सूडान में एक और बंटवारे की आशंका बढ़ी, अमेरिका का नया प्रस्ताव संदिग्ध 

सूडान: सूडान में जारी गृहयुद्ध के बीच अमेरिका की ओर से पेश किए गए नए युद्धविराम प्रस्ताव को लेकर विवाद गहरा गया है। सूडानी सरकार के भीतर इस प्रस्ताव को लेकर गंभीर आशंकाएं जताई जा रही हैं। सरकारी सूत्रों का कहना है कि यदि प्रस्ताव मौजूदा स्वरूप में लागू होता है, तो इससे देश के वास्तविक विभाजन का खतरा बढ़ सकता है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सूडान के सरकारी अधिकारियों ने बताया कि अफ्रीका मामलों में अमेरिकी राष्ट्रपति के सलाहकार मसद बोलोस द्वारा प्रस्तावित 90 दिनों के युद्धविराम की रूपरेखा पर खार्तूम सरकार संदेह के साथ विचार कर रही है।

सूत्रों के मुताबिक, सूडान सरकार ने अमेरिका के पहले प्रस्ताव पर जो रुख अपनाया था, उसमें कोई बदलाव नहीं किया है। इससे पहले राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-बुरहान की अध्यक्षता में हुई सुरक्षा एवं रक्षा परिषद की बैठक में मांग की गई थी कि रैपिड सपोर्ट फोर्स (RSF) चरणबद्ध तरीके से दारफुर, कोर्दोफान और ब्लू नाइल क्षेत्रों से पूरी तरह पीछे हटे।

हालांकि, अमेरिकी प्रस्ताव में केवल सीमित क्षेत्रों से पीछे हटने की बात कही गई है, जिस पर सूडानी सरकार ने आपत्ति जताई है।

रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी योजना के तहत RSF को दारफुर, कोर्दोफान के बड़े हिस्सों और उत्तरी राज्य में मिस्र-लीबिया सीमा तक फैले भूभाग पर अपनी मौजूदगी बनाए रखने की अनुमति मिल सकती है। इसके बदले संगठन को ब्लू नाइल प्रांत के कुछ इलाकों से हटना होगा।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि ऐसा हुआ तो RSF के प्रभाव वाले क्षेत्रों को स्थायी रूप मिल सकता है, जिससे सूडान के विभाजन जैसी स्थिति पैदा होने का खतरा बढ़ जाएगा।

जानकार सूत्रों का कहना है कि प्रस्ताव में स्पष्ट समय-सीमा और कानूनी गारंटी का अभाव है। ऐसे में अलग-अलग क्षेत्रों में स्थायी प्रभाव क्षेत्र बन सकते हैं, जिससे सूडान में भी लीबिया जैसी स्थिति पैदा होने की आशंका है, जहां लंबे समय से सत्ता कई हिस्सों में बंटी हुई है।

गौरतलब है कि सूडान में पिछले काफी समय से सेना और रैपिड सपोर्ट फोर्स (RSF) के बीच भीषण संघर्ष जारी है। इस हिंसा में हजारों लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि लाखों नागरिक अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र समेत कई अंतरराष्ट्रीय संगठन इस संकट को दुनिया के सबसे बड़े मानवीय संकटों में से एक मान चुके हैं।

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