बच्चों को मोबाइल फोन देने से पहले ये बातें जान लें

बच्चों को मोबाइल फोन देने से पहले ये बातें जान लें

अब तक बड़ी संख्या में ऐसी शोध रिपोर्टें सामने आ चुकी हैं, जिनमें बच्चों के दिमाग, शरीर, भावनाओं और व्यवहार पर मोबाइल फोन तथा इंटरनेट के गहरे प्रभाव और उनके नुकसान की ओर संकेत दिया गया है। मोबाइल फोन के अत्यधिक इस्तेमाल से सबसे ज्यादा बच्चे की ध्यान केंद्रित करने की क्षमता प्रभावित होती है। इसलिए बच्चों को मोबाइल फोन देने से पहले सावधानी बरतना जरूरी है।

बच्चों को मोबाइल फोन के इस्तेमाल से रोकने के लिए उन्हें दूसरी गतिविधियों में व्यस्त रखें।

विज्ञान और तकनीक के विकास ने हमारी जीवनशैली, दिनचर्या और काम करने के तरीकों को पूरी तरह बदल दिया है। बच्चों की परवरिश का तरीका भी काफी बदल गया है। जीवन की जरूरतें और माता-पिता की व्यस्तताएं असाधारण रूप से बढ़ गई हैं और वे बच्चों से दूर होते चले गए हैं।

ऐसी स्थिति में तकनीक मोबाइल फोन के रूप में धीरे-धीरे हमारी जिंदगी में दाखिल हुई और बाद में यही फोन अपने आप में एक पूरी दुनिया बन गया। कहने को तो यह संपर्क और बातचीत का एक साधन था, लेकिन समय बीतने के साथ माता-पिता ने इसे बच्चों को व्यस्त रखने, उन्हें सिखाने-समझाने और मनोरंजन का साधन बना लिया।

उनका विचार था कि बच्चा मोबाइल पर कार्टून और दूसरे मनोरंजक कार्यक्रम देखता रहेगा, रंगीन दुनिया में खोया रहेगा और माता-पिता भी आराम से अपना काम कर सकेंगे। देखने और सुनने में यह तरीका काफी अच्छा लगता था, लेकिन अब इसके नुकसान भी सामने आने लगे हैं।

बच्चों पर मोबाइल फोन के प्रभाव

अब तक अनेक शोध रिपोर्टें सामने आ चुकी हैं, जो बच्चों के दिमाग, शरीर, भावनाओं और व्यवहार पर मोबाइल फोन तथा इंटरनेट के गहरे प्रभाव और नुकसान की ओर इशारा करती हैं।

मोबाइल फोन के अधिक इस्तेमाल से सबसे ज्यादा बच्चे की एकाग्रता और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता प्रभावित होती है। एक के बाद एक कार्टून और रंग-बिरंगे वीडियो देखते रहने के कारण बच्चे की आंखें लगातार स्क्रीन पर लगी रहती हैं, जबकि उसके दिमाग में सूचनाओं का दबाव बढ़ने लगता है।

बच्चे के दिमाग को किसी कार्यक्रम को समझने और उसका आनंद लेने का अवसर ही नहीं मिल पाता। लगातार ऐसा होने से दिमाग इस तरह ढलने लगता है कि एकाग्रता की जरूरत वाले कामों से बच्चे को ऊब और बेचैनी महसूस होने लगती है। आगे चलकर यही स्थिति उसकी व्यावहारिक और शैक्षिक जिंदगी में समस्या पैदा कर सकती है।

समय से पहले जरूरत से ज्यादा जानकारी

हर चीज अपने उचित समय पर ही अच्छी लगती है, लेकिन बच्चों के मामले में मोबाइल फोन और इंटरनेट ने इस सिद्धांत को काफी हद तक बदल दिया है।

जैसे ही बच्चे के हाथ में मोबाइल आता है, उसकी उंगलियां स्क्रीन पर चलने लगती हैं। इसे ऐसे समझा जा सकता है जैसे अचानक उसके सामने जानकारी की पूरी दुनिया खुल गई हो और वह लगातार उसमें से नई-नई चीजें हासिल करने लगे।

इसके बाद एक चिंताजनक स्थिति पैदा होती है। जानकारी की अधिकता के कारण कई बार माता-पिता और यहां तक कि शिक्षक भी पीछे रह जाते हैं और बच्चा उनसे आगे निकलता हुआ दिखाई देता है। आपने देखा होगा कि आजकल बच्चे अपने माता-पिता को मोबाइल के अलग-अलग फीचर्स के बारे में बताते रहते हैं।

कई बार माता-पिता इस बात को गर्व के साथ बताते हैं, लेकिन वास्तव में यह चिंता का विषय भी हो सकता है। कम उम्र में जरूरत से ज्यादा जानकारी हासिल करना बच्चे के लिए नुकसानदायक हो सकता है, क्योंकि वह प्राप्त जानकारी की खुद पुष्टि और जांच करने की कोशिश करता है।

अब माता-पिता खुद सोच सकते हैं कि उम्र और समय से पहले मिली हर तरह की जानकारी को बच्चा स्वयं प्रयोग करके देखने लगे तो इसके क्या परिणाम हो सकते हैं।

आखिर माता-पिता क्या करें?

मोबाइल फोन के नुकसान और फायदे, दोनों के पक्ष में तर्क दिए जा सकते हैं। लेकिन इस वास्तविकता से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि मोबाइल फोन संपर्क के अलावा बहुत-सी सुविधाएं उपलब्ध कराता है और अब यह हमारे जीवन का हिस्सा बन चुका है।

सवाल यह है कि ऐसा कौन-सा तरीका अपनाया जाए जिससे जरूरी काम भी चलता रहे और बच्चों पर इसका नकारात्मक प्रभाव भी कम हो।

इसके लिए माता-पिता को कोशिश करनी चाहिए कि बच्चों की अनुपस्थिति में मोबाइल फोन से किए जाने वाले जरूरी काम निपटा लें। जब बच्चे घर पर हों तो मोबाइल फोन का इस्तेमाल कम से कम करें।

शुरुआत में इस आदत को बदलने में थोड़ी परेशानी हो सकती है, लेकिन इसके बदले माता-पिता और बच्चों के बीच जो नजदीकी और मजबूत संबंध बनेगा, वह भविष्य में बेहद सकारात्मक और सुखद परिणाम दे सकता है।

बच्चों को शारीरिक गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित करें

सिर्फ डांट-फटकार या समझाने से बच्चों को मोबाइल फोन से दूर रखना संभव नहीं होगा। इसके लिए उन्हें मोबाइल के स्थान पर दूसरी उपयोगी गतिविधियां भी देनी होंगी।

जब भी अवसर मिले, बच्चों को पार्क या खेल के मैदान में ले जाएं और उनके साथ खेलें। कुछ समय के लिए उनके साथ बच्चा बन जाने में भी कोई नुकसान नहीं है।

अगर व्यस्तता या किसी अन्य कारण से बच्चों को बाहर नहीं ले जा सकते तो घर में ही कुछ इनडोर खेलों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।

इन सभी प्रयासों के साथ हमेशा यह बात याद रखें कि आदतें बनने और बदलने में समय लगता है। इसलिए बच्चों को मोबाइल देखने से रोकने में जल्दबाजी न करें। धैर्य के साथ धीरे-धीरे उनकी आदत बदलने की कोशिश करें।

मोबाइल फोन देखने के लिए बच्चे का एक निश्चित समय तय करें। निर्धारित समय पूरा होते ही मोबाइल फोन वापस ले लें। धीरे-धीरे और लगातार प्रयास करने से निश्चित रूप से बदलाव आएगा।

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