वॉशिंगटन ने ईरान पर दबाव बनाने के अपने सभी साधन खो दिए हैं: हिलेरी क्लिंटन

वॉशिंगटन ने ईरान पर दबाव बनाने के अपने सभी साधन खो दिए हैं: हिलेरी क्लिंटन

अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने ईरान और अमेरिका के बीच हालिया बातचीत का जिक्र करते हुए कहा है कि वॉशिंगटन ने ईरान पर दबाव बनाने के अपने लगभग सभी साधन खो दिए हैं। हिलेरी क्लिंटन ने ईरान और अमेरिका के बीच चल रही बातचीत पर टिप्पणी करते हुए कहा कि, ट्रंप प्रशासन ने वार्ता की प्रक्रिया को काफी नुकसान पहुंचाया है।

उन्होंने एमएसएनबीसी को दिए एक इंटरव्यू में कहा, “इस प्रशासन ने बहुत नुकसान पहुंचाया है। अब हमें बहुत मेहनत करनी होगी। आप केवल जिनेवा या इस्लामाबाद पहुंचकर कुछ घंटे बातचीत करके वापस नहीं जा सकते। कूटनीति के जरिए किसी नतीजे तक पहुंचने के लिए लगातार और व्यवस्थित प्रयास की जरूरत होती है।”

ट्रंप प्रशासन किसी भी समझौते तक पहुंचने में सक्षम नहीं

क्लिंटन ने कहा कि, ट्रंप प्रशासन किसी समझौते तक पहुंचने में सक्षम नहीं है। उन्होंने कहा, “मुझे ऐसा नहीं लगता कि यह प्रशासन वास्तव में ऐसा करना चाहता है या, ईमानदारी से कहूं तो, ऐसा करने की क्षमता रखता है। वे उन्हीं तीन लोगों को दुनिया भर में भेज रहे हैं। उनमें से दो, कुशनर और विटकॉफ, यूक्रेन युद्ध, ईरान और ग़ाज़ा की समस्याओं को हल करने वाले हैं। यह एक मजाक है।”

क्लिंटन ने बातचीत में वॉशिंगटन की ओर से की जा रही अधिक मांगों का भी जिक्र किया। हालांकि, ईरान और अमेरिका के बीच जिनेवा में हुई पिछली बातचीत का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, “जिनेवा में ईरानियों की ओर से पेश किया गया प्रस्ताव पर्याप्त नहीं था। लेकिन जैसा कि ब्रिटेन के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जोनाथन पॉवेल ने कहा था, यह बातचीत की शुरुआत के लिए एक आधार बन सकता था। यह उस अपेक्षा से आगे था, जिसके साथ हमें लगा था कि ईरानी बातचीत शुरू करेंगे। लेकिन इसके लिए बातचीत की मेज पर घंटों बैठना जरूरी था।”

उन्होंने आगे कहा कि ऐसा लगता है कि ट्रंप और उनके करीबी लोग ऐसा करने में सक्षम नहीं हैं।

क्लिंटन ने ट्रंप द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने पर जताए गए आश्चर्य का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, “यह चौंकाने वाली बात है कि ट्रंप ने कहा कि किसी ने उन्हें यह नहीं बताया था कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर सकता है। जिन भी युद्धाभ्यासों में मैं शामिल रही हूं, उनमें यह पहली चीज होती थी, जिसे हम मानकर चलते थे कि ईरान ऐसा कर सकता है।”

अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री ने मौजूदा बातचीत में अमेरिका की कमजोर स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा, “हम इस समय एक कमजोर स्थिति में हैं। हमने व्यावहारिक रूप से अपने पास मौजूद दबाव बनाने की क्षमता और पहल करने का अवसर खो दिया है।”

क्लिंटन ने कहा कि उन्होंने जून में ट्रंप द्वारा ईरान के परमाणु ठिकानों पर किए गए बमबारी के हमले का समर्थन किया था। उन्होंने कहा, “मैंने उन हमलों को एक उचित और सीमित रणनीतिक लक्ष्य माना था, लेकिन मैं ईरान के खिलाफ उनके असंगत हमले के खिलाफ हूं।”

इस्राईल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की ईरान पर बड़े पैमाने पर हमले की लंबे समय से चली आ रही इच्छा का जिक्र करते हुए क्लिंटन ने कहा, “मैं अपने व्यक्तिगत अनुभव से जानती हूं कि, नेतन्याहू किस तरह हर अमेरिकी राष्ट्रपति को ईरान के साथ अंतहीन युद्ध के लिए राजी करने की कोशिश करते रहे हैं।”

अमेरिका के सहयोगी देशों के युद्ध या बातचीत में पर्याप्त रूप से शामिल न होने पर क्लिंटन ने कहा, “मुझे चिंता है कि अमेरिका अब ईरान के मुकाबले बेहद कमजोर स्थिति में पहुंच गया है।”

उन्होंने बेंजामिन नेतन्याहू के बारे में कहा, “वह जरूरत से ज्यादा समय तक सत्ता में बने हुए हैं। मेरी नजर में उन्होंने इस्राईल की दीर्घकालिक सुरक्षा को कमजोर किया है।”

हिज़्बुल्लाह किसी भी तरह पराजित नहीं हुआ है

लेबनान में इस्राईल की सैन्य कार्रवाई का जिक्र करते हुए हिलेरी क्लिंटन ने कहा, “हम देख रहे हैं कि हिजबुल्लाह किसी भी तरह पराजित नहीं हुआ है।”

गौरतलब है कि अब तक बड़ी संख्या में अमेरिकी राजनेता ईरान के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई का विरोध कर चुके हैं। इसके अलावा, अमेरिकी कांग्रेस के कई सदस्यों ने ट्रंप के युद्ध संबंधी अधिकारों को सीमित करने की मांग की है। कुछ सांसदों ने तो उन्हें राष्ट्रपति पद से हटाने की बात तक कही है।

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