भीषण गर्मी में लगातार 23 घंटे तक सुप्रीम लीडर के अंतिम संस्कार में जनसैलाब, इराक़ की धरती पर एक ऐतिहासिक घटना बन गया
ईरान पर अमेरिकी हमले के बाद ईरान ने जबरदस्त पलटवार करते हुए कुवैत, बहरीन और जार्डन में अमेरिकी सेना के महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाया। जवाबी कार्रवाई के बाद आईआरजीसी ने बयान भी जारी किया है।
आईआरजीसी ने अपने बयान में कहा कि, “ईरान की महान जनता तथा इराक़ की सम्मानित, संघर्षशील और जागरूक जनता को सलाम। आप लोगों ने समय की नज़ाकत को समझते हुए और विश्व इतिहास की अभूतपूर्व अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में भाग लेकर ईश्वरीय नेतृत्व (विलायत) की महानता तथा जनता और इस्लामी नेतृत्व के बीच गहरे प्रेम और निष्ठा को पूरी दुनिया के सामने प्रदर्शित किया। आपके नारों ने यह संदेश दिया कि मुसलमानों के धार्मिक नेतृत्व और विलायत-ए-फ़क़ीह के विरुद्ध किसी भी प्रकार की आक्रामकता की कीमत बहुत भारी होगी।”
बयान में कहा गया कि, “यह भव्य अंतिम यात्रा, विशेष रूप से भीषण गर्मी में लगातार 23 घंटे तक चला जनसैलाब, इराक़ की धरती पर एक ऐतिहासिक घटना बन गया। इससे महलों में बैठे घमंडी शासक भयभीत हो गए और उन्होंने इस जनशक्ति के प्रदर्शन पर जल्दबाज़ी में प्रतिक्रिया दी। समझौते का उल्लंघन करने वाले अमेरिका ने अपने सभी वादों को तोड़ते हुए एक बार फिर ईरान के दक्षिणी तटीय प्रांतों के कई स्थानों तथा देश के पूर्वी प्रांतों में स्थित पवित्र शहर मशहद की ओर जाने वाले दो पुलों पर हमला किया।
उनका उद्देश्य इस ऐतिहासिक जनसमूह और उसकी गूँज को दुनिया की नज़रों से ओझल करना था, लेकिन वे इस बात से अनजान हैं कि ऐसे अपराध विश्व की जनता को और अधिक जागरूक करेंगे तथा उन्हें तथाकथित ‘महाशक्ति’ के विरुद्ध संघर्ष के लिए पहले से अधिक दृढ़ बनाएँगे।”
बयान में आगे कहा गया कि, “हमारी सेना और हमारे जवान अमेरिकी सेना द्वारा किए गए इन हमलों का जवाब अवश्य देंगे।”
आईआरजीसी के अनुसार, “दंडात्मक कार्रवाई के पहले चरण में नौसेना और एयरोस्पेस बलों ने संयुक्त मिसाइल और ड्रोन अभियान चलाया। दुश्मन के हमलों के कुछ ही समय बाद देश के विभिन्न हिस्सों से किए गए इस अभियान में कुवैत के अरिफजान और अली अल-सालेम तथा बहरीन के जुफैर और शेख ईसा स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया।”
अंत में आईआरजीसी ने चेतावनी दी कि, “यदि अमेरिका ने दोबारा किसी प्रकार की आक्रामक कार्रवाई की, तो उसका और भी कड़ा जवाब दिया जाएगा तथा क्षेत्र में मौजूद अन्य अमेरिकी सैन्य अड्डों को भी निशाना बनाया जाएगा।”


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