ईरान युद्ध में ट्रंप को रोकने का मौका गंवा चुकी है अमेरिकी कांग्रेस: न्यूयार्क टाइम्स

ईरान युद्ध में ट्रंप को रोकने का मौका गंवा चुकी है अमेरिकी कांग्रेस: न्यूयार्क टाइम्स

अमेरिकी अख़बार न्यूयार्क टाइम्स (The New York Times) की एक विस्तृत रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका की कांग्रेस, विशेष रूप से रिपब्लिकन सांसद, ईरान के खिलाफ जारी सैन्य अभियान पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को नियंत्रित करने का महत्वपूर्ण अवसर खो चुके हैं। रिपोर्ट के अनुसार, महीनों तक रिपब्लिकन नेताओं ने युद्ध संबंधी अधिकार लगभग पूरी तरह व्हाइट हाउस के हाथों में छोड़ दिए और अब जब युद्ध लंबा खिंचने लगा है तथा उसके राजनीतिक और सैन्य परिणामों पर सवाल उठ रहे हैं, तब कांग्रेस की भूमिका काफी कमजोर हो गई है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी संविधान युद्ध की औपचारिक अनुमति देने का अधिकार कांग्रेस को देता है, लेकिन ट्रंप प्रशासन ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू करते समय व्यापक संसदीय मंजूरी नहीं ली। इसके बावजूद अधिकांश रिपब्लिकन सांसदों ने राष्ट्रपति का समर्थन किया और डेमोक्रेट सांसदों द्वारा पेश किए गए उन प्रस्तावों को लगातार रोकते रहे जिनका उद्देश्य युद्ध को सीमित करना या राष्ट्रपति को कांग्रेस से अनुमति लेने के लिए बाध्य करना था।

डेमोक्रेट नेताओं का कहना था कि बिना संसदीय अनुमति के युद्ध को आगे बढ़ाना अमेरिकी संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरा है। उन्होंने कई बार ऐसे प्रस्ताव पेश किए जिनमें ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई पर रोक लगाने, उसकी समयसीमा तय करने और कांग्रेस की निगरानी बढ़ाने की मांग की गई थी। हालांकि रिपब्लिकन सांसदों ने इन प्रयासों का विरोध करते हुए तर्क दिया कि युद्ध के दौरान राष्ट्रपति की शक्तियों को सीमित करना अमेरिका की सैन्य रणनीति को कमजोर कर सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, अब हालात बदलते दिखाई दे रहे हैं। युद्ध लंबा खिंचने, बढ़ते सैन्य खर्च और मध्य पूर्व में संभावित अस्थिरता को लेकर कुछ रिपब्लिकन सांसदों के भीतर भी चिंता बढ़ने लगी है। इसी वजह से हाल के हफ्तों में कांग्रेस के कुछ सदस्य ऐसे सीमित युद्ध-अधिकार प्रस्ताव पर विचार कर रहे थे जिसमें सैन्य अभियान के उद्देश्य और उससे बाहर निकलने की शर्तें तय की जा सकें।

लेकिन अख़बार का कहना है कि यह पहल अब काफी देर से हो रही है। अमेरिकी कानून के तहत युद्ध शुरू होने के बाद एक सीमित अवधि के भीतर कांग्रेस तेज़ प्रक्रिया के जरिए ऐसे प्रस्तावों पर कार्रवाई कर सकती थी, मगर वह 30 दिनों की समयसीमा अब समाप्त हो चुकी है। इसके चलते ट्रंप प्रशासन पर तत्काल संसदीय दबाव बनाना कठिन हो गया है।

विश्लेषण में यह भी कहा गया है कि इस पूरे घटनाक्रम ने अमेरिकी राजनीति में राष्ट्रपति और कांग्रेस के बीच शक्तियों के संतुलन को लेकर नई बहस छेड़ दी है। आलोचकों का मानना है कि कांग्रेस ने समय रहते अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी नहीं निभाई, जिसके कारण अब राष्ट्रपति को सैन्य फैसलों में कहीं अधिक स्वतंत्रता मिल गई है।

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