ईरान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन किसी भी दबाव और धमकी के आगे झुकने के लिए भी तैयार नहीं: पज़ेश्कियान

ईरान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन किसी भी दबाव और धमकी के आगे झुकने के लिए भी तैयार नहीं: पज़ेश्कियान

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पज़ेश्कियान ने कहा है कि ईरान युद्ध या विस्तारवाद नहीं चाहता, लेकिन किसी भी दबाव और धमकी के आगे झुकने के लिए भी तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि ईरान के खिलाफ दबाव और धमकियाँ बंद हो जाएँ तो तनाव जारी रखने का कोई कारण नहीं रहेगा।

पज़ेश्कियान ने कहा कि हालिया युद्ध में ईरानी सशस्त्र बलों ने जनता के समर्थन और देश की सभी संस्थाओं के समन्वय से दुश्मन की योजनाओं को विफल कर दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान ने युद्ध शुरू नहीं किया था और दुश्मन की देश को अस्थिर करने तथा अंदर से कमजोर करने की कोशिश नाकाम रही।

सरकार और आईआरजीसी के बीच कोई मतभेद नहीं

ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि, सरकार और सशस्त्र बलों (आईआरजीसी ) के बीच कोई मतभेद नहीं है और सरकार सैन्य बलों के साथ पूरी तरह समन्वय में है। पज़ेश्कियान ने कहा, “जो लोग अपनी जान हथेली पर रखकर देश की रक्षा कर रहे हैं, उनके साथ हमारा मतभेद कैसे हो सकता है?”

यूरोपीय देशों के पास स्वतंत्र निर्णय लेने की पर्याप्त क्षमता नहीं

ईरानी राष्ट्रपति के अनुसार, फ्रांस के साथ स्नैपबैक तंत्र को समाप्त करने को लेकर बातचीत में समझौता हो गया था, लेकिन अमेरिका ने इसे आगे बढ़ने नहीं दिया। उन्होंने कहा कि यूरोपीय देशों के पास स्वतंत्र निर्णय लेने की पर्याप्त क्षमता नहीं है।

पज़ेश्कियान ने यह भी कहा कि वार्ता के दौरान समझौते के मुख्य बिंदुओं पर सहमति बन चुकी थी और उसकी विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अंतिम हस्ताक्षर की योजना थी, लेकिन 24 घंटे से भी कम समय में वार्ता की दिशा बदल गई और समझौता अंतिम रूप नहीं ले सका।

उन्होंने कहा कि ईरान ने कोई रियायत नहीं दी। उनके अनुसार, अमेरिका अपनी प्रतिबद्धताओं पर जितना अमल करेगा, ईरान भी उतना ही अमल करेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका का नाकाबंदी से पीछे हटना ईरान की ओर से किसी रियायत का परिणाम नहीं था।

अमेरिका और इस्राईल, ईरान तथा फारस की खाड़ी के देशों के बीच विभाजन पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं

पज़ेश्कियान ने पड़ोसी देशों के साथ संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि ईरान ने अपने कई मतभेद दूर कर लिए हैं, लेकिन अमेरिका और इस्राईल हालिया साजिशों और युद्ध के जरिए ईरान तथा फारस की खाड़ी के देशों के बीच विभाजन पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि क्षेत्र के कुछ देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों से ईरान के खिलाफ हमले किए गए, इसलिए ईरान को अपनी रक्षा के लिए जवाब देना पड़ा।

न कभी इस्तीफा नहीं दिया और न ही कभी इस्तीफ़ा दूंगा 

राष्ट्रपति ने कहा कि युद्धविराम संबंधी समझौता राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में आपसी समन्वय और एकजुटता के साथ तैयार किया गया था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी इस्तीफा नहीं दिया और न ही इस्तीफा देने का कोई इरादा है।

हमने क़ालिबाफ़ से अनुरोध किया था कि वह वार्ता दल के प्रमुख बनें

पज़ेश्कियान ने सरकार, संसद, न्यायपालिका और सशस्त्र बलों के बीच सहयोग को कठिन परिस्थितियों से निकलने का प्रमुख कारण बताते हुए कहा कि आपसी अपमान और विभाजन पैदा करना दुश्मन की इच्छा है और देश के भीतर एकता तथा सम्मान बनाए रखना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि कुछ लोग ईरान को युद्ध में धकेलना चाहते हैं, जबकि यह इस्राईल के हित में है, क्योंकि उसका उद्देश्य ईरान को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान पीछे नहीं हटेगा और किसी के सामने सिर नहीं झुकाएगा।

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