूहों के लिए एक प्रमुख रसद और सैन्य आपूर्ति केंद्र में बदल दिया गया है।
इसी संबंध में सना के कई जानकार सैन्य सूत्रों ने कहा है कि अभी तक मारिब में तनाव बढ़ाने का कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। हालांकि, दक्षिणी मोर्चे पर जारी सैन्य घटनाक्रम के जवाब में ऐसा निर्णय लिए जाने की संभावना से इनकार भी नहीं किया जा सकता।
अंसारुल्लाह के राजनीतिक कार्यालय के सदस्य मुहम्मद अल-बुखैती पहले ही इस संकट में हमास के हस्तक्षेप की पुष्टि कर चुके हैं। वहीं, सना स्थित विदेश मंत्रालय ने बताया कि उसे दो दिन पहले हमास के राजनीतिक ब्यूरो के प्रमुख खलील अल-हय्या का एक संदेश प्राप्त हुआ था।
दूसरी ओर, ‘राष्ट्रपति परिषद’ के सदस्य और मारिब के गवर्नर सुल्तान अल-अरादा ने कल यमन में फ्रांस की राजदूत कैथरीन कॉर्म-क्यूमॉन के साथ फोन पर बातचीत की। दोनों ने मारिब में ताजा सैन्य हालात पर चर्चा की। अल-अरादा ने कहा कि मौजूदा तनाव बढ़ने से आर्थिक हितों और विशेष रूप से इस प्रांत में मौजूद फ्रांस के तेल संबंधी हितों को खतरा पैदा हो सकता है।
इस बीच, पिछले कुछ दिनों में दोनों पक्षों के बीच सैन्य संघर्ष तेज हुआ है और हाल के घंटों में, विशेषकर मारिब शहर के दक्षिणी हिस्से में, लड़ाई और अधिक तीव्र हो गई है।
तनाव में यह वृद्धि सऊदी अरब के सैन्य और रसद आपूर्ति केंद्रों के खिलाफ सना की सेनाओं द्वारा उत्तरी मारिब प्रांत तथा हद्रामौत से जुड़े अल-अबर क्षेत्र में जारी हवाई हमलों के साथ हुई है।
सना के जानकार सैन्य सूत्रों ने बताया कि मारिब के कई मोर्चों पर पिछले कुछ दिनों से छिटपुट संघर्ष जारी है। वहीं, स्थानीय सूत्रों के अनुसार, हाल की लड़ाई जो कल तड़के शुरू हुई, उसमें विभिन्न प्रकार के हथियारों का इस्तेमाल किया गया और यह कई घंटों तक जारी रही। इस स्थिति ने इस्लाह पार्टी की चिंता बढ़ा दी है कि कहीं मारिब शहर उसके हाथ से न निकल जाए।
पर्यवेक्षकों का मानना है कि मारिब शहर के आसपास संघर्ष का दायरा बढ़ने से सना की सेनाओं को व्यापक सैन्य अभियान शुरू करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है, जिसका परिणाम प्रांत की राजधानी के पतन के रूप में सामने आ सकता है। खास तौर पर इसलिए कि ये सेनाएं वर्तमान में प्रांत के कुल 14 में से 12 जिलों पर नियंत्रण रखती हैं।
अंसारुल्लाह के विरोधी पक्षों का नियंत्रण मुख्य रूप से शहर के केंद्रीय हिस्से और वादी उबैदा तक सीमित है। हालांकि, ये क्षेत्र तेल और गैस से समृद्ध हैं। यहां से निकाले जाने वाले संसाधनों का संबंध शहर के उत्तर में स्थित साफ़िर तेल क्षेत्र की तेल सुविधाओं से है।
मारिब में 2022 की शुरुआत से संघर्ष रुकने के बाद क्षेत्रीय नियंत्रण का नक्शा लगभग अपरिवर्तित रहा है। अंसारुल्लाह लगातार आक्रामक स्थिति में रहा, जबकि सऊदी अरब समर्थित समूह और इस्लाह पार्टी के लड़ाके शहर के आसपास रक्षात्मक स्थिति में बने रहे हैं और अब भी इसी स्थिति में हैं।
पर्यवेक्षकों का कहना है कि उस समय बदले शक्ति-संतुलन ने आज अंसारुल्लाह के लिए शहर के आसपास के मोर्चों पर महत्वपूर्ण बढ़त हासिल करने की संभावना पैदा कर दी है। इसके अलावा, वह दक्षिण की ओर बैहान के मोर्चों तक अपना प्रभाव बढ़ा सकता है। ऐसा होने पर अंसारुल्लाह को साफ़िर के महत्वपूर्ण तेल संसाधनों पर नियंत्रण हासिल करने का रास्ता मिल सकता है।
मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़ी इस्लाह पार्टी, रियाद समर्थित अदन स्थित सरकार के प्रमुख घटकों में से एक मानी जाती है।


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