उइगर मुसलमानों के साथ चीन की दरिंदगी, महिला ने सुनाई यौन उत्पीड़न की कहानी

उइगर मुसलमानों के साथ चीन की दरिंदगी, महिला ने सुनाई यौन उत्पीड़न की कहानी  चीन पर लगातार उइगर मुसलमानों के उत्पीड़न और नरसंहार के आरोप लगते रहे हैं ।

उइगर मुसलमानों को चीन के शिनजियांग प्रांत में श्रमिक शिविरों एवं डिटेंशन सेंटर में शारीरिक यातना के साथ साथ यौन उत्पीड़न का भी सामना करना पड़ रहा है ।

उत्तरी चीन के शिनजियांग क्षेत्र में बंदी बनाई गई एक महिला ज़ियावुदुन ने डिटेंशन सेंटर में अपने साथ हुई ज़्यादती की कहानी बताते हुए कहा कि नजरबंदी के दौरान उन्हें शारीरिक यातना तो दी जाती थी साथ ही उनके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया और उसके निजी अंगों तक को प्रताड़ित किया गया।

इस रिपोर्ट के अनुसार उक्त महिला ने कहा कि मेरे शरीर पर जगह-जगह चोट के निशान रह गए हैं जिन्हें मैं खुद भी देखना नहीं चाहती हूं । उन्होंने मुझे नसबंदी की गोलियां दी है । मुझे पूरा विश्वास है कि अब मैं कभी मां नहीं बन सकती । उन्होंने मुझे गोलियां खिलाई हैं इस कारण अब मुझे बच्चा भी नहीं हो सकता है ।

2016 के बाद से ही शिनजियांग में उइगर मुसलमानों को सड़क के आसपास से हटा दिया गया और उन्हें शिक्षा शिविरों में भेज दिया गया । चीन के इन शिविरों में भेजे गए लोगों के साथ उत्पीड़न और प्रताड़ित करने की खबरें लगातार पश्चिमी जगत में चर्चा में बनी रहती हैं । डिटेंशन सेंटर में पीड़ितों के साथ दुष्कर्म करने और यहां तक कि उनके मारे जाने तक की खबरें भी आई हैं ।

न्यूयॉर्क पोस्ट ने हाल ही में अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि बहुत से लोगों को इन केंद्रों में व्यापार के गुर सीखने और देशभक्ति की भावना जगाने का झांसा देकर भेजा जाता है। सामूहिक दुष्कर्म और यौन उत्पीड़न की शिकायत करने वाली इस महिला ने कहा कि उन्हें 2017 में बंदी बनाया गया था ।अधिकारियों ने उससे उसका पासपोर्ट वापस लिया और उसे गांव से लगभग 30 मिनट की दूरी पर एक डिटेंशन सेंटर में ले गए जहां उससे देश भक्ति की भावना से ओतप्रोत कम्युनिस्ट गीत गाने के लिए कहा गया । उसे बार-बार उसे कहा गया कि उसका मुस्लिम धर्म मौजूद नहीं है । एक महीने बाद पेट में समस्या हुई जिस कारण वह बेहोश हो गई तो उसे छोड़ दिया गया । 2020 में एक राजनीतिक शरणार्थी के रूप में जिया अमेरिका गयी उन्होंने कहा कि मुझे अस्पताल भेजा गया अगर वह नहीं होते तो मैं मर जाती ।

जिया ने कहा कि उनकी गिरफ़्तारी के एक साल बाद मुझे पुलिस स्टेशन बुलाया गया था और कहा गया कि अभी तुम्हारा प्रशिक्षण पूरा नहीं हुआ है और तुम्हें फिर से रिएजुकेशन के लिए कैंप में भेजा जाएगा । जिया को वापस शिक्षा शिविर भेज दिया गया और उसके बाल काट दिए गए तथा कानों में मौजूद बालियों को इतनी जोर से खींचा गया कि कानों से खून बहने लगा । उन्होंने कहा कि वह मेरे साथ जानवरों की तरह बर्ताव करते थे।

याद रहे कि इससे पहले ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न से प्रकाशित होने वाले हेराल्ड सन ने अपनी रिपोर्ट में चीन पर इन शिविरों में बंद लोगों के अंगो कि तस्करी का आरोप लगाते हुए रिपोर्ट प्रकाशित की थी ।

हेराल्ड सं ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि एक स्वस्थ लीवर को लगभग 1,60000 हज़ार अमेरिकी डॉलर में बेचा जा रहा है। इस कारोबार के माध्यम से चीन प्रतिवर्ष 1 बिलियन डॉलर से अधिक की कमाई करता है। यह कोई पहला अवसर नहीं है जब चीन के डिटेंशन सेंटरों में मानव अंगों को उइगर मुसलमानों के शरीर से निकालने की बातें कहीं गयी थी।

शिंजियांग प्रांत में चीन की कम्युनिस्ट सरकार के अत्याचारों को उठाते हुए अमेरिका के साथ ब्रिटेन में भी एक ट्रिब्यूनल ने दावा किया था कि इस प्रांत में उइगर मुसलमानों एवं अन्य मुस्लिम अल्पसंख्यक समूहों पर जबरन कई अमानवीय प्रतिबंध थोप दिए गए हैं। यहां इन समूहों पर जन्म पर पाबंदी लगा दी गई है जो एक तरह का नरसंहार है।

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