ईरानी जनता के ख़िलाफ़ होने वाले हर आक्रमण के स्रोत को हम वैध सैन्य लक्ष्य मानते हैं: अराक़ची
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के विदेश मंत्रियों की बैठक में किर्गिज़स्तान में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक़ची ने कहा कि ईरान ने कभी किसी युद्ध की शुरुआत नहीं की है और न ही करेगा। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय क़ानून के अनुसार ईरान को आत्मरक्षा का पूरा अधिकार है और ईरानी जनता के विरुद्ध होने वाले किसी भी आक्रमण के स्रोत को वह अपनी सशस्त्र सेनाओं की रक्षात्मक कार्रवाई का वैध लक्ष्य मानता है।
अराक़ची ने कहा कि जब शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे, आर्थिक प्रतिष्ठानों और यहाँ तक कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी में चल रहे शांतिपूर्ण परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमले हों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय उनकी प्रभावी प्रतिक्रिया न दे, तो कोई भी देश यह विश्वास नहीं कर सकता कि भविष्य में वह स्वयं ऐसे हमलों का शिकार नहीं बनेगा।
उन्होंने आगे कहा कि सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि ये हमले ऐसे समय में किए गए जब इस्लामी गणराज्य ईरान ने कूटनीति और संवाद का मार्ग अपनाया हुआ था तथा विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए वार्ताएँ जारी थीं। लेकिन कूटनीति का जवाब बातचीत से नहीं, बल्कि सैन्य हमलों से दिया गया। उनके अनुसार ऐसा व्यवहार कूटनीति पर विश्वास को कमज़ोर करता है, विवादों के शांतिपूर्ण समाधान की अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाता है और भविष्य के अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए एक ख़तरनाक संदेश देता है।
इस्लामाबाद समझौते का खुला उल्लंघन
अराक़ची ने कहा कि, इस्लामाबाद समझौते के माध्यम से युद्ध समाप्त करने पर सहमति बने अभी केवल कुछ ही सप्ताह हुए हैं, लेकिन इसके बावजूद अमेरिका ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि वह अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन नहीं करता।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस समझौते का खुला उल्लंघन करते हुए परिवहन अवसंरचना, पेयजल सुविधाओं, मछली पकड़ने वाली नौकाओं, स्थानीय व्यापारिक जहाज़ों, मौसम विज्ञान केंद्रों तथा अन्य नागरिक ढांचों पर हमले किए गए। उनके अनुसार ये सभी अंतरराष्ट्रीय क़ानून और अंतरराष्ट्रीय मानवीय क़ानून का स्पष्ट उल्लंघन हैं तथा बल प्रयोग की नीति और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों की अनदेखी का प्रत्यक्ष उदाहरण हैं।
ईरान के विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि, अमेरिका ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में सुरक्षा एवं समुद्री व्यवस्थाओं के क्रियान्वयन में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप किया और पुनः समुद्री नाकाबंदी लागू की, जिससे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण सामरिक जलमार्गों में से एक की सुरक्षा ख़तरे में पड़ गई तथा अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक नौवहन का सामान्य संचालन बाधित हुआ।
अराक़ची ने कहा कि हाल के महीनों के अनुभव से यह स्पष्ट हो गया है कि फ़ारस की खाड़ी और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य की सुरक्षा बाहरी शक्तियों की मौजूदगी और हस्तक्षेप से नहीं, बल्कि क्षेत्रीय देशों के आपसी सहयोग, पारस्परिक सम्मान और सामूहिक ज़िम्मेदारी से ही सुनिश्चित की जा सकती है।


popular post
आईआरजीसी की चेतावनी: अमेरिकी सैनिकों के गुप्त ठिकानों से तुरंत 500 मीटर की दूरी बना लें नागरिक
आईआरजीसी की चेतावनी: अमेरिकी सैनिकों के गुप्त ठिकानों से तुरंत 500 मीटर की दूरी बना
संयुक्त अरब अमीरात ने इस्राईली नागरिकों को वीज़ा देना किया शुरू
कुछ दिनों पहले इस्राईल के साथ अपने संबंधों को सार्वजनिक कर कई समझौते पर हस्ताक्षर
4 दिसंबर भारतीय नौसेना दिवस
4 दिसंबर भारतीय नौसेना दिवस हर देश किसी न किसी तारीख़ को नौसेना दिवस मनाया
कल से शुरू होगी टी-20 सीरीज, जानिए कितने बजे खेला जाएगा मैच
भारतीय टीम फ़िलहाल अपने ऑस्टेलिया के दौरे पर है जहाँ पर अब तक एकदिवसीय सीरीज़
कुछ हफ़्तों में मेड इन इंडिया कोरोना वैक्सीन आने की उम्मीद: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
कोरोना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज सुबह एक सर्वदलीय बैठक की. पीएम मोदी ने
महाराष्ट्र में बीजेपी को विधान परिषद चुनाव में लगा तगड़ा झटका, सिर्फ एक सीट पर मिल सकी जीत
महाराष्ट्र में बीजेपी को विधान परिषद चुनाव में तगड़ा झटका लगा है. विधान परिषद की
5वें दौर की बैठक: किसानों का दो टूक जवाब हम सरकार से चर्चा नहीं, बल्कि ठोस जवाब चाहते हैं वो भी लिखित में,
कृषि कानूनों को लेकर पिछले 9 दिनों से धरने पर बैठे किसानों के साथ केंद्र
रूस की नसीहत, वेस्ट बैंक में एकपक्षीय कार्रवाई से बचे इस्राईल
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोफ़ ने मेडिटरेनीयन डायलॉग्स बैठक को संबोधित करते हुए कहा