अमेरिकी आर्थिक युद्ध से ‘ईरान की अर्थव्यवस्था नहीं टूटेगी’: केंद्रीय बैंक गवर्नर
केंद्रीय बैंक के गवर्नर अब्दुल नेसार हिम्मती ने ज़ोर देकर कहा कि, अमेरिकी आर्थिक दबाव के बावजूद ईरान की अर्थव्यवस्था नहीं टूटेगी। उन्होंने दावा किया कि, केंद्रीय बैंक ने उस आर्थिक पतन को रोकने में सफलता हासिल की है, जिसकी अमेरिका ने उम्मीद की थी।
ईरान के केंद्रीय बैंक (CBI) के गवर्नर ने ईरानी जनता को भरोसा दिलाया है कि, अमेरिकी आर्थिक युद्ध के दबाव में देश की अर्थव्यवस्था नहीं टूटेगी। उन्होंने कहा कि, तेहरान ने वॉशिंगटन के उस प्रमुख उद्देश्य को विफल कर दिया है, जिसके तहत ईरान में विनाशकारी महंगाई पैदा करके अर्थव्यवस्था को तबाह करने की कोशिश की जा रही थी।
एक टेलीविजन साक्षात्कार में हिम्मती ने देश की मौजूदा आर्थिक स्थिति का आकलन किया। उन्होंने माना कि, आम जनता रोज़ाना आर्थिक दबाव महसूस कर रही है, लेकिन साथ ही दृढ़ता से कहा कि इस्लामी गणराज्य ने अमेरिका और इस्राईल द्वारा पैदा किए गए सबसे गंभीर आर्थिक खतरों को निष्प्रभावी कर दिया है।
हिम्मती ने कहा कि महंगाई अब भी एक चुनौती बनी हुई है, लेकिन केंद्रीय बैंक ने उस आर्थिक पतन को रोक दिया है, जिसकी अमेरिकी योजनाकारों ने उम्मीद की थी।
उन्होंने कहा:
“मैं कम महंगाई की बात नहीं कर रहा हूं। मैं इस तथ्य की बात कर रहा हूं कि अत्यधिक और विनाशकारी महंगाई आने वाली थी। यह अमेरिका के प्रमुख उद्देश्यों में से एक था—एक ऐसा लक्ष्य जिसे ट्रंप और उनके वित्त मंत्री हर दिन दोहराते हैं। सौभाग्य से, ऐसा नहीं हुआ और केंद्रीय बैंक के पास एक योजना है, जिस पर वह सक्रिय रूप से काम कर रहा है ताकि बाज़ार में नक़दी की अधिकता को नियंत्रित किया जा सके।”
उन्होंने अमेरिकी पूर्वानुमानों और वास्तविक स्थिति के बीच अंतर को रेखांकित किया।
हिम्मती ने कहा:
“उन्होंने योजना बनाई थी कि दो सप्ताह के भीतर ईरान को आर्थिक रूप से ध्वस्त कर देंगे, जीत की घोषणा करेंगे और चले जाएंगे। अब नौ महीने बीत चुके हैं।”
उन्होंने आगे कहा:
“अब वे कहते हैं कि अगले दो सप्ताह में ईरान आर्थिक रूप से ढह जाएगा। उस दावे को किए हुए दस दिन बीत चुके हैं और हम आर्थिक युद्ध की अग्रिम पंक्ति में हैं। हम उन्हें बिल्कुल वही जवाब देंगे: वे जिस नतीजे की उम्मीद कर रहे हैं, वही नतीजा उन्हें खुद भुगतना पड़ेगा।”
मनोवैज्ञानिक युद्ध का मुक़ाबला
विदेशी मुद्रा बाजार में हालिया उतार-चढ़ाव पर बात करते हुए हेम्मती ने कहा कि अमेरिका ईरान को अस्थिर करने के लिए बड़े पैमाने पर मनोवैज्ञानिक युद्ध पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि, अमेरिकी अधिकारियों की ओर से रोजाना दी जाने वाली धमकियां, नए प्रतिबंधों की घोषणाएं और सोशल मीडिया पर चलाए जा रहे अभियान जनता के बीच नकारात्मक आर्थिक उम्मीदें पैदा करने के लिए बनाए गए हैं।
हिम्मती ने समझाया:
“जब महंगाई की उम्मीदें बढ़ती हैं, तो स्वाभाविक रूप से लोग ऐसी परिसंपत्तियों की ओर रुख करते हैं, जो संभावित मुद्रा अवमूल्यन से बचाव कर सकें। इससे बाजार में मांग बढ़ी। हालांकि, जैसा कि मैंने पहले भी कहा है, हमारे पास केंद्रीय बैंक द्वारा तैयार की गई एक ‘प्रतिक्रिया प्रणाली’ है। जैसे ही ऐसा हुआ, हमने तुरंत बाजार में हस्तक्षेप किया, ताकि मुद्रा बाजार को नियंत्रित किया जा सके और इन कृत्रिम रूप से पैदा किए गए झटकों का मुकाबला किया जा सके।”
उन्होंने जनता को आश्वस्त किया कि भारी दबाव के बावजूद सरकार के पास स्थिति को संभालने के लिए आवश्यक साधन और विदेशी मुद्रा संसाधन मौजूद हैं। उन्होंने इसकी तुलना अमेरिकी सैन्य दावों से करते हुए कहा:
“जिस तरह उन्होंने दावा किया था कि उनकी 90 प्रतिशत मिसाइलें खत्म हो गई हैं, लेकिन इसके बावजूद मिसाइलों की लगातार आपूर्ति देखने को मिली, उसी तरह वे लगातार दावा करते हैं कि हमारी मुद्रा और राजस्व ख़त्म हो चुके हैं। लेकिन वे देख रहे हैं कि ऐसा कुछ नहीं हुआ है।”
हिम्मती की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब अमेरिका ईरान के ख़िलाफ़ अपने कथित “ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट” को तेज़ कर रहा है। यह अभियान अमेरिकी वित्त मंत्रालय के नेतृत्व में चलाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य वॉशिंगटन के अनुसार ईरान के “महत्वपूर्ण वित्तीय जीवन-रेखाओं” को काटना है।
अपने सैन्य उद्देश्यों में विफल रहने के बाद अमेरिका ने ईरान के तेल निर्यात पर नौसैनिक नाकाबंदी और ईरान की सैन्य आपूर्ति श्रृंखला तथा वित्तीय सहयोगियों को निशाना बनाने वाले प्रतिबंधों की नई लहर पर अधिक जोर दिया है।
अमेरिकी अधिकारियों, जिनमें वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट और विदेश मंत्री मार्को रुबियो शामिल हैं, ने बार-बार यह दावा किया है कि ईरान आर्थिक रूप से “महाविनाश” की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी विश्वास जताया है कि नवंबर में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले तेहरान को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर किया जा सकता है। हालांकि, ईरानी नेतृत्व ने इन आकलनों को खारिज करते हुए इन्हें भ्रामक और अवास्तविक प्रचार करार दिया है।


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