रॉयटर्स के अनुसार ईरान-अमेरिका तकनीकी वार्ता के दो प्रमुख मुद्दे
रॉयटर्स समाचार एजेंसी ने एक ईरानी अधिकारी के हवाले से दावा किया है कि कतर की राजधानी दोहा में ईरान और अमेरिका के बीच चल रही अप्रत्यक्ष तकनीकी वार्ता के दो प्रमुख मुद्दे हैं। पहला, विदेशों में जमे (ब्लॉक) ईरानी धन की रिहाई और दूसरा, होर्मुज़ जलडमरूमध्य का मुद्दा।
रॉयटर्स ने दो वरिष्ठ ईरानी सूत्रों के हवाले से यह भी दावा किया है कि ईरान होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर अपने स्थायी नियंत्रण को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाने की मांग पर अड़ा हुआ है और इस मांग से पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है।
समाचार एजेंसी ने ईरानी सूत्रों के हवाले से यह भी दावा किया है कि ईरान फ़ारस की खाड़ी में आने-जाने वाले जहाज़ों से शुल्क वसूलने का अधिकार चाहता है, भले ही इसके लिए बल प्रयोग करना पड़े।
ट्रंप का दावा—ईरान के साथ वार्ता सकारात्मक दिशा में
दोहा में जारी अप्रत्यक्ष तकनीकी वार्ता के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के साथ बातचीत “बहुत अच्छी” चल रही है।
उन्होंने एक बार फिर ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम की अनदेखी करते हुए दावा किया कि “हम ईरान के परमाणु निरस्त्रीकरण की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।”
ट्रंप ने यह भी कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य के बंद रहने की आशंकाओं से उन पर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बढ़ा था, लेकिन अब शेयर बाज़ार में सुधार, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और खुदरा वस्तुओं की कीमतों में कमी से “सभी” लाभान्वित हो रहे हैं।
जे.डी. वेंस का दावा
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने दावा किया कि आज ईरान पिछले 20 से 30 वर्षों की तुलना में परमाणु बम बनाने से पहले से कहीं अधिक दूर है।
उन्होंने कहा कि अमेरिकी और ईरानी तकनीकी वार्ताकार इस समय दोहा में बातचीत कर रहे हैं। अभी वार्ता शुरुआती चरण में है, लेकिन यह सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है।
वेंस ने यह भी कहा कि यदि ईरान अंतरराष्ट्रीय निरीक्षकों को प्रवेश से रोकता है या जहाज़ों पर गोलीबारी करता है, तो राष्ट्रपति के पास उससे निपटने के लिए कई विकल्प उपलब्ध हैं।
उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान के साथ वार्ता को सफल बनाने के लिए अधिकतम अवसर देगा, लेकिन राष्ट्रपति ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के अपने लक्ष्य से पीछे नहीं हटे हैं और अमेरिका इन वार्ताओं में “ताकत की स्थिति” से शामिल हो रहा है, न कि कमजोरी की स्थिति से।
गौरतलब है कि इस्लामी गणराज्य ईरान वर्षों से लगातार कहता आया है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और उसका परमाणु हथियार बनाने का कोई इरादा नहीं है।


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