राजनीतिक अस्तित्व बचाने के लिए नेतन्याहू नए विद्रोह का जोखिम उठाने को तैयार: द इकोनॉमिस्ट
अंग्रेज़ी पत्रिका द इकोनॉमिस्ट ने पश्चिमी तट में बढ़ती हिंसा और इस्राईली बसने वालों को मिल रहे सरकारी संरक्षण को लेकर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पत्रिका के अनुसार, नेतन्याहू अपनी सत्ता और राजनीतिक भविष्य बचाने के लिए ऐसे हालात पैदा होने का जोखिम उठाने को भी तैयार दिखाई देते हैं, जिनसे पश्चिमी तट में एक नया फ़िलिस्तीनी विद्रोह भड़क सकता है।
क़ब्ज़े वाले पश्चिमी तट की स्थिति नेतन्याहू सरकार की नीतियों की गंभीर विफलता को उजागर करती है। हिंसक इस्राईली बसने वाले फ़िलिस्तीनी नागरिकों के घरों, संपत्तियों और ज़मीनों पर लगातार हमले कर रहे हैं, जबकि इस्राईली सेना और सरकार उन्हें रोकने में प्रभावी कार्रवाई करने में नाकाम दिखाई दे रही हैं। इससे यह धारणा मजबूत हो रही है कि फ़िलिस्तीनियों को उनकी ज़मीन से बेदखल करने की नीति को सरकारी स्तर पर संरक्षण मिल रहा है।
द इकोनॉमिस्ट के मुताबिक, अक्टूबर 2023 में ग़ाज़ा युद्ध शुरू होने के बाद से पश्चिमी तट में 1,100 से अधिक फ़िलिस्तीनी मारे जा चुके हैं। इसके बावजूद हिंसक बसने वालों के ख़िलाफ़ कार्रवाई बेहद सीमित रही है। क़सरा में फ़िलिस्तीनियों के घरों पर हमले के बाद एक पूरी बटालियन तैनात किए जाने के बावजूद कोई गिरफ्तारी न होना इस विफलता का उदाहरण है।
नेतन्याहू सरकार की बस्ती विस्तार नीति भी विवाद का प्रमुख कारण है। पत्रिका के अनुसार, चार वर्ष से भी कम समय में लगभग 200 नई बस्ती चौकियों को मंज़ूरी दी गई है। ऐसी नीतियों ने बसने वालों को फ़िलिस्तीनी भूमि पर और अधिक कब्ज़ा करने के लिए प्रोत्साहित किया है तथा पश्चिमी तट में तनाव को लगातार बढ़ाया है।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि नेतन्याहू के लिए फ़िलिस्तीनियों और इस्राईली बसने वालों के बीच बढ़ता टकराव केवल सुरक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि सत्ता की राजनीति का हिस्सा बन सकता है। यदि नया विद्रोह उनके लिए राजनीतिक रूप से फ़ायदेमंद साबित होता है और उन्हें प्रधानमंत्री के रूप में एक और कार्यकाल हासिल करने का अवसर देता है, तो द इकोनॉमिस्ट के आकलन के अनुसार, वह इस ख़तरे को स्वीकार करने से पीछे नहीं हट सकते।
ऐसी स्थिति में नेतन्याहू पर यह आरोप और गंभीर हो जाता है कि वे अपने राजनीतिक अस्तित्व को आम नागरिकों की सुरक्षा और क्षेत्र में शांति से ऊपर रख रहे हैं। एक प्रधानमंत्री से अपेक्षा होती है कि वह हिंसा को रोके, लेकिन नेतन्याहू की नीतियों पर उठ रहे सवाल इसके उलट तस्वीर पेश करते हैं—जहाँ बसने वालों की हिंसा, बस्ती विस्तार और फ़िलिस्तीनी विस्थापन का ख़तरा लगातार बढ़ रहा है।
फ़िलिस्तीनियों के बीच यह भय गहराता जा रहा है कि उन्हें उनकी ज़मीन से स्थायी रूप से बेदखल करने की कोशिश की जा रही है। यही भय और आक्रोश पश्चिमी तट को एक बड़े संघर्ष की ओर धकेल सकता है। यदि ऐसा हुआ, तो इसका नुकसान केवल फ़िलिस्तीनियों को नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र को उठाना पड़ेगा।
इस प्रकार द इकोनॉमिस्ट की रिपोर्ट नेतन्याहू की राजनीति की एक बेहद गंभीर तस्वीर सामने रखती है: ऐसा नेतृत्व जो सत्ता बचाने के लिए बढ़ती हिंसा और संभावित नए विद्रोह के ख़तरे को भी स्वीकार करने को तैयार दिखाई देता है। यदि राजनीतिक कुर्सी बचाने की कीमत फ़िलिस्तीनी नागरिकों की जान, उनकी ज़मीन और पूरे क्षेत्र की शांति है, तो नेतन्याहू की यह नीति न केवल मानवीय बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी बेहद ख़तरनाक है।


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