ट्रंप, ईरान में मिली बेइज्जती का बदला क्यूबा से लेना चाहते हैं: गार्जियन 

ट्रंप, ईरान में मिली बेइज्जती का बदला क्यूबा से लेना चाहते हैं: गार्जियन 

ब्रिटिश समाचार पत्र The Guardian ने लिखा है कि जर्मनी के चांसलर Friedrich Merz द्वारा यह कहे जाने के बाद कि अमेरिका को ईरान के सामने अपमान का सामना करना पड़ा है, यह माना जा सकता है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नए सैन्य संघर्षों में रुचि कम हो जाएगी। लेकिन इतिहास बताता है कि पराजय हमेशा किसी गिरती हुई शक्ति को संयमित नहीं करती, बल्कि कई बार उसे और अधिक आक्रामक तथा खतरनाक बना देती है।

लेख के लेखक ने आगे कहा कि ट्रंप और उनके करीबी सहयोगियों के मन में यह धारणा हो सकती है कि क्यूबा पर सैन्य कार्रवाई हाल की असफलताओं की भरपाई कर सकती है और अमेरिकी सैन्य श्रेष्ठता की छवि को फिर से स्थापित करने में मददगार साबित हो सकती है।

लेख में यह भी कहा गया है कि यद्यपि क्यूबा की सैन्य क्षमता की तुलना ईरान से नहीं की जा सकती, फिर भी अमेरिका की किसी भी सैन्य कार्रवाई का सामना क्यूबा की जनता और उसकी सेना के प्रतिरोध से होने की संभावना है। इसलिए ऐसा कोई कदम अपेक्षा से अधिक जटिल और महंगा साबित हो सकता है।

लेख में कहा गया है कि ट्रंप की राजनीति लंबे समय से शक्ति-प्रदर्शन और कठोर रुख की छवि पर आधारित रही है। ऐसे में यदि उनके समर्थकों के बीच यह धारणा बनती है कि अमेरिका को ईरान के सामने अपेक्षित सफलता नहीं मिली, तो प्रशासन पर किसी नए मोर्चे पर अपनी ताकत दिखाने का दबाव बढ़ सकता है। इसी संदर्भ में क्यूबा का नाम लिया गया है, जिसे कुछ अमेरिकी रणनीतिक हलकों में अपेक्षाकृत आसान लक्ष्य के रूप में देखा जा सकता है।

विश्लेषण में ट्रंप की विदेश नीति पर भी सवाल उठाए गए हैं। लेखक का मत है कि यदि किसी सैन्य कार्रवाई का उद्देश्य वास्तविक सुरक्षा चिंताओं के बजाय राजनीतिक प्रतिष्ठा की बहाली हो, तो उसका परिणाम क्षेत्रीय अस्थिरता और मानवीय संकट के रूप में सामने आ सकता है। लेख के अनुसार, अमेरिका को अपनी अंतरराष्ट्रीय साख सुधारने के लिए सैन्य शक्ति के प्रदर्शन के बजाय कूटनीति, संवाद और बहुपक्षीय सहयोग का रास्ता अपनाना चाहिए।

ध्यान देने योग्य बात यह है कि यह The Guardian में प्रकाशित एक विश्लेषणात्मक लेख का दृष्टिकोण है, न कि किसी अमेरिकी सरकारी नीति या आधिकारिक योजना की पुष्टि। अभी तक अमेरिका की ओर से क्यूबा के खिलाफ किसी आसन्न सैन्य कार्रवाई की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

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