ऑस्ट्रेलिया में इज़रायली राष्ट्रपति के प्रवेश पर प्रतिबंध की मांग तेज
इज़रायल के राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग को अगले महीने ऑस्ट्रेलिया में प्रवेश से रोकने की मांग तेज़ होती जा रही है। इस सिलसिले में नागरिक समाज संगठनों के एक गठबंधन ने कानूनी याचिका दायर कर अधिकारियों से अपील की है कि, इसाक हर्ज़ोग को वीज़ा देने से इनकार किया जाए और ऑस्ट्रेलियाई क़ानून के तहत उनके खिलाफ आपराधिक जांच शुरू की जाए।
ऑस्ट्रेलियन नेशनल इमाम्स काउंसिल (ANIC) द्वारा जारी बयान के अनुसार, यह याचिका ऑस्ट्रेलियन नेशनल इमाम्स काउंसिल, यहूदी काउंसिल ऑफ ऑस्ट्रेलिया और हिंद रजब फाउंडेशन ने संयुक्त रूप से अटॉर्नी जनरल, गृह मंत्री और संघीय पुलिस को सौंपी है। याचिका में अधिकारियों से हर्ज़ोग की ऑस्ट्रेलिया यात्रा को अस्वीकार करने और यह जांच करने की मांग की गई है कि, क्या उनके सार्वजनिक बयान और आचरण नरसंहार के लिए उकसावे, युद्ध अपराधों में सहायता और अवैध घृणास्पद भाषण के दायरे में आते हैं?
इस बीच, एक वरिष्ठ काउंसलर द्वारा तैयार की गई याचिका में हर्ज़ोग के सरकारी पद के दौरान दिए गए प्रलेखित सार्वजनिक बयानों का हवाला दिया गया है। समूहों ने हर्ज़ोग पर आरोप लगाया कि उन्होंने संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों और अकाल का आकलन करने वाले संस्थानों द्वारा ग़ाज़ा में बड़े पैमाने पर भूख और नागरिकों की पीड़ा की पुष्टि के बावजूद, ग़ाज़ा पट्टी में मानवीय संकट के पैमाने को बार-बार नज़रअंदाज़ किया या कम करके प्रस्तुत किया।
संगठनों ने चेतावनी दी कि हर्ज़ोग की यात्रा की अनुमति से सामाजिक वैमनस्य और बढ़ सकता है, ऑस्ट्रेलिया के शांतिपूर्ण माहौल पर असर पड़ सकता है और समाज को खतरे में डाला जा सकता है। हालांकि, अधिकारियों ने अब तक इस याचिका पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
इसके बाद, ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख न्याय वकीलों ने भी पिछले शुक्रवार को संघीय पुलिस से मांग की थी कि वे फरवरी में कैनबरा दौरे से पहले हर्ज़ोग के खिलाफ नरसंहार के लिए उकसावे के आरोपों पर जांच करें। ऑस्ट्रेलियन सेंटर फॉर इंटरनेशनल जस्टिस (ACIJ) ने औपचारिक जांच का अनुरोध करते हुए कहा कि जिन पर नरसंहार के लिए उकसावे के आरोप हैं, ऐसे हर्ज़ोग का बिना किसी नतीजे के ऑस्ट्रेलिया में प्रवेश स्वीकार्य नहीं होगा।
उल्लेखनीय है कि पिछले महीने बॉन्डी बीच हमले के बाद प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ ने हर्ज़ोग को आमंत्रित किया था, जिसमें 15 लोगों की मौत और 42 लोग घायल हुए थे। वहीं, ग़ाज़ा पट्टी में युद्ध को लेकर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के विशेष जांच आयोग ने पिछले वर्ष निष्कर्ष निकाला था कि इज़रायल नरसंहार कर रहा है, और 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद हर्ज़ोग के बयान नरसंहार के इरादे के प्रमाण हैं।


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