सऊदी की सुरक्षा के लिए हर तरह की आवश्यक सहायता प्रदान की जाएगी: मिस्र

सऊदी की सुरक्षा के लिए हर तरह की आवश्यक सहायता प्रदान की जाएगी: मिस्र

मिस्र के राष्ट्रपति कार्यालय ने सऊदी अरब के साथ पूर्ण एकजुटता व्यक्त करते हुए उसकी सुरक्षा की रक्षा के लिए हर संभव सहायता प्रदान करने की घोषणा की है। यह घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब सनआ में स्थित यमन की सरकार की संसद के अध्यक्ष ने मिस्र को सैन्य रूप से इस संघर्ष में शामिल होने से आगाह किया है। मिस्र के राष्ट्रपति कार्यालय ने आज, रविवार को घोषणा की कि मिस्र, सऊदी अरब की सुरक्षा और स्थिरता की रक्षा के लिए हर तरह की आवश्यक और संभव सहायता प्रदान करेगा।

राष्ट्रपति कार्यालय के एक बयान के अनुसार, राष्ट्रपति अब्दुल फतह अल-सीसी की अध्यक्षता में आज हुई राष्ट्रीय रक्षा परिषद की बैठक के दौरान यह निर्णय लिया गया कि, सऊदी अरब की सुरक्षा और स्थिरता की रक्षा करने, उसके संसाधनों एवं राष्ट्रीय संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, उसके क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने और इस्लामी पवित्र स्थलों की सुरक्षा के लिए हर प्रकार की आवश्यक और संभव सहायता प्रदान की जाएगी।

बयान में यह भी कहा गया कि क्षेत्र में तनाव कम करने और मध्य पूर्व में जारी संकटों का शांतिपूर्ण समाधान निकालने के उद्देश्य से संबंधित क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पक्षों के साथ समन्वय करते हुए राजनीतिक और कूटनीतिक प्रयासों को जारी रखा जाएगा तथा उन्हें और तेज किया जाएगा।

मिस्र के राष्ट्रपति कार्यालय का यह बयान राष्ट्रपति अब्दुल फतह अल-सीसी द्वारा मिस्र की संसद को एक आपातकालीन सत्र बुलाने का आह्वान किए जाने के बाद आया है। इस सत्र का उद्देश्य राष्ट्रपति को सऊदी अरब की रक्षा के लिए आवश्यक क़दम उठाने का अधिकार देना था, यदि रियाद ऐसा अनुरोध करता है।

इस संबंध में अल-सीसी ने स्पष्ट किया कि यह अधिकार केवल सुरक्षा और रक्षा के उद्देश्य से दिया जाना है। इसका मकसद किसी भी पक्ष के खिलाफ युद्ध छेड़ना या उस पर हमला करना नहीं है।

यमन की सनआ-स्थित संसद के अध्यक्ष ने मिस्र को आगाह किया

दूसरी ओर, सनआ में स्थित यमनी संसद के अध्यक्ष याह्या अली अल-राई ने मिस्र की संसद के अपने समकक्ष को एक तत्काल संदेश भेजा। इसमें उन्होंने ऐसी किसी भी संभावित दिशा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की, जिससे मिस्र यमन में सऊदी अरब के साथ सैन्य गतिविधियों में शामिल हो सकता है।

ये राजनीतिक घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आए हैं, जब यमन के विभिन्न प्रांतों पर सऊदी अरब के हमले तेज़ होने और नागरिक ठिकानों को निशाना बनाए जाने का दावा किया जा रहा है।

इसके जवाब में, यमनी सशस्त्र बलों ने सऊदी अरब के भीतरी इलाकों को निशाना बनाते हुए हमले किए हैं। इनमें रियाद हवाई अड्डे को निशाना बनाए जाने के साथ-साथ यमन की धरती पर सऊदी अरब की सैन्य तैनाती और सैनिक जमावड़ों को निशाना बनाने की कार्रवाई भी शामिल बताई गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, इन कार्रवाइयों का उद्देश्य “नाकेबंदी के जवाब में नाकेबंदी और तनाव बढ़ाने के जवाब में तनाव बढ़ाना” के सिद्धांत को कायम रखना है।

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