हार्मोज़ जलडमरूमध्य का संकट केवल तेल तक सीमित नहीं; 9 अन्य महत्वपूर्ण वस्तुएँ भी प्रभावित:WEF

हार्मोज़ जलडमरूमध्य का संकट केवल तेल तक सीमित नहीं; 9 अन्य महत्वपूर्ण वस्तुएँ भी प्रभावित:WEF

मध्य पूर्व में जारी युद्ध ने ऊर्जा अवसंरचना को गंभीर नुकसान पहुँचाया है और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के बंद होने से तेल की कीमतें बढ़ गई हैं। लेकिन इसका प्रभाव सिर्फ ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्र के गैर-तेल निर्यात को भी बाधित कर रहा है। इन वस्तुओं में मेथनॉल, एल्युमिनियम, सल्फर, ग्रेफाइट और अन्य महत्वपूर्ण औद्योगिक सामग्री शामिल हैं, जो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं और हरित ऊर्जा की ओर बढ़ने की प्रक्रिया को प्रभावित कर रही हैं।

इन बाधाओं का असर वैश्विक सप्लाई चेन में तेजी से दिखाई दे रहा है—भविष्य की फसल के लिए कृषि उर्वरकों से लेकर हाई-टेक उद्योगों के लिए आवश्यक खनिजों तक।

🔸 प्रमुख प्रभावित वस्तुएँ:

🔸 उर्वरक (यूरिया और अमोनिया):

खाड़ी क्षेत्र समुद्री उर्वरकों के निर्यात का एक प्रमुख केंद्र है और वैश्विक निर्यात का कम से कम 20% यहीं से होता है। यूरिया के मामले में यह निर्भरता और अधिक है—दुनिया के 46% व्यापार की आपूर्ति इसी क्षेत्र से होती है। भारत, ब्राज़ील और चीन जैसे बड़े कृषि देशों के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण है। लंबे समय तक बाधा रहने पर खाद्य उत्पादन लागत और वैश्विक महंगाई बढ़ सकती है।

सल्फर (गंधक):

यह क्षेत्र तेल और गैस रिफाइनिंग का प्रमुख उप-उत्पाद है, जिसका उत्पादन लगभग रुक गया है। वैश्विक समुद्री व्यापार का लगभग आधा हिस्सा हॉर्मुज़ से गुजरता है। इसकी कमी बैटरी, फॉस्फेट उर्वरक और टिकाऊ परिवहन उद्योगों को प्रभावित करेगी।

मेथनॉल:

विश्व के लगभग एक-तिहाई समुद्री मेथनॉल व्यापार का रास्ता हॉर्मुज़ से होकर जाता है। इसके बाधित होने से रेज़िन, कोटिंग्स और प्लास्टिक जैसे उत्पादों के लिए आवश्यक रसायनों की आपूर्ति प्रभावित होगी।

ग्रेफाइट:

इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियों में उपयोग होने वाला सिंथेटिक ग्रेफाइट पेट्रोलियम कोक पर निर्भर है। इसकी कमी और महंगाई बैटरी की लागत बढ़ा सकती है और निकेल व कोबाल्ट जैसे अन्य बैटरी पदार्थों की सप्लाई चेन पर भी असर डालेगी।

एल्युमिनियम:

चीन के बाहर मध्य पूर्व एल्युमिनियम का एक बड़ा उत्पादक है। खाड़ी क्षेत्र की रिफाइनरियों में उत्पादन बाधित होने से निर्माण, परिवहन और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों पर असर पड़ रहा है।

हीलियम:

कतर विश्व का लगभग एक-तिहाई हीलियम उत्पादन करता है, जो प्राकृतिक गैस प्रोसेसिंग का उप-उत्पाद है। हीलियम चिप निर्माण और MRI मशीनों के संचालन के लिए अत्यंत आवश्यक है।

ग्लाइकोल (MEG):

यह पॉलिएस्टर फाइबर, पैकेजिंग और वस्त्र उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण कच्चा माल है। चीन, भारत और इंडोनेशिया जैसे बड़े आयातकों को इसकी कमी का सामना करना पड़ सकता है, जिससे कीमतें बढ़ेंगी।

लौह अयस्क और स्टील पेलेट्स:

खाड़ी क्षेत्र वैश्विक इस्पात उद्योग के लिए महत्वपूर्ण कच्चा माल सप्लाई करता है। हॉर्मुज़ से जहाजों का आवागमन रुकने से परिवहन समय और लागत बढ़ गई है, जिससे उत्पादन प्रभावित हो रहा है।

ग्रीन हाइड्रोजन अवसंरचना:

यह संघर्ष ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाओं और उनके निर्यात ढांचे के विकास को धीमा कर सकता है तथा निवेश जोखिम बढ़ा सकता है।

विश्व आर्थिक मंच की 2026 की ग्लोबल रिस्क रिपोर्ट के अनुसार, अब भू-आर्थिक टकराव आर्थिक और औद्योगिक नीतियों का प्रमुख चालक बन चुका है। जहाँ तत्काल प्रभाव वस्तुओं पर गंभीर है, वहीं व्यापक संकेत यह है कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएँ अधिक लचीली और विविध बनने की ओर बढ़ रही हैं।

सरकारों और उद्योगों के लिए ऊर्जा, धातुओं और रसायनों जैसे आवश्यक संसाधनों तक सुरक्षित पहुंच सुनिश्चित करना अब आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है।

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