वॉशिंगटन: अमेरिकी अखबार द न्यूयॉर्क टाइम्स ने ईरान के खिलाफ जारी युद्ध को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों पर एक बार फिर तीखी आलोचना की है। अखबार के ताजा विश्लेषण में युद्ध की रणनीति, इसके घोषित उद्देश्यों और इससे बाहर निकलने की अमेरिकी कोशिशों पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
रिपोर्ट में ट्रंप के नेतृत्व में ईरान के खिलाफ शुरू किए गए युद्ध को सैन्य विफलता और बेहद गंभीर रणनीतिक भूल बताया गया है। अखबार के मुताबिक, जिस युद्ध से अमेरिका को अपने रणनीतिक लक्ष्य हासिल करने की उम्मीद थी, वह अब ऐसी स्थिति में पहुंच गया है जहां सैन्य शक्ति के बावजूद स्पष्ट राजनीतिक या रणनीतिक सफलता दिखाई नहीं दे रही है। रिपोर्ट में मौजूदा स्थिति को यहां तक कहा गया है कि यह पूरा घटनाक्रम एक गंभीर अंतरराष्ट्रीय संकट के बजाय एक हास्यास्पद राजनीतिक प्रदर्शन जैसा नजर आने लगा है।
न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार सबसे बड़ी समस्या यह है कि ईरान के खिलाफ मौजूदा संघर्ष को समाप्त करने के लिए कोई स्पष्ट और विश्वसनीय योजना दिखाई नहीं दे रही है। अखबार का तर्क है कि अमेरिका एक ऐसे संघर्ष में फंस गया है, जिसमें सैन्य अभियान जारी रखने और युद्ध को समाप्त करने—दोनों के बीच स्पष्ट रणनीति नजर नहीं आती।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसी स्थिति में राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से युद्ध को खत्म करने की कोशिशें एक स्पष्ट रणनीतिक योजना की बजाय राजनीतिक और सैन्य विफलता के परिणामों से बचने की कोशिश जैसी प्रतीत होती हैं। अखबार ने इसे एक निराश राष्ट्रपति की उस कोशिश के रूप में चित्रित किया है, जिसमें वह हार की कड़वाहट को स्वीकार किए बिना संघर्ष से बाहर निकलना चाहता है।
अमेरिकी अखबार ने युद्ध के दौरान चल रही कथित बातचीत और लगातार जारी मिसाइल हमलों के बीच विरोधाभास की ओर भी इशारा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, एक तरफ बातचीत और संभावित समझौते की कोशिशों की खबरें सामने आती हैं, जबकि दूसरी तरफ सैन्य कार्रवाई और मिसाइल हमले जारी रहते हैं।
न्यूयॉर्क टाइम्स के इस विश्लेषण में इन बातचीतों की प्रकृति पर भी सवाल उठाया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, यदि बातचीत के समानांतर युद्ध लगातार जारी रहता है और संघर्ष को खत्म करने का कोई ठोस रास्ता सामने नहीं आता, तो ऐसी वार्ताएं युद्ध से सम्मानजनक तरीके से बाहर निकलने की कोशिश से अधिक कुछ साबित नहीं होतीं।
यह आलोचना ऐसे समय में सामने आई है जब अमेरिकी रणनीति पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। जुलाई में यूरोन्यूज़ ने भी विश्लेषण प्रकाशित किया था जिसमें कहा गया था कि युद्ध के घोषित प्रमुख उद्देश्यों—ईरान की परमाणु क्षमता को रोकना और उसकी क्षेत्रीय सैन्य क्षमता को निर्णायक रूप से कमजोर करना—को लेकर स्पष्ट सफलता हासिल नहीं हुई है।
वहीं, हालिया विश्लेषणों में यह भी कहा गया है कि अमेरिका अपनी भारी सैन्य क्षमता को अपेक्षित रणनीतिक सफलता में बदलने में असफल रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम का एक महत्वपूर्ण पहलू घरेलू अमेरिकी राजनीति भी है। रिपोर्टों के मुताबिक, नवंबर में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले युद्ध के आर्थिक और राजनीतिक प्रभावों को लेकर ट्रंप प्रशासन पर दबाव बढ़ रहा है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने पिछले सप्ताह के एक विश्लेषण में लिखा था कि ट्रंप युद्ध में जीत की घोषणा कर जल्द से जल्द मध्य पूर्व से निकलना चाहते हैं, लेकिन क्षेत्र की जटिल परिस्थितियां उन्हें ऐसा करने में मुश्किल पैदा कर रही हैं।
इस पृष्ठभूमि में न्यूयॉर्क टाइम्स की ताजा टिप्पणी को ट्रंप प्रशासन की ईरान नीति पर बढ़ती अमेरिकी आलोचना का हिस्सा माना जा सकता है। मूल सवाल यही है कि अगर युद्ध का स्पष्ट अंतिम लक्ष्य और उससे बाहर निकलने की विश्वसनीय योजना नहीं है, तो सैन्य अभियान को जारी रखने का रणनीतिक औचित्य क्या है?


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