क्यूबा सरकार “ढहने के कगार पर” है: डोनाल्ड ट्रंप

क्यूबा सरकार “ढहने के कगार पर” है: डोनाल्ड ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेज़ुएला की धरती पर अमेरिकी सेना की कार्रवाई और वहां के राष्ट्रपति के अपहरण के केवल दो दिन बाद, इस बार क्यूबा और कोलंबिया की ओर उंगली उठाई और दावा किया कि, क्यूबा सरकार “ढहने के कगार पर” है।

डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को फ्लोरिडा से वॉशिंगटन लौटते समय एयर फ़ोर्स वन विमान में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अप्रत्यक्ष रूप से क्यूबा को धमकी दी। उन्होंने यह दावा करते हुए कि वेनेज़ुएला पर अमेरिकी हमले के दौरान “कई क्यूबाई मारे गए”, कहा कि वॉशिंगटन को क्यूबा में सीधे सैन्य हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि उनके अनुसार यह देश “खुद ही ढहने वाला है।”

ट्रंप ने कहा:
“क्यूबा ढहने के लिए तैयार है। साफ़ तौर पर लगता है कि क्यूबा ढहने को तैयार है। क्यूबा के पास अब कोई आमदनी नहीं बची है। उसकी सारी आय वेनेज़ुएला और वेनेज़ुएला के तेल से आती थी और अब उसे उस तक पहुंच नहीं है। क्यूबा व्यावहारिक रूप से ढहने वाला है।”

कोलंबिया के खिलाफ सैन्य कार्रवाई बुरा विचार नहीं है: ट्रंप
इसके बाद ट्रंप ने कोलंबिया के राष्ट्रपति को धमकी देते हुए घोषणा की कि, अमेरिकी सरकार लैटिन अमेरिका में और अधिक सैन्य हस्तक्षेपों पर विचार करने के लिए तैयार है। वेनेज़ुएला में वॉशिंगटन की विवादास्पद कार्रवाई के बाद दिए गए इन बयानों ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।

ट्रंप ने कोलंबिया और वेनेज़ुएला की स्थिति का ज़िक्र करते हुए कहा कि ये दोनों देश “बहुत बीमार” हैं और दावा किया कि बोगोटा की सरकार “एक बीमार आदमी” द्वारा चलाई जा रही है। यह शब्द उन्होंने कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो के लिए इस्तेमाल किया।

ट्रंप ने कहा:
“वह एक बीमार आदमी है जिसे कोकीन बनाना और उसे अमेरिका में बेचना पसंद है। और यह भी कह दूं कि वह ज़्यादा समय तक सत्ता में नहीं रहेगा।”जब पत्रकारों ने पूछा कि, क्या उनका मतलब कोलंबिया के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से है, तो ट्रंप ने जवाब दिया:
“मेरे हिसाब से यह बुरा विचार नहीं है।”

कोलंबियाई राष्ट्रपति पेट्रो ने ट्रंप के बयानों की निंदा
इन बयानों पर कोलंबिया के राष्ट्रपति की तीखी प्रतिक्रिया आई। गुस्तावो पेट्रो ने ट्रंप के बयानों की निंदा करते हुए उनसे “अपमान और बदनामी” बंद करने को कहा और चेतावनी दी कि, अगर लैटिन अमेरिकी देश एकजुट नहीं हुए तो वे बड़ी शक्तियों के “नौकर और गुलाम” बन जाएंगे।

पेट्रो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कई विस्तृत संदेशों में लिखा:
“संयुक्त राज्य अमेरिका मानव इतिहास का पहला देश है जिसने किसी दक्षिण अमेरिकी देश की राजधानी पर बमबारी की है,” हालांकि उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि बदले की भावना समाधान नहीं है। उन्होंने क्षेत्रीय एकता का आह्वान किया और कहा कि लैटिन अमेरिका को ऐसा क्षेत्र बनना चाहिए जो “पूरी दुनिया के साथ समझने, व्यापार करने और संवाद करने की क्षमता” रखता हो।

उन्होंने जोड़ा:
“हम केवल उत्तर की ओर नहीं देखते, हम हर दिशा की ओर देखते हैं।”

वेनेज़ुएला, मेक्सिको और क्यूबा को चेतावनी
ट्रंप की यह नई बयानबाज़ी उस घटना के एक दिन बाद आई जब अमेरिकी बलवेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को कराकास में गिरफ्तार कर अमेरिका ले जाया। वॉशिंगटन ने इसे “कानून प्रवर्तन अभियान” बताया और मादुरो पर “नार्को-आतंकवाद” के आरोप में मुकदमे की बात कही। मादुरो ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है, जबकि अमेरिका के आलोचकों का कहना है कि इस कार्रवाई का असली उद्देश्य वेनेज़ुएला के विशाल तेल संसाधनों पर नियंत्रण पाना है।

ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि अमेरिका अब “वेनेज़ुएला की स्थिति को नियंत्रित कर रहा है,” जबकि इस देश के सर्वोच्च न्यायालय ने उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रीगेज़ को अंतरिम राष्ट्रपति नियुक्त किया है। उन्होंने यह भी धमकी दी कि अगर वेनेज़ुएला ने “ठीक व्यवहार नहीं किया,” तो अमेरिका फिर से सैन्य बल का इस्तेमाल करेगा।

ट्रंप ने साथ ही मेक्सिको को चेतावनी देते हुए कहा कि उसे “अपनी स्थिति सुधारनी चाहिए,” क्योंकि मादक पदार्थ मेक्सिको के रास्ते अमेरिका पहुंच रहे हैं और वॉशिंगटन “कुछ करने पर मजबूर हो जाएगा।” इसके बावजूद ट्रंप ने मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शाइनबाम को “एक असाधारण व्यक्ति” बताया और कहा कि हर बातचीत में उन्होंने मेक्सिको में अमेरिकी सैनिक भेजने का प्रस्ताव रखा है।

उन्होंने कहा:
“मेक्सिको की सरकार में इस समस्या को हल करने की क्षमता है, लेकिन दुर्भाग्य से मेक्सिको में कार्टेल बहुत शक्तिशाली हैं।”

ट्रंप ने आगे कहा:
“चाहे आप चाहें या नहीं, मेक्सिको को असल में कार्टेल ही चला रहे हैं।” हालिया अमेरिकी कार्रवाइयों के बाद ट्रंप ने फिर से पेट्रो को धमकाया और कहा कि उन्हें “अपना ख्याल रखना चाहिए।” क्यूबा के बारे में उन्होंने कहा कि यह देश “एक विफल होती सरकार” है और उसका मुद्दा “आखिरकार सामने आएगा।”

इस बीच ब्राज़ील, चिली, कोलंबिया, मेक्सिको, उरुग्वे और स्पेन ने एक संयुक्त बयान में “गहरी चिंता” व्यक्त करते हुए वेनेज़ुएला की धरती पर अमेरिका की एकतरफा सैन्य कार्रवाइयों को सख्ती से खारिज कर दिया।

बयान में कहा गया:
“ये कार्रवाइयां अंतरराष्ट्रीय कानून के बुनियादी सिद्धांतों का खुला उल्लंघन हैं, विशेष रूप से बल प्रयोग या उसकी धमकी पर प्रतिबंध का, और यह शांति, क्षेत्रीय सुरक्षा तथा नागरिकों के जीवन के लिए बेहद खतरनाक मिसाल कायम करती हैं।”

विश्लेषकों के अनुसार, यदि तनाव बढ़ता है तो क्यूबा वॉशिंगटन के प्रमुख लक्ष्यों में शामिल हो सकता है। यह वही देश है जिसके अमेरिका के साथ संबंध 1959 में फिदेल कास्त्रो की क्रांति की जीत के बाद से लगातार तनावपूर्ण रहे हैं।

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