ईरान के ख़िलाफ़ युद्ध के परिणाम, पूरी दुनिया के लिए विनाशकारी रहे हैं: क़तर

ईरान के ख़िलाफ़ युद्ध के परिणाम, पूरी दुनिया के लिए विनाशकारी रहे हैं: क़तर

क़तर के विदेश मंत्री और प्रधानमंत्री शेख़ मोहम्मद बिन अब्दुर्रहमान बिन जासिम अल-थानी ने ईरान के खिलाफ युद्ध और बढ़ते तनाव पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा है कि इस संघर्ष के परिणाम केवल फ़ारस की खाड़ी या पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए विनाशकारी साबित हुए हैं। शेख़ मोहम्मद ने मिस्र के अल-अलमैन में उच्चस्तरीय वार्ता के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य में युद्ध से पहले जैसी सामान्य स्थिति बहाल की जानी चाहिए। उन्होंने किसी भी तरह की धमकी, दबाव या बाधा उत्पन्न करने की कोशिश का विरोध किया।

उन्होंने कहा, “इस युद्ध के परिणाम न केवल फ़ारस की खाड़ी क्षेत्र के लिए, बल्कि दुनिया के अन्य हिस्सों के लिए भी विनाशकारी रहे हैं।” उनके इस बयान से स्पष्ट है कि क़तर क्षेत्र में सैन्य टकराव को बढ़ाने के बजाय तनाव कम करने और बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने के पक्ष में है।

क़तरी प्रधानमंत्री ने कहा कि स्थिति को युद्ध से पहले की परिस्थितियों में वापस लाने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया में संघर्षरत किसी भी पक्ष को दूसरे पक्ष से धमकी या ब्लैकमेल के माध्यम से अपनी मांगें मनवाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।

क़तर का यह रुख ऐसे समय में सामने आया है जब ईरान के खिलाफ अमेरिकी दबाव और सैन्य धमकियां एक बार फिर बढ़ती दिखाई दे रही हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आज तड़के सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ‘एक्स’ पर ईरान की अर्थव्यवस्था के ख़िलाफ़ अब तक के सबसे आक्रामक अभियान की शुरुआत करने की घोषणा की।

हालांकि, ईरान पहले भी अमेरिकी “अधिकतम दबाव” नीति का सामना कर चुका है। ट्रंप ने वर्ष 2018 में ईरान को अमेरिकी दबाव के सामने झुकाने के उद्देश्य से यह अभियान शुरू किया था। लेकिन ईरान ने दबाव के आगे आत्मसमर्पण करने के बजाय अपनी स्थिति पर कायम रहते हुए अमेरिका की नीतियों का विरोध किया।

विशेष रूप से, अमेरिका के परमाणु समझौते (जेसीपीओए) से बाहर निकलने और यूरोपीय देशों द्वारा अपनी प्रतिबद्धताओं को प्रभावी ढंग से पूरा न किए जाने के बाद ईरान ने भी अपनी कुछ परमाणु प्रतिबद्धताओं को कम कर दिया था। इस तरह, अमेरिकी दबाव नीति ईरान को झुकाने के बजाय क्षेत्र में तनाव और टकराव को बढ़ाने का कारण बनी।

क़तर के प्रधानमंत्री का ताज़ा बयान इसी व्यापक परिस्थिति में ईरान के खिलाफ युद्ध और आर्थिक दबाव की नीति के गंभीर क्षेत्रीय और वैश्विक परिणामों की ओर संकेत करता है। क़तर का कहना है कि फ़ारस की खाड़ी और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में स्थिरता केवल क्षेत्रीय देशों के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है।

ऐसे में क़तर ने युद्ध और दबाव की नीति के बजाय तनाव कम करने, सामान्य स्थिति बहाल करने और क्षेत्रीय स्थिरता कायम करने पर जोर दिया है।

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