अपने देश पर हुए आक्रमण के स्रोत बने अमेरिकी अड्डों को निशाना बनाना हमारा कानूनी, धार्मिक और तार्किक अधिकार: आईआरजीसी

अपने देश पर हुए आक्रमण के स्रोत बने अमेरिकी अड्डों को निशाना बनाना हमारा कानूनी, धार्मिक और तार्किक अधिकार: आईआरजीसी 

इस्लामी क्रांति संरक्षक बल (आईआरजीसी) के जनसंपर्क विभाग ने जॉर्डन की जनता को संबोधित करते हुए कहा:

“जॉर्डन के सम्मानित और महान नागरिकों! इस्लामी क्रांति संरक्षक बल (स्पाह) के मुजाहिदों ने अमेरिका द्वारा ईरान पर बार-बार किए गए हमलों के जवाब में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर तेज़ कार्रवाई करते हुए अमेरिका की THAAD मिसाइल रक्षा प्रणाली के एक रडार को नष्ट कर दिया।”

बयान के अनुसार, एक पैट्रियट वायु रक्षा प्रणाली और एक C-RAM रडार को भी निशाना बनाकर नष्ट कर दिया गया। साथ ही, अमेरिकी सैन्य अड्डे के ईंधन भंडार में आग लग गई।

इसके अतिरिक्त, हेलीकॉप्टर उपकरणों का एक बड़ा गोदाम तथा हेलीकॉप्टरों की मरम्मत और रखरखाव से जुड़ी एक कार्यशाला भी आग की चपेट में आकर नष्ट हो गई।

बयान में कहा गया कि कभी-कभी यह आरोप लगाया जाता है कि ईरान अपनी सैन्य कार्रवाइयों से अन्य देशों की स्वतंत्रता, क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का उल्लंघन करता है, जबकि हमारे दृष्टिकोण से यह आरोप पूरी तरह गलत है। हम जॉर्डन की स्वतंत्रता, क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का पूरा सम्मान करते हैं।

आईआरजीसी ने आगे कहा कि विदेशी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डे वास्तव में ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ उस देश का नहीं, बल्कि अमेरिका का नियंत्रण चलता है। वहाँ बिना स्थानीय सीमा सुरक्षा के नियंत्रण के अमेरिकी सैनिक और उनके द्वारा लाए गए लोग आते-जाते हैं। वहाँ अनुशासन अमेरिकी सेना बनाए रखती है, न्याय अमेरिकी कानून के अनुसार होता है और उस देश के कानून लागू नहीं होते। यहाँ तक कि उस देश के सैनिक ही नहीं, बल्कि उसका रक्षा मंत्री भी अमेरिकी अनुमति के बिना उस अड्डे में प्रवेश नहीं कर सकता।

बयान के अनुसार, यदि किसी ने जॉर्डन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन किया है तो वह अमेरिका है, ईरान नहीं। हमारे हमले उन क्षेत्रों पर हैं जिन्हें अमेरिकी सेना ने अपने नियंत्रण में ले रखा है। ऐसी सेना, जो हमारे अनुसार, अपराधों के अलावा कुछ नहीं जानती।

आईआरजीसी ने आगे दावा किया कि बीते दिन मीनाब के शोकाकुल लोगों ने अपने उन स्कूली बच्चों के अवशेषों को दफनाया, जिनके शवों के टुकड़े मलबे से बरामद हुए थे।

बयान में कहा गया कि ये 168 विद्यार्थी थे, जो इस युद्ध के पहले दिन अमेरिकी सेना के हमले में मारे गए थे। हमारे अनुसार ये हमले अब भी जारी हैं और उनका एक हिस्सा जॉर्डन की धरती पर स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों के माध्यम से किया जाता है। इसलिए, हमारे देश पर हमला करने वालों और हमारे बच्चों के हत्यारों को, वे जहाँ से भी हमला करें, निशाना बनाना हमारा कानूनी, धार्मिक और तार्किक अधिकार है।

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