ट्रंप और उनके उपराष्ट्रपति के बीच ईरान पर हमले को लेकर मतभेद

ट्रंप और उनके उपराष्ट्रपति के बीच ईरान पर हमले को लेकर मतभेद

अमेरिकी राजनीतिक पत्रिका Politico की एक रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ है कि ईरान पर हमले के मुद्दे पर खुद अमेरिकी प्रशासन के भीतर गहरे मतभेद मौजूद थे। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान के साथ संभावित युद्ध को लेकर गंभीर आपत्तियाँ जताई थीं और इसे एक खतरनाक कदम बताया था।

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार वेंस इस युद्ध को लेकर “आशंकित”, “उसकी सफलता को लेकर चिंतित” और “ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के विरोधी” थे। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि राष्ट्रपति अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक नीति को लेकर उनके अपने करीबी सहयोगियों में भी भरोसा नहीं था।

विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप की नीतियाँ अक्सर जल्दबाज़ी और राजनीतिक दबाव में लिए गए फैसलों की तरह दिखाई देती हैं, जिनके परिणामों को लेकर उनके ही प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी चिंतित रहते हैं। ईरान जैसे बड़े क्षेत्रीय देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने की योजना को कई लोग अनावश्यक और बेहद जोखिम भरा मान रहे थे।

अमेरिकी विमान घटना और युद्ध की वास्तविक कीमत

इसी बीच पश्चिमी इराक़ में एक अमेरिकी सैन्य विमान के गिरने की घटना ने भी ट्रंप प्रशासन की युद्ध नीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। Pentagon ने पुष्टि की है कि एक KC-135 Stratotanker ईंधन भरने वाला विमान गिरने से चार अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य अब भी लापता बताए जा रहे हैं।

अमेरिका के रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा,

“युद्ध नर्क है, युद्ध अराजकता है और इसमें ऐसे दुखद हादसे हो सकते हैं।” हालाँकि अमेरिकी अधिकारी इसे “विमान दुर्घटना” बता रहे हैं, लेकिन कई रिपोर्टों और संकेतों से यह संभावना जताई जा रही है कि यह विमान इराक की प्रतिरोधी ताकतों की गोलीबारी के कारण गिराया गया हो सकता है।

विश्लेषकों के अनुसार इस तरह की घटनाएँ यह दिखाती हैं कि ट्रंप की आक्रामक विदेश नीति न केवल क्षेत्रीय तनाव को बढ़ा रही है बल्कि अमेरिकी सैनिकों को भी अनावश्यक खतरे में डाल रही है। ईरान और क्षेत्रीय प्रतिरोधी समूहों के साथ बढ़ते टकराव ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सैन्य दबाव की रणनीति हमेशा अपेक्षित परिणाम नहीं देती।

कई पर्यवेक्षकों का मानना है कि यदि राजनीतिक समाधान और कूटनीति को प्राथमिकता दी जाती तो ऐसी स्थितियों से बचा जा सकता था। लेकिन ट्रंप प्रशासन की टकराव वाली नीति ने पूरे क्षेत्र को और अधिक अस्थिर बना दिया है।

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