जॉर्डन के ‘प्रिंस हसन’ एयरबेस पर ईरानी मिसाइल हमलों से हुई तबाही की सैटेलाइट तस्वीरें जारी

जॉर्डन के ‘प्रिंस हसन’ एयरबेस पर ईरानी मिसाइल हमलों से हुई तबाही की सैटेलाइट तस्वीरें जारी

ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध के बीच जॉर्डन स्थित ‘प्रिंस हसन’ एयरबेस को लेकर नई सैटेलाइट तस्वीरें सामने आई हैं। ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) अकाउंट Egypt’s Intel Observer द्वारा साझा की गई तस्वीरों में एयरबेस के रनवे के आसपास ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल हमले के कारण संभावित जलने के निशान दिखाई दे रहे हैं।

ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इससे पहले दावा किया था कि उसकी बैलिस्टिक मिसाइलों ने जॉर्डन के इस एयरबेस पर मौजूद अमेरिकी ड्रोन सुविधाओं को निशाना बनाया। ईरानी पक्ष के अनुसार, हमले में RQ-4 और MQ-9 ड्रोन के हैंगरों के साथ-साथ उनसे जुड़े तकनीकी और सैन्य बुनियादी ढांचे को लक्ष्य बनाया गया।

प्रिंस हसन एयरबेस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यहां अमेरिकी निगरानी अभियानों से जुड़े संसाधनों की मौजूदगी की रिपोर्ट सामने आती रही है। विशेष रूप से MQ-4C Triton जैसे उच्च-ऊंचाई वाले निगरानी ड्रोन क्षेत्र में खुफिया जानकारी जुटाने और समुद्री तथा हवाई गतिविधियों पर नजर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में ईरान की ओर से इस तरह के ठिकानों को निशाना बनाने का दावा व्यापक क्षेत्रीय सैन्य रणनीति के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।

सैटेलाइट तस्वीरों में रनवे पर दिखाई देने वाला संभावित जला हुआ हिस्सा यदि आगे चलकर मिसाइल हमले से जुड़ा प्रमाणित होता है, तो यह ईरानी हमले की प्रभावशीलता का एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा सकता है। रनवे को नुकसान पहुंचने की स्थिति में वहां से विमानों और ड्रोन की नियमित आवाजाही अस्थायी रूप से प्रभावित हो सकती है। हालांकि, नुकसान की वास्तविक गंभीरता का आकलन करने के लिए उच्च-रिजॉल्यूशन तस्वीरों और स्वतंत्र स्रोतों से अतिरिक्त पुष्टि जरूरी होगी।

अमेरिकी सैन्य ढांचे पर ईरान का बढ़ता दबाव

ईरानी हमले के दावों का महत्व केवल जॉर्डन तक सीमित नहीं है। Egypt’s Intel Observer ने Sentinel-2 सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर बहरीन में अमेरिकी नौसैनिक सुविधाओं और इरबिल क्षेत्र में एक सैन्य ठिकाने के आसपास भी संभावित हमले के संकेतों की ओर ध्यान दिलाया है।

यदि अलग-अलग स्थानों पर सामने आ रहे इन संकेतों की स्वतंत्र पुष्टि होती है, तो यह दर्शाएगा कि ईरान अपनी मिसाइल और ड्रोन क्षमता का इस्तेमाल क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ढांचे पर दबाव बनाने के लिए कर रहा है। तेहरान लंबे समय से यह संदेश देता रहा है कि क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकाने उसके लिए संभावित लक्ष्य हो सकते हैं।

ईरान के दृष्टिकोण से इन हमलों को केवल जवाबी सैन्य कार्रवाई के तौर पर नहीं, बल्कि अमेरिका और उसके सहयोगियों को यह संकेत देने की कोशिश के रूप में भी देखा जा सकता है कि क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य परिसंपत्तियां ईरानी मिसाइलों की पहुंच से बाहर नहीं हैं।

फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि प्रिंस हसन एयरबेस पर दिखाई देने वाले नुकसान की सीमा कितनी है और क्या वहां मौजूद अमेरिकी ड्रोन या उनका बुनियादी ढांचा वास्तव में प्रभावित हुआ है। आने वाली नई सैटेलाइट तस्वीरें और स्वतंत्र सैन्य आकलन इस दावे की पुष्टि करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

इस बीच, ईरानी दावों और सैटेलाइट तस्वीरों के बीच संभावित समानताएं इस बात की ओर संकेत करती हैं कि मध्य-पूर्व में चल रहा टकराव अब केवल सीमित मोर्चों तक नहीं रहा है, बल्कि अमेरिकी सैन्य उपस्थिति वाले कई रणनीतिक ठिकानों तक फैलता दिखाई दे रहा है।

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