मुजतबा ख़ामेनेई का महत्त्वपूर्ण बयान: ईरान उस दौर में वापस नहीं जाएगा, जिसकी दुश्मन इच्छा रखते हैं
ईरान के सुप्रीम लीडर और सशस्त्र बलों के कमांडर-इन-चीफ आयतुल्लाह सैयद मुजतबा हुसैनी ख़ामेनेई ने ईरान-इराक़ युद्ध की शुरुआत की वर्षगांठ और आठ साल चले युद्ध की याद में एक संदेश जारी किया। उन्होंने कहा कि, बड़ी ताक़तों ने ईरान को फिर से उसके पुराने दौर में ले जाने की कोशिश की, लेकिन उनके प्रयास सफल नहीं हुए। उनके अनुसार, ईरानी व्यवस्था पहले से ज्यादा मज़बूत होकर सामने आई है।
उन्होंने कहा:
“एक शब्द में कहूं तो ईरान उस दौर में वापस नहीं जाएगा, जिसकी हमारे दुश्मन इच्छा रखते हैं।”
ईरान की क्रांति और युद्ध का दौर
उन्होंने अपने संदेश की शुरुआत क़ुरआन की इस आयत से की:
“और हमने मूसा को अपनी निशानियों के साथ भेजा कि, अपनी कौम को अंधेरों से निकालकर रोशनी की ओर ले जाओ और उन्हें अल्लाह के दिनों की याद दिलाओ।”
उन्होंने कहा कि अक्टूबर की शुरुआत के दिन ईरान के लिए महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दिनों की याद दिलाते हैं। ये दिन उस आठ साल लंबे युद्ध की याद दिलाते हैं जिसमें ईरानी लोगों ने अपने देश की रक्षा की। उनके अनुसार, 1979 की ईरानी क्रांति के बाद देश में राष्ट्रीय एकता और इस्लामी विचारों के प्रति समर्थन बढ़ा। उस समय बहुत से ईरानियों को ब्रिटेन और अमेरिका के प्रभाव तथा ईरान के तेल उद्योग के राष्ट्रीयकरण और 1953 के तख्तापलट की घटनाएं याद थीं।
उन्होंने कहा कि, क्रांति से पहले ईरान का राजनीतिक वातावरण ऐसा था जिसमें विदेशी शक्तियों का बहुत प्रभाव था और उनके राजदूत ईरान के शाह को बताते थे कि, देश को क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए। उनके अनुसार, इमाम ख़ुमैनी के नेतृत्व में हुई ईरानी क्रांति ने इस व्यवस्था को समाप्त कर दिया और इस्लामी गणराज्य की स्थापना हुई।
ईरान-इराक़ युद्ध
सुप्रीम लीडर ने कहा कि, ईरानी क्रांति के बाद जिन विदेशी शक्तियों की ईरान के संसाधनों पर नज़र थी, वे नई व्यवस्था से खुश नहीं थीं। इसलिए उन्होंने ईरान को पुराने रास्ते पर वापस ले जाने के लिए कई प्रयास किए। उन्होंने ईरान-इराक़ युद्ध को इन प्रयासों में सबसे महत्वपूर्ण क़दम बताया।
उनके अनुसार, इराक़ की बाथ पार्टी ने यह सोचकर युद्ध शुरू किया था कि, युद्ध कुछ ही दिनों में ख़त्म हो जाएगा और इराक़ आसानी से जीत जाएगा, लेकिन आठ साल के युद्ध के बाद ईरान पहले से अधिक मज़बूत होकर बाहर आया। उन्होंने इसकी तुलना फीनिक्स (एक पौराणिक पक्षी जो आग से फिर जन्म लेता है) से की। उनके अनुसार, ईरान भी युद्ध की आग से और अधिक मज़बूत होकर निकला।
युद्ध के बाद ईरान
उन्होंने कहा कि, युद्ध के दौरान ईरान के पास आधुनिक सैन्य साधनों की कमी थी और देश को कई ख़तरों का सामना करना पड़ा, लेकिन उनके अनुसार, समय के साथ ईरान ने अपनी सैन्य और राजनीतिक ताक़त बढ़ाई और आज वह अपने दुश्मनों के सामने पहले से अधिक मज़बूत स्थिति में है। उन्होंने कहा कि युद्ध के दौरान जिन लोगों ने ईरान के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ी, उनकी जगह आज ऐसे लोग दिखाई देते हैं जो ईरान की सैन्य ताक़त का सामना करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने ईरान के पुराने और वर्तमान दौर की तुलना करते हुए कहा कि, पुराने समय में ईरान पिछड़ापन, अपमान, निर्भरता और अंतरराष्ट्रीय बदनामी से जुड़ा हुआ था।
उनके अनुसार, आज ईरान प्रगति, सम्मान और स्वतंत्रता के साथ खड़ा है और इस्लामी दुनिया तथा दुनिया के दूसरे हिस्सों में उसका प्रभाव बढ़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि, कुछ लोग आज ईरान को दुनिया की चौथी महाशक्ति मानते हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि, यह लोगों की सामान्य राजनीतिक और दुनियावी गणनाओं पर आधारित विचार है। उनके अनुसार, धार्मिक दृष्टि से जो देश ईश्वर और पैगंबर के परिवार के प्रति समर्पित है और न्याय के लिए खड़ा होने से नहीं डरता, उसे बहुत बड़ी शक्ति माना जाता है।
ईरानी लड़ाकों और होर्मुज़ की रक्षा करने वालों की कार्रवाई के कारण दुश्मन अरब सागर से आगे आने से बच रहे हैं
आयतुल्लाह मुजतबा ख़ामेनेई ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि, पहले ईरान के दक्षिणी समुद्री क्षेत्र में विदेशी ताक़तों की सैन्य मौजूदगी थी। उनके अनुसार, अब ईरानी लड़ाकों और होर्मुज़ जलडमरूमध्य की रक्षा करने वालों की कार्रवाई के कारण दुश्मन अरब सागर से आगे आने से बच रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि, जब भी उन्होंने आगे बढ़ने का जोखिम उठाया, उन्हें नुक़सान हुआ।उन्होंने आगे कहा कि भविष्य में अरब सागर भी उनके लिए सुरक्षित क्षेत्र नहीं रहेगा।
ईरान में लोगों की लामबंदी
उन्होंने कहा कि, पहले विदेशी शक्तियां मनोवैज्ञानिक युद्ध और डर का माहौल पैदा करके ईरान की राजधानी की सड़कों को ख़ाली करवाने और देश की स्वतंत्रता के ख़िलाफ़ तख्तापलट कराने में सफल हुई थीं। उन्होंने 1953 के तख्तापलट के बाद के दौर का उल्लेख करते हुए कहा कि, इसके बाद लगभग 25 वर्षों तक ईरान के संसाधनों का शोषण किया गया।
इसके विपरीत उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पिछले सात महीनों से ईरान के लोग देश के अलग-अलग शहरों और सड़कों पर बड़ी संख्या में मौजूद हैं और अपनी ज़िम्मेदारी निभा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि 3 करोड़ से अधिक ईरानियों ने अपनी जान देश के लिए देने की तैयारी की घोषणा की है। उन्होंने यह भी कहा कि जब इन लोगों को दोबारा संगठित करने के लिए पंजीकरण जैसी प्रक्रिया शुरू की गई, तो केवल पहले 100 मिनट में मांगी गई 5 लाख लोगों की संख्या पूरी हो गई। उनके अनुसार, ईरान के अलग-अलग जातीय और सामाजिक समूहों के लोग विभिन्न तरीकों से देश की रक्षा के लिए तैयार हैं।
महिलाओं की भूमिका का भी उल्लेख
सुप्रीम लीडर ने महिलाओं की भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि, पहले देश की बहादुरी और साहस की चर्चा मुख्य रूप से पुरुषों के संदर्भ में की जाती थी, लेकिन आज कुछ क्षेत्रों में ईरानी महिलाएं पुरुषों से भी आगे बढ़कर साहस और भागीदारी दिखा रही हैं।
उन्होंने कहा कि ईरान के ख़िलाफ़ दुश्मनों की कोशिशों के बावजूद समाज के अलग-अलग वर्ग देश के अपने अधिकारों और विशेष रूप से होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर नियंत्रण और उसकी रक्षा के मुद्दे पर अपने रुख पर कायम हैं।
ईरान पुराने दौर में वापस नहीं जाएगा
मुजतबा ख़ामेनेई ने कहा कि, अतीत और वर्तमान की तुलना को और भी विस्तार से बताया जा सकता है, लेकिन उनका मुख्य संदेश स्पष्ट है: “मैं ईरान की जनता के सेवक के रूप में घोषणा करता हूं कि वह पुराना दौर, जिसमें हमारे दुश्मन ईरान को वापस ले जाना चाहते हैं, समाप्त हो चुका है और अब कभी वापस नहीं आएगा।”
देश की वर्तमान स्थिति इमाम ख़ुमैनी शहीद सुप्रीम लीडर अली ख़ामेनेई की देन है
सुप्रीम लीडर मुज्तबा ख़ामेनेई ने ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता इमाम ख़ुमैनी और अपने पित शहीद सुप्रीम लीडर अली ख़ामेनेई की मृत्यु का भी उल्लेख किया और कहा कि, देश की वर्तमान स्थिति उनके नेतृत्व की देन है। उन्होंने कहा कि उनके विचारों, भाषणों और मार्गदर्शन की विरासत के कारण भविष्य के दिन वर्तमान से भी अधिक गौरवशाली होंगे। उन्होंने फिर फीनिक्स का उदाहरण दिया और कहा कि, ईरान युद्ध की आग से निकलकर इतना बड़ा और मज़बूत हो गया है कि, उसके प्रभाव की “छाया दुश्मनों की ज़मीनों तक पहुंच गई है।”
हसन नसरुल्लाह ने छोटे देश लेबनान का नाम और प्रतिष्ठा ऊंची किया
संदेश के एक बड़े हिस्से में उन्होंने हिज़्बुल्लाह के पूर्व नेता सैयद हसन नसरल्लाह को याद किया। उन्होंने शहीद हसन नसरुल्लाह की दूसरी पुण्यतिथि का उल्लेख करते हुए उन्हें अरब जगत और प्रतिरोध के बड़े नेताओं में से एक बताया।मुज्तबा ख़ामेनेई के अनुसार, नसरुल्लाह अपने लोगों और अपने धार्मिक विचारों के प्रति ईमानदार थे। उन्होंने कहा कि उनके भाषणों और कार्यों ने लेबनान के लोगों तथा दुनिया के कई अन्य लोगों को प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि नसरुल्लाह ने छोटे देश लेबनान का नाम और प्रतिष्ठा ऊंची की।
नईम क़ासिम, हसन नसरुल्लाह के रास्ते को आगे बढ़ा रहे हैं
उन्होंने नसरल्लाह को ऐतिहासिक सीरिया-लेबनान क्षेत्र के महान नेताओं में से एक बताया और कहा कि, उनकी मृत्यु के बाद उनका झंडा शेख नईम कासिम के हाथों में है। उन्होंने कहा कि हिज़्बुल्लाह के वर्तमान महासचिव, नईम क़ासिम, हिज़्बुल्लाह के लड़ाकों के साथ मिलकर नसरुल्लाह के रास्ते को आगे बढ़ा रहे हैं।
लेबनान की वर्तमान स्थिति
सुप्रीम लीडर ने कहा कि उनके विचार में लेबनान के वर्तमान दिन प्रतिरोध करने वालों के लिए महत्वपूर्ण और गौरवपूर्ण हैं। उन्होंने उन लोगों की आलोचना की जो इस्राईल के ख़िलाफ़ संघर्ष में विदेशी शक्तियों के वादों पर भरोसा करते हैं। उन्होंने कहा कि, हसन नसरुल्लाह, सैयद हाशिम सफीउद्दीन और वर्तमान प्रतिरोध के लड़ाकों को इतिहास लंबे समय तक याद रखेगा। इसके विपरीत, उन्होंने कहा कि जो लोग उनके अनुसार प्रतिरोध के ख़िलाफ़ खड़े हैं और विदेशी शक्तियों पर भरोसा करते हैं, उन्हें इतिहास में नकारात्मक रूप से याद किया जा सकता है।
संदेश का अंत
अंत में सुप्रीम लीडर मुजतबा खमेनेई ने उम्मीद जताई कि, ईश्वर की कृपा और इमाम महदी की विशेष दुआ से ईरानी जनता और प्रतिरोध के सहयोगियों को जीत, सफलता और सम्मान मिलता रहे। उन्होंने यह भी प्रार्थना की कि उनके विरोधियों को हार और अपमान का सामना करना पड़े।


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