हश्द अल-शाबी के हथियार जमा कराने का सवाल ही नहीं: इराक़ी अधिकारी

हश्द अल-शाबी के हथियार जमा कराने का सवाल ही नहीं: इराक़ी अधिकारी

इराक़ में हश्द अल-शाबी के हथियार जमा कराने को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच इराक़ी सुरक्षा सूचना केंद्र के प्रमुख साद मान ने स्पष्ट किया है कि राज्य के हाथों में हथियारों का एकाधिकार सुनिश्चित करने का फैसला हश्द अल-शाबी पर लागू नहीं होता। उन्होंने कहा कि हश्द अल-शाबी कोई गैर-कानूनी या राज्य से बाहर काम करने वाला सशस्त्र समूह नहीं, बल्कि इराक़ की आधिकारिक सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा है।

साद मान के अनुसार, हथियारों को केवल राज्य के नियंत्रण में रखने का फैसला उन सशस्त्र समूहों के लिए है, जो देश की आधिकारिक सुरक्षा संस्थाओं और कानूनी ढांचे से बाहर गतिविधियां संचालित करते हैं। हश्द अल-शाबी इस श्रेणी में नहीं आता, क्योंकि उसे इराक़ की सुरक्षा और सैन्य व्यवस्था में आधिकारिक दर्जा प्राप्त है।

उन्होंने इराक़ की सरकारी समाचार एजेंसी वाअ से बातचीत में कहा कि हश्द अल-शाबी इराक़ की सशस्त्र सेनाओं का हिस्सा है और इसके जवान 2016 के कानून संख्या 40 तथा देश के अन्य लागू सैन्य कानूनों के तहत अपनी जिम्मेदारियां निभाते हैं। इसलिए इसे किसी बाहरी या समानांतर सशस्त्र संगठन के रूप में पेश करना सही नहीं है।

आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका

हश्द अल-शाबी का गठन इराक़ में आतंकवादी संगठन आईएसआईएस के बढ़ते खतरे के दौर में हुआ था। इस बल ने इराक़ी सेना और अन्य सुरक्षा संस्थानों के साथ मिलकर आतंकवाद के खिलाफ अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उसके लड़ाकों ने देश के कई इलाक़ों को आतंकवादी संगठनों के कब्जे से मुक्त कराने के अभियानों में हिस्सा लिया और इराक़ की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में योगदान दिया।

इसी वजह से हश्द अल-शाबी के समर्थकों का कहना है कि इसे इराक़ की राष्ट्रीय सुरक्षा संरचना से अलग करके देखना उन बलों की भूमिका को नज़रअंदाज़ करना होगा, जिन्होंने देश के कठिन सुरक्षा दौर में आतंकवाद का मुकाबला किया।

समानांतर कमान नहीं, राज्य की सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा

साद मान ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य हथियारों के इस्तेमाल को किसी समानांतर कमान के हवाले होने से रोकना है। इसका मतलब यह है कि देश में कोई ऐसा सशस्त्र ढांचा नहीं होना चाहिए जो इराक़ी राज्य और उसके आधिकारिक सुरक्षा संस्थानों के बाहर स्वतंत्र रूप से काम करे।

लेकिन हश्द अल-शाबी के मामले में स्थिति अलग है। चूंकि यह कानूनी रूप से इराक़ की सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा है और इसके जवान सैन्य कानूनों के अधीन हैं, इसलिए उसके हथियारों को किसी गैर-कानूनी हथियारबंद समूह के हथियारों के समान मानना उचित नहीं होगा।

इस बयान से यह संदेश भी स्पष्ट होता है कि इराक़ में हथियारों पर राज्य के नियंत्रण की नीति का उद्देश्य हश्द अल-शाबी को समाप्त करना या उसे निरस्त्र करना नहीं, बल्कि गैर-राज्य और अवैध सशस्त्र ढांचों को नियंत्रित करना है।

साद मान ने अंत में दोहराया कि हश्द अल-शाबी इराक़ की सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा है और उसके जवान देश के सैन्य कानूनों के तहत काम करते हैं। इस तरह इराक़ी अधिकारी ने हश्द अल-शाबी की संवैधानिक और कानूनी स्थिति को स्पष्ट करते हुए उसके हथियार जमा कराने की चर्चाओं को खारिज कर दिया है।

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