सुप्रीम लीडर के जनाज़े में इराक़ में अरबईन से पहले नज़र आयेगा अरबईन का मंज़र

सुप्रीम लीडर के जनाज़े में इराक़ में अरबईन से पहले नज़र आयेगा अरबईन का मंज़र

नजफ़ से कर्बला तक पूरे इराक़ में व्यापक तैयारियाँ चल रही हैं। क़बीलों, हुसैनी मोअक़िब (सेवा शिविरों), हश्द अल-शाबी के बलों और सरकारी अधिकारियों ने शहीद क्रांति-नेता के पवित्र पार्थिव शरीर के सम्मानजनक स्वागत और अंतिम विदाई के लिए पूरी ताक़त लगा दी है। दर्जनों सेवा शिविर, भारी इंजीनियरिंग और राहत कारवाँ तथा बहुस्तरीय सुरक्षा योजनाएँ इस ऐतिहासिक अवसर की तैयारियों का हिस्सा हैं।

फ़ार्स समाचार एजेंसी के अंतरराष्ट्रीय विभाग के अनुसार, जबकि ईरान में अभी भी आयतुल्लाह शहीद सैयद अली ख़ामेनेई (रह.) के पार्थिव शरीर के भव्य अंतिम संस्कार के कार्यक्रम जारी हैं, इराक़ ने भी सरकारी, सुरक्षा, सेवा और जन-सहभागिता के सभी संसाधनों को इस ऐतिहासिक अवसर की मेज़बानी के लिए जुटा दिया है।

उच्च स्तरीय आयोजन समिति के प्रवक्ता सअद मआन के अनुसार, मंगलवार शाम इराक़ और ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में आधिकारिक स्वागत समारोह आयोजित किया जाएगा। मुख्य अंतिम यात्रा बुधवार को शुरू होगी।

नजफ़ अशरफ़ में: सुबह 6 बजे से जुलूस कूफ़ा पुल से “सौरतुल-अशरीन” चौक होते हुए हज़रत अमीरुल मोमिनीन इमाम अली (अ.) के रौज़े की ओर जाएगा। इसके बाद हज़रत फ़ातिमा (स.) के प्रांगण में अंतिम विदाई होगी और ज़ुहर की नमाज़ अदा की जाएगी।

कर्बला में: उसी दिन शाम को जुलूस अबू महदी अल-मुहंदिस सड़क से शुरू होकर बैनुल-हरमैन तक पहुँचेगा।

इराक़ी अधिकारियों का कहना है कि यह समारोह केवल एक सरकारी दायित्व नहीं, बल्कि दोनों देशों और दोनों राष्ट्रों के बीच गहरे प्रेम, वफ़ादारी और अटूट संबंधों का प्रतीक है। इसलिए इसकी भव्यता सुनिश्चित करने के लिए हर संभव व्यवस्था की जा रही है।

उच्च स्तरीय समितियों का गठन और सरकारी समन्वय

शहीद क्रांति-नेता के अंतिम संस्कार की घोषणा होते ही इराक़ सरकार ने प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रमुख एहसान अल-अव्वादी की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय निगरानी समिति गठित कर दी। इस समिति में नजफ़ और कर्बला के प्रशासन, परिवहन, गृह, विदेश और स्वास्थ्य मंत्रालयों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ हज़रत अली (अ.), इमाम हुसैन (अ.) और हज़रत अब्बास (अ.) के पवित्र हरमों के प्रबंधन के अधिकारी भी शामिल हैं।

कर्बला प्रांतीय परिषद के अध्यक्ष क़ासिम अल-यसारी ने कहा कि प्रांत ने अपनी सभी सेवा और आधारभूत सुविधाओं को इस आयोजन के लिए समर्पित कर दिया है। जनजातीय नेताओं, सामाजिक संगठनों और धार्मिक संस्थाओं के साथ कई बैठकें की गई हैं ताकि कोई भी पहलू अनदेखा न रह जाए।

हश्द अल-शाबी की केंद्रीय भूमिका

इस आयोजन में हश्द अल-शाबी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसके चीफ़ ऑफ़ स्टाफ अब्दुल अज़ीज़ अल-मुहम्मदावी स्वयं कर्बला पहुँचकर तैयारियों का निरीक्षण कर चुके हैं।

उन्होंने संगठनात्मक, सेवा, इंजीनियरिंग और सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं की समीक्षा की तथा आवश्यक निर्देश जारी किए।

ऑपरेशन मामलों के उप प्रमुख यासिर हुसैन अल-ईसावी ने बताया कि नजफ़ और कर्बला में सभी तैयारियाँ लगभग पूरी हो चुकी हैं तथा अन्य सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर लिया गया है।

शनिवार से हश्द अल-शाबी ने बड़े पैमाने पर सेवा और इंजीनियरिंग कारवाँ रवाना किए हैं, जिनमें दर्जनों जेसीबी मशीनें, निर्माण सामग्री से भरे ट्रक, बिजली जनरेटर, पानी के टैंकर और विशेषज्ञ तकनीकी दल शामिल हैं। इनका उद्देश्य मार्गों को समतल करना, अस्थायी विश्राम स्थल बनाना, प्रकाश व्यवस्था करना, तंबू लगाना और सेवा केंद्र स्थापित करना है।

इसके अतिरिक्त मोबाइल मेडिकल यूनिट और राहत एवं बचाव दल भी श्रद्धालुओं की सहायता के लिए तैयार रखे गए हैं।

जनभागीदारी और हुसैनी मोअक़िब

इराक़ की जनता, विशेषकर क़बीले और धार्मिक संस्थाएँ, पूरे उत्साह के साथ इस आयोजन में भाग ले रही हैं। हुसैनी मोअक़िब ने “नफ़ीर-ए-आम” (पूर्ण तैयारियों की घोषणा) कर दी है और अब तक केवल नजफ़ में ही 100 से अधिक मोअक़िब पंजीकृत हो चुके हैं।

ये मोअक़िब लाखों श्रद्धालुओं के भोजन और सेवा की व्यवस्था करेंगे। इनमें गर्म भोजन, ठंडा पानी, चाय, खजूर तथा स्वास्थ्य सुविधाओं से युक्त विश्राम स्थलों की व्यवस्था की जाएगी।

कई इराक़ी परिवारों ने भी श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए अपने घर स्वेच्छा से खोल दिए हैं। इराक़ी मीडिया और सोशल मीडिया पर लगातार ऐसे चित्र और संदेश सामने आ रहे हैं जो शहीद नेता के प्रति जनता की गहरी भावनाओं को दर्शाते हैं।

व्यापक सुरक्षा व्यवस्था

इराक़ी मीडिया के अनुसार सुरक्षा योजना के तहत पवित्र हरमों, जुलूस मार्गों और श्रद्धालुओं के एकत्र होने वाले स्थानों के चारों ओर बहुस्तरीय सुरक्षा घेरा बनाया जाएगा। इसकी ज़िम्मेदारी इराक़ी सेना, फ़ेडरल पुलिस और हश्द अल-शाबी के बीच बाँटी गई है।

सअद मआन ने प्रेस वार्ता में बताया कि एक समग्र सुरक्षा योजना तैयार की गई है और सभी संस्थाएँ श्रद्धालुओं की सुरक्षा तथा किसी भी संभावित व्यवधान को रोकने के लिए मिलकर काम कर रही हैं। सुरक्षा बल शहरों के प्रवेश और निकास मार्गों, सीसीटीवी कैमरों तथा त्वरित प्रतिक्रिया दलों पर विशेष निगरानी रखेंगे।

व्यापक सेवा और लॉजिस्टिक तैयारियाँ

तैयारियों के अंतर्गत—

हज़ारों वर्गमीटर तंबू, शेड और अस्थायी विश्राम स्थल तैयार किए जा रहे हैं।

अस्थायी अस्पताल और मोबाइल चिकित्सा दल तैनात किए जा रहे हैं।

श्रद्धालुओं के आवागमन के लिए बसों और अन्य वाहनों की व्यवस्था की गई है।

यातायात प्रबंधन और विशेष मार्ग निर्धारित किए गए हैं।

पूरे मार्ग में पेयजल, आपातकालीन बिजली और संचार व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।

प्रांतीय प्रशासन और नगरपालिकाएँ सड़कों की सफ़ाई, झंडे और बैनर लगाने तथा सार्वजनिक स्थानों को सजाने में जुटी हैं। पवित्र हरमों के प्रशासन ने भी धार्मिक कार्यक्रमों के साथ-साथ श्रद्धालुओं के लिए सेवा सुविधाओं का विस्तार कर दिया है।

इराक़ के लिए एक ऐतिहासिक दिन

हश्द अल-शाबी के मीडिया प्रमुख मुहन्नद अल-अक़ाबी ने कई बार स्पष्ट किया है कि यह आयोजन इराक़ सरकार के आधिकारिक अनुरोध पर और सभी सरकारी संस्थाओं की भागीदारी से आयोजित किया जा रहा है, इसलिए इसका स्वरूप पूरी तरह आधिकारिक और राष्ट्रीय है।

शिया राजनीतिक दलों, विशेषकर कोऑर्डिनेशन फ्रेमवर्क, ने जनता से बड़ी संख्या में भाग लेने की अपील की है ताकि यह दिन प्रतिरोध (मुक़ावमत) के आदर्शों के प्रति वफ़ादारी का प्रतीक बन सके।

अनुमान है कि इराक़ तथा पड़ोसी देशों से लाखों लोग इस ऐतिहासिक आयोजन में शामिल होंगे, जिससे यह हाल के वर्षों में शिया मुसलमानों के सबसे बड़े जनसमागमों में से एक बन जाएगा।

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