ईरान को सैन्य ताकत के बलबूते हराना असंभव, मोसाद के पूर्वाधिकारी का बड़ा दावा

तल अवीव: इस्राईल की खुफिया एजेंसी मोसाद के एक पूर्व अधिकारी ने ईरान को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा है कि सैन्य कार्रवाई के जरिए ईरान को पराजित करना लगभग असंभव है। उनके मुताबिक, तेहरान पर प्रभावी दबाव बनाने का एकमात्र रास्ता उसकी अर्थव्यवस्था को निशाना बनाना है।

इस्राईली वेबसाइट ‘वाल्ला’ के अनुसार मोसाद की ‘त्सलज़ेल’ यूनिट के पूर्व प्रमुख ऊदी लेवी ने कहा कि ईरान के खिलाफ सैन्य युद्ध के जरिए निर्णायक जीत हासिल करना संभव नहीं है। उन्होंने इसके बजाय कठोर और व्यापक आर्थिक दबाव को ज्यादा प्रभावी तरीका बताया।

ऊदी लेवी का कहना है कि अमेरिका और इस्राईल आज ईरान के आर्थिक मोर्चे पर पिछले करीब एक दशक तक पर्याप्त ध्यान नहीं देने की कीमत चुका रहे हैं। उनके अनुसार, दोनों देशों के पास ईरान से जुड़ी रणनीतिक और संवेदनशील जानकारियां थीं, लेकिन आर्थिक ढांचे को लेकर पर्याप्त कार्रवाई नहीं की गई।

उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2015 के बाद ईरान ने एक व्यापक वित्तीय ढांचा तैयार किया, जिसने उसे आर्थिक दबावों के बीच अपने वित्तीय लेनदेन को जारी रखने में मदद की।

मोसाद के इस पूर्व अधिकारी ने यह भी कहा कि अमेरिका के लिए ईरान के खिलाफ व्यापक सैन्य अभियान चलाना कई कारणों से मुश्किल है। उन्होंने यूरोपीय देशों के साथ पूर्ण सहयोग की कमी, इस्राईल से पर्याप्त खुफिया जानकारी उपलब्ध नहीं होने, खाड़ी देशों के सीमित सहयोग और रूस के साथ ईरान की बढ़ती नजदीकी को प्रमुख चुनौतियों में गिनाया।

उनके मुताबिक, इन परिस्थितियों के कारण केवल सैन्य विकल्प के जरिए ईरान पर निर्णायक दबाव बनाना आसान नहीं होगा।

लेवी ने दावा किया कि अमेरिका का वित्त मंत्रालय यानी ट्रेजरी विभाग ईरान के वित्तीय और लॉजिस्टिक नेटवर्क पर लगातार नजर रख रहा है। इसका उद्देश्य ऐसे रास्तों की पहचान करना है जिनके जरिए ईरान धन का लेनदेन करता है।

उनके अनुसार, इस तरह के दबाव का लक्ष्य अंततः ईरान को अपने संसाधनों का बड़ा हिस्सा जटिल वित्तीय हस्तांतरण और वैकल्पिक भुगतान प्रणालियों में खर्च करने के लिए मजबूर करना हो सकता है।

पूर्व मोसाद अधिकारी ने डिजिटल करेंसी को भी रणनीतिक चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि ईरान, रूस और उत्तर कोरिया जैसे देश क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल रणनीतिक उद्देश्यों के लिए तेजी से कर रहे हैं।

लेवी के मुताबिक, वर्चुअल करेंसी के इस इस्तेमाल पर अंतरराष्ट्रीय निगरानी और नियंत्रण अभी भी पर्याप्त मजबूत नहीं है। ऐसे में प्रतिबंधों से बचने और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था के बाहर लेनदेन करने के लिए डिजिटल परिसंपत्तियों का इस्तेमाल आगे और बढ़ सकता है।

popular post

 सऊदी अरब, झूठ फैलाने और पवित्र स्थलों का दुरुपयोग करने का आदी है: यमन

 सऊदी अरब, झूठ फैलाने और पवित्र स्थलों का दुरुपयोग करने का आदी है: यमन ऐसे

संयुक्त अरब अमीरात ने इस्राईली नागरिकों को वीज़ा देना किया शुरू

कुछ दिनों पहले इस्राईल के साथ अपने संबंधों को सार्वजनिक कर कई समझौते पर हस्ताक्षर

4 दिसंबर भारतीय नौसेना दिवस

4 दिसंबर भारतीय नौसेना दिवस हर देश किसी न किसी तारीख़ को नौसेना दिवस मनाया

कल से शुरू होगी टी-20 सीरीज, जानिए कितने बजे खेला जाएगा मैच

भारतीय टीम फ़िलहाल अपने ऑस्टेलिया के दौरे पर है जहाँ पर अब तक एकदिवसीय सीरीज़

कुछ हफ़्तों में मेड इन इंडिया कोरोना वैक्सीन आने की उम्मीद: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

कोरोना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज सुबह एक सर्वदलीय बैठक की. पीएम मोदी ने

महाराष्ट्र में बीजेपी को विधान परिषद चुनाव में लगा तगड़ा झटका, सिर्फ एक सीट पर मिल सकी जीत

महाराष्ट्र में बीजेपी को विधान परिषद चुनाव में तगड़ा झटका लगा है. विधान परिषद की

5वें दौर की बैठक: किसानों का दो टूक जवाब हम सरकार से चर्चा नहीं, बल्कि ठोस जवाब चाहते हैं वो भी लिखित में,

कृषि कानूनों को लेकर पिछले 9 दिनों से धरने पर बैठे किसानों के साथ केंद्र

रूस की नसीहत, वेस्ट बैंक में एकपक्षीय कार्रवाई से बचे इस्राईल

रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोफ़ ने मेडिटरेनीयन डायलॉग्स बैठक को संबोधित करते हुए कहा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *