एपस्टीन और ट्रंप एक-दूसरे से नफरत करते थे: जेडी वेंस

एपस्टीन और ट्रंप एक-दूसरे से नफरत करते थे: जेडी वेंस

अमेरिका की राजनीति में एक बार फिर ट्रंप और एपस्टीन के संबंधों को लेकर बहस तेज हो गई है। इस बीच ट्रंप सरकार में उपराष्ट्रपति वेंस ने सफ़ाई देते हुए कहा कि, दोनों के बीच दोस्ती नहीं, बल्कि गहरी दूरी और नफरत थी। उन्होंने डेमोक्रेट नेताओं के उस आरोप को खारिज किया, जिसमें कहा जाता है कि ट्रंप, एपस्टीन के करीबी सहयोगी या “सबसे अच्छे दोस्त” थे।

वेंस के अनुसार, यह मुद्दा राजनीतिक लाभ के लिए बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। उनका कहना है कि ट्रंप ने वर्षों पहले ही एपस्टीन से अपने संबंध खत्म कर लिए थे और बाद में दोनों के बीच संबंध खराब हो गए थे।

गौरतलब है कि जेफ्री एपस्टीन एक कुख्यात अमेरिकी निवेशक और यौन अपराधी था, जिस पर नाबालिग लड़कियों की तस्करी और उनके यौन शोषण का बड़ा नेटवर्क चलाने के गंभीर आरोप थे। इस नेटवर्क में कई प्रभावशाली और ताकतवर लोगों के शामिल होने की भी बात सामने आई थी, जिससे यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया।

एपस्टीन की गिरफ्तारी और बाद में उसकी रहस्यमयी मौत के बाद से ही इस मामले में कई साजिशों और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। ऐसे में ट्रंप और एपस्टीन के रिश्तों को लेकर बयानबाज़ी अमेरिकी राजनीति का एक संवेदनशील और विवादित मुद्दा बना हुआ है।

ट्रंप–एपस्टीन संबंध: सफाई या सच्चाई से बचने की कोशिश?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि, अगर डोनाल्ड ट्रंप और जेफ्री एपस्टीन के बीच दूरी थी, तो बार-बार सफाई क्यों दी जा रही है, ओर वेंस यह सफाई क्यों दे रहे हैं जबकि दोनों की पुरानी तस्वीरें भी सामने आ चुकी हैं?

सबसे बड़ा विरोधाभास यही है कि एक तरफ ट्रंप और उनके समर्थक कहते हैं कि उनका एपस्टीन से कोई करीबी संबंध नहीं था, वहीं दूसरी तरफ दोनों की कई पुरानी तस्वीरें, सार्वजनिक आयोजनों में साथ मौजूदगी और सामाजिक मेलजोल के प्रमाण सामने आ चुके हैं। ऐसे में “हम करीब नहीं थे” वाली दलील कई लोगों को अधूरी और संदिग्ध लगती है।

यही वजह है कि सफाई बार-बार दी जा रही है—क्योंकि मामला सिर्फ अतीत का नहीं, बल्कि भरोसे (credibility) का है। जब कोई नेता बार-बार अपनी बात बदलता हुआ या सफाई देता हुआ दिखाई देता है, तो स्वाभाविक रूप से संदेह और गहरा हो जाता है। अगर संबंध वास्तव में नगण्य थे, तो इतनी सक्रिय बचाव की जरूरत ही क्यों पड़ती?

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