फीफा: विश्व कप में फ़िलिस्तीनी टीम नहीं, लेकिन हर मैदान में फ़िलिस्तीन ज़िंदा है 

फीफा: विश्व कप में फ़िलिस्तीनी टीम नहीं, लेकिन हर मैदान में फ़िलिस्तीन ज़िंदा है 

अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको में चल रहा फीफा विश्व कप 2026 केवल फुटबॉल का आयोजन नहीं रह गया है, बल्कि फ़िलिस्तीन के समर्थन में वैश्विक एकजुटता का भी एक बड़ा मंच बन गया है। हालांकि फ़िलिस्तीन की राष्ट्रीय टीम इस टूर्नामेंट के लिए क्वालिफाई नहीं कर सकी, लेकिन विभिन्न देशों से आए हजारों दर्शकों ने स्टेडियमों, फैन ज़ोन और सार्वजनिक स्थानों पर फ़िलिस्तीनी झंडे लहराकर, “आज़ाद फ़िलिस्तीन” के नारे लगाकर तथा ग़ज़ा में जारी इस्राईल की सैन्य कार्रवाई के विरोध में प्रदर्शन कर अपना समर्थन व्यक्त किया।

इसके साथ ही सोशल मीडिया पर भी फ़िलिस्तीन के समर्थन में हैशटैग और वीडियो बड़े पैमाने पर साझा किए गए। वहीं कई देशों में “इस्राईल को रेड कार्ड दिखाओ” अभियान भी प्रमुखता से देखने को मिला।अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको में आयोजित फीफा विश्व कप 2026 केवल फुटबॉल का टूर्नामेंट नहीं रहा, बल्कि यह फिलिस्तीन के समर्थन में वैश्विक एकजुटता का भी बड़ा मंच बन गया। हालांकि फिलिस्तीन की राष्ट्रीय टीम विश्व कप के लिए क्वालीफाई नहीं कर सकी, लेकिन दुनिया के विभिन्न देशों से आए हजारों प्रशंसकों ने स्टेडियमों, फैन ज़ोन और सार्वजनिक स्थानों पर फिलिस्तीनी झंडे लहराकर, “आजाद फिलिस्तीन” के नारे लगाकर तथा ग़ज़ा में जारी इस्राईली सैन्य कार्रवाई के विरोध में प्रदर्शन कर अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर भी फिलिस्तीन से जुड़े हैशटैग और वीडियो व्यापक रूप से साझा किए गए, जबकि “रेड कार्ड इस्राईल” अभियान भी विश्व स्तर पर चर्चा का विषय बना रहा।

विश्व कप के दौरान भले ही फिलिस्तीन की टीम मैदान में नहीं थी, लेकिन फिलिस्तीनी झंडा लगभग पूरे टूर्नामेंट में प्रमुखता से दिखाई देता रहा। विभिन्न देशों के हजारों प्रशंसकों ने मैचों से पहले सार्वजनिक चौकों, फैन ज़ोन और स्टेडियमों में फिलिस्तीनी झंडे लहराए तथा ग़ज़ा में जारी इस्राईली सैन्य अभियान के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद की। कई देशों के समर्थकों ने “आजाद फिलिस्तीन” के नारे लगाए और “रेड कार्ड इस्राईल” अभियान का समर्थन करते हुए मांग की कि इस्राईल को अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं से निलंबित किया जाए।

जर्मनी–पराग्वे मैच में फिलिस्तीनी-अमेरिकी परिवार की आवाज़

राउंड ऑफ़ 32 में जर्मनी और पराग्वे के बीच खेले गए मुकाबले में एक फिलिस्तीनी मूल के अमेरिकी परिवार ने अपने छोटे बच्चे के साथ फिलिस्तीनी झंडा लहराया। परिवार के एक सदस्य ने अनादोलु एजेंसी से कहा, “हम फिलिस्तीनी-अमेरिकी हैं। पूरे विश्व कप के दौरान फिलिस्तीन का जश्न मना रहे हैं। वे हमें कभी नहीं रोक सकते। आजाद फिलिस्तीन।” यह दृश्य मैच के दौरान दर्शकों का विशेष आकर्षण बना रहा।

मोरक्को के प्रशंसकों ने फिर दिखाई फिलिस्तीन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता

मोरक्को के प्रशंसकों ने विश्व कप की शुरुआत से ही फिलिस्तीन के समर्थन में जोरदार प्रदर्शन किया। ब्राज़ील के खिलाफ ग्रुप-सी के मैच से पहले न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर में हजारों मोरक्को समर्थक जुटे, जहां उन्होंने फिलिस्तीनी झंडे लहराए और “आजाद फिलिस्तीन” के नारे लगाए।

इसके बाद न्यूयॉर्क-न्यू जर्सी स्टेडियम में खेले गए मुकाबले के दौरान भी गोलपोस्ट के पीछे मौजूद मोरक्को के प्रशंसकों ने लगातार फिलिस्तीनी झंडे लहराए। वहीं नीदरलैंड के खिलाफ राउंड ऑफ़ 32 के मुकाबले में भी वे फिलिस्तीनी झंडों के साथ स्टेडियम पहुंचे और अपना समर्थन दोहराया। इससे पहले कतर विश्व कप 2022 में भी मोरक्को के प्रशंसक फिलिस्तीनी झंडे लहराने के कारण वैश्विक चर्चा में रहे थे।

बोस्निया के प्रशंसकों ने अपने इतिहास को याद करते हुए जताई एकजुटता

लॉस एंजिलिस में बोस्निया एवं हर्ज़ेगोविना और स्विट्जरलैंड के बीच खेले गए मुकाबले में बोस्नियाई समर्थकों ने फिलिस्तीनी झंडे लहराए। स्टेडियम में एक बड़ा बैनर भी लगाया गया था, जिस पर लिखा था, “सारायेवो की ओर से फिलिस्तीन के लिए समर्थन।”

बोस्नियाई प्रशंसकों का कहना था कि 1990 के दशक में उनके देश ने भी युद्ध और नरसंहार का दर्द झेला है, इसलिए वे फिलिस्तीनी जनता के दुख को अच्छी तरह समझते हैं।

क़तरी समर्थक फिलिस्तीनी कूफ़िया पहनकर पहुंचे

बोस्निया एवं हर्ज़ेगोविना और कतर के बीच हुए मुकाबले में भी फिलिस्तीन के समर्थन की झलक दिखाई दी। एक कतरी प्रशंसक पारंपरिक फिलिस्तीनी कूफ़िया पहने, चेहरे पर फिलिस्तीनी झंडे के रंगों की पेंटिंग किए और हाथ में फिलिस्तीनी झंडा लिए स्टेडियम में मौजूद था। अन्य कतरी समर्थकों ने भी फिलिस्तीनी झंडे लहराकर समर्थन व्यक्त किया।

फ्रांस के प्रशंसक भी फिलिस्तीनी झंडा लेकर पहुंचे

ग्रुप-आई में फ्रांस और सेनेगल के मुकाबले से पहले न्यूयॉर्क-न्यू जर्सी स्टेडियम में एक फ्रांसीसी समर्थक फिलिस्तीनी झंडा लिए दिखाई दिया। उसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए। कई लोगों ने इसे मानवता और एकजुटता का प्रतीक बताया। फ्रांस ने मुकाबला 3-1 से जीत लिया, लेकिन स्टेडियम में फिलिस्तीनी झंडे की मौजूदगी भी चर्चा का विषय बनी रही।

ब्राज़ील के समर्थकों ने भी दिखाया समर्थन

राउंड ऑफ़ 32 में जापान के खिलाफ मुकाबले से पहले ब्राज़ील के हजारों समर्थक पारंपरिक जुलूस के रूप में स्टेडियम की ओर बढ़े। इस जुलूस में एक प्रशंसक फिलिस्तीनी झंडा लिए हुए था, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा की गईं।

तुर्किये–अमेरिका मुकाबले में फिलिस्तीनी झंडा बना आकर्षण

ग्रुप-डी के अंतिम मुकाबले में तुर्किये ने मेजबान अमेरिका को 3-2 से हराया। मैच के दौरान गोलपोस्ट के पीछे खड़ा एक तुर्क समर्थक लगातार फिलिस्तीनी झंडा लहराता रहा। टीवी प्रसारण में वह कई बार दिखाई दिया और सोशल मीडिया पर भी इस दृश्य की व्यापक चर्चा हुई।

सोशल मीडिया पर भी फिलिस्तीन रहा प्रमुख विषय

विश्व कप के दौरान एक्स, इंस्टाग्राम, फेसबुक और टिकटॉक पर लाखों लोगों ने फिलिस्तीनी झंडों, समर्थकों के वीडियो और स्टेडियमों के दृश्य साझा किए। #FreePalestine, #StandWithPalestine, #RedCardIsrael, #Palestine और #WorldCup2026 जैसे हैशटैग व्यापक रूप से ट्रेंड करते रहे।

उपयोगकर्ताओं ने विशेष रूप से तुर्किये, मोरक्को, बोस्निया, कतर, फ्रांस और ब्राज़ील के प्रशंसकों के वीडियो साझा करते हुए लिखा कि भले ही फिलिस्तीन की टीम विश्व कप में नहीं है, लेकिन उसका झंडा लगभग हर बड़े मुकाबले में दिखाई दे रहा है।

स्टैच्यू ऑफ़ लिबर्टी की वेशभूषा में महिला ने उठाई फिलिस्तीन और लेबनान की आज़ादी की मांग

सिएटल में मिस्र और ईरान के बीच मुकाबले से पहले स्टेडियम के बाहर एक महिला स्टैच्यू ऑफ़ लिबर्टी की वेशभूषा में दिखाई दी। उनके हाथों में फिलिस्तीन और लेबनान के झंडे थे और वे दोनों देशों की आज़ादी के समर्थन में नारे लगा रही थीं। मैच के दौरान भी स्टेडियम में कई स्थानों पर फिलिस्तीनी झंडे दिखाई दिए।

अनेक देशों के समर्थकों ने जताया समर्थन

विश्व कप के दौरान केवल व्यक्तिगत प्रशंसकों ने ही नहीं, बल्कि तुर्किये, मोरक्को, अल्जीरिया, मिस्र, ईरान, सेनेगल और कतर सहित कई देशों के समर्थकों ने भी फिलिस्तीनी झंडे लहराए और समर्थन में नारे लगाए। यूरोप से स्पेन, स्कॉटलैंड और बोस्निया एवं हर्ज़ेगोविना के समर्थक भी फिलिस्तीन के पक्ष में दिखाई दिए। इससे यह संदेश गया कि भले ही फिलिस्तीन मैदान में मौजूद नहीं था, लेकिन उसका झंडा दुनिया के सबसे बड़े फुटबॉल आयोजन में लगातार दिखाई देता रहा।

फिलिस्तीन और इस्राईल, दोनों ही विश्व कप के लिए क्वालीफाई नहीं कर सके

फिलिस्तीन और इस्राईल, दोनों की राष्ट्रीय टीमें फीफा विश्व कप 2026 के लिए क्वालीफाई नहीं कर सकीं। फिलिस्तीन एशियाई क्वालीफायर के अंतिम चरण तक नहीं पहुंच सका और सुरक्षा परिस्थितियों के कारण उसे अपने अधिकांश घरेलू मुकाबले तटस्थ स्थानों पर खेलने पड़े। दूसरी ओर इस्राईल भी क्वालीफाइंग चरण पार नहीं कर सका। ग़ज़ा युद्ध के कारण उस पर अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं से निलंबन की मांग भी उठी, लेकिन वह खेल के आधार पर ही विश्व कप में जगह बनाने में असफल रहा।

रेड कार्ड इस्राईल” अभियान को भी मिली व्यापक चर्चा

विश्व कप के दौरान “रेड कार्ड इस्राईल” अभियान भी काफी चर्चा में रहा। इस अभियान के तहत दुनिया भर के कई फुटबॉल क्लबों, प्रशंसकों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने मांग की कि इस्राईल को भी अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं से निलंबित किया जाए।

अभियान के समर्थकों का दावा है कि ग़ज़ा में जारी युद्ध के दौरान खेल जगत को भी भारी नुकसान हुआ है। उनके अनुसार पिछले दो वर्षों में एक हजार से अधिक फिलिस्तीनी खिलाड़ी, जिनमें अधिकांश फुटबॉलर थे, मारे गए तथा लगभग 300 खेल सुविधाएं नष्ट हो गईं। इसी पृष्ठभूमि में विभिन्न देशों के समर्थक स्टेडियमों में “रेड कार्ड इस्राईल” के बैनर और पोस्टर लेकर पहुंचे।

कई प्रसिद्ध खिलाड़ी भी उठा चुके हैं आवाज़

तुर्किये सहित कई देशों ने लगातार इस्राईल पर अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतिबंध लगाने की मांग की है। इसके अलावा दुनिया के अनेक प्रसिद्ध फुटबॉल खिलाड़ियों और अन्य खेल हस्तियों ने भी ग़ज़ा की मानवीय स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए फिलिस्तीनी जनता के साथ एकजुटता दिखाई है।

खेल से आगे बढ़कर वैश्विक एकजुटता का प्रतीक

फीफा विश्व कप को दुनिया का सबसे बड़ा खेल आयोजन माना जाता है, जहां विभिन्न भाषाओं, संस्कृतियों और देशों के लोग एक साथ आते हैं। इस बार भी भले ही मुख्य आकर्षण फुटबॉल मुकाबले रहे, लेकिन अनेक स्टेडियमों और फैन ज़ोन में फिलिस्तीन के समर्थन में दिखाई देने वाली एकजुटता ने इस आयोजन को एक व्यापक मानवीय और सामाजिक विमर्श का हिस्सा बना दिया।

फिलिस्तीन की राष्ट्रीय टीम टूर्नामेंट में जगह नहीं बना सकी, लेकिन दुनिया के विभिन्न महाद्वीपों से आए प्रशंसकों ने अपने-अपने तरीके से फिलिस्तीनी जनता के साथ एकजुटता व्यक्त की। कहीं फिलिस्तीनी झंडे लहराए गए, कहीं “आजाद फिलिस्तीन” के नारे गूंजे और कहीं ग़ज़ा में तत्काल युद्धविराम तथा मानवीय सहायता बिना किसी बाधा के पहुंचाने की मांग दोहराई गई।

popular post

ईरान का सेंटकॉम की बैठक पर व्यंग्य, अपनी सुरक्षा में भी सक्षम नहीं बाहरी लोग

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) द्वारा बहरीन में आयोजित एक बड़ी क्षेत्रीय सुरक्षा बैठक को लेकर

संयुक्त अरब अमीरात ने इस्राईली नागरिकों को वीज़ा देना किया शुरू

कुछ दिनों पहले इस्राईल के साथ अपने संबंधों को सार्वजनिक कर कई समझौते पर हस्ताक्षर

4 दिसंबर भारतीय नौसेना दिवस

4 दिसंबर भारतीय नौसेना दिवस हर देश किसी न किसी तारीख़ को नौसेना दिवस मनाया

कल से शुरू होगी टी-20 सीरीज, जानिए कितने बजे खेला जाएगा मैच

भारतीय टीम फ़िलहाल अपने ऑस्टेलिया के दौरे पर है जहाँ पर अब तक एकदिवसीय सीरीज़

कुछ हफ़्तों में मेड इन इंडिया कोरोना वैक्सीन आने की उम्मीद: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

कोरोना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज सुबह एक सर्वदलीय बैठक की. पीएम मोदी ने

महाराष्ट्र में बीजेपी को विधान परिषद चुनाव में लगा तगड़ा झटका, सिर्फ एक सीट पर मिल सकी जीत

महाराष्ट्र में बीजेपी को विधान परिषद चुनाव में तगड़ा झटका लगा है. विधान परिषद की

5वें दौर की बैठक: किसानों का दो टूक जवाब हम सरकार से चर्चा नहीं, बल्कि ठोस जवाब चाहते हैं वो भी लिखित में,

कृषि कानूनों को लेकर पिछले 9 दिनों से धरने पर बैठे किसानों के साथ केंद्र

रूस की नसीहत, वेस्ट बैंक में एकपक्षीय कार्रवाई से बचे इस्राईल

रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोफ़ ने मेडिटरेनीयन डायलॉग्स बैठक को संबोधित करते हुए कहा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *