ईरानियों का प्रतिरोध, हमें हमेशा हैरान करता रहा है: ओबामा के सलाहकार

ईरानियों का प्रतिरोध, हमें हमेशा हैरान करता रहा है: ओबामा के सलाहकार

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के सलाहकार डेनिस रॉस ने रविवार को कहा कि आर्थिक और सैन्य दबाव ईरान को पीछे हटने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। इस पूर्व अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि वॉशिंगटन ईरान की आर्थिक स्थिति को रणनीतिक सफलता के संकेत के रूप में देख सकता है, लेकिन वास्तविक स्थिति इससे कहीं अधिक जटिल है।

रॉयटर्स के अनुसार, डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन दोनों सरकारों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके रॉस ने कहा कि, तेहरान अब भी यह दिखाने के लिए दृढ़ है कि वह हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पर नियंत्रण रख सकता है। हालांकि, ऐसा प्रतीत होता है कि ईरान सैन्य शक्ति के इस्तेमाल को सावधानीपूर्वक नियंत्रित और प्रबंधित कर रहा है, जबकि साथ ही उसने तनाव को और बढ़ाने का विकल्प अपने पास सुरक्षित रखा है।

रॉस ने कहा कि ईरानी अधिकारियों का मानना है कि उनका देश आर्थिक कठिनाइयों को सहन कर सकता है और इन दबावों से उबर सकता है। उन्होंने कहा, “ईरानी अपनी सहनशीलता (लचीलापन) के मामले में हमें हमेशा हैरान करते रहे हैं,” और उन्होंने इस बात पर संदेह जताया कि केवल आर्थिक और सैन्य दबाव के जरिए ईरानियों को पीछे हटने के लिए मजबूर किया जा सकता है।

उनके अनुसार, ईरानी नेतृत्व के बीच संभवतः यह धारणा है कि वे इन दबावों का सामना कर सकते हैं और अंततः तेहरान अपनी मांगों को हासिल करने में सफल होगा। दूसरी ओर, रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज़ इंस्टीट्यूट (RUSI) की वरिष्ठ शोधकर्ता बुरजू ओज़चेलिक ने कहा कि सैन्य हमलों ने ईरान में देशभक्ति की भावना को और मज़बूत किया है।

ओज़चेलिक ने इस संबंध में कहा, “बेशक, आर्थिक दबाव सार्वजनिक असंतोष के जोखिम को बढ़ाता है, लेकिन फिलहाल ऐसा लगता है कि युद्ध का माहौल लोगों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल रहा है।”

विशेषज्ञ ने कहा कि, विदेशी सैन्य हस्तक्षेप, नागरिकों की मौत और अमेरिका के नेतृत्व वाली व्यवस्था के साथ व्यापक सभ्यतागत टकराव की धारणा ने ईरानी सरकार और “ईरान फर्स्ट” यानी “सबसे पहले ईरान” की सोच के प्रति जनता के बीच एक हद तक देशभक्तिपूर्ण समर्थन बनाए रखा है। कई पश्चिमी विशेषज्ञों ने ज़ोर देकर कहा है कि, ईरान के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई में अमेरिका से रणनीतिक और आकलन संबंधी गलती हुई है।

इससे पहले पश्चिम एशिया के देशों में अमेरिका के पूर्व राजदूत जेम्स जेफ्री ने पॉलिटिको को दिए एक साक्षात्कार में ईरान के खिलाफ अमेरिकी आर्थिक दबाव अभियान पर सवाल उठाया था। उन्होंने कहा था:

“20 वर्षों के अमेरिकी प्रतिबंधों और उन्हें दरकिनार करने में ईरान के अनुभव को देखते हुए, यह विश्वास करना मुश्किल है कि अब कोई निर्णायक बदलाव होने वाला है।”

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