ग़ाज़ा नरसंहार रोकने के लिए अरब देश हस्तक्षेप क्यों करते? मोहम्मद हदीद
फिलिस्तीनी-अमेरिकी बिजनेस टाइकून मोहम्मद हदीद, जिनका ग़ाज़ा से व्यक्तिगत संबंध है, 1948 में नाजसेरा में पैदा हुए और इज़रायल के क़ब्ज़े के कारण शरणार्थी बन गए, ने अरब और मुस्लिम देशों की आलोचना की है। इस बीच, इज़रायल ने ग़ाज़ा में फिलिस्तीनियों पर आतंकी हमलों का एक नया दौर शुरू किया है, जिसमें युद्ध-विराम को तोड़ दिया गया है और हमलों में हज़ारों लोग शहीद हो गए हैं।
हदीद ने बुधवार को एक वीडियो में कहा, “यह देखकर मेरा दिल टूट जाता है कि क्या हो रहा है।” अपने प्रभाव का प्रयोग करें। आपका पूरे यूरोप, पूरे अमेरिका, पूरे अरब जगत और पूरे इस्लामी जगत में बहुत प्रभाव है। आप उन फिलिस्तीनियों की मदद करने के लिए कहां हैं जो हर दिन मर रहे हैं?’
गौरतलब है कि इज़रायल ने 19 जनवरी से लागू युद्ध-विराम को एकतरफा तरीके से खत्म कर दिया और क्रूूरता की सारी हदें पार करते हुए रात में बमबारी कर 400 से ज्यादा फिलिस्तीनियों को नींद में ही मार डाला।
हदीद ने मुस्लिम देशों से पूछा कि ऐसे समय में जब फिलिस्तीनी भूखे-प्यासे हैं, आश्रय स्थलों में रहने को मजबूर हैं, आप उनके दर्द से कैसे बहरे हो सकते हैं। आप कहां हैं आप किसी से बात क्यों नहीं कर रहे?
उन्होंने यहूदी धर्म को एक सुरक्षित और बहुत निष्पक्ष धर्म बताते हुए कहा कि इज़रायल एक धार्मिक राज्य नहीं है। ये अपराधी हैं, उनके सभी अपराधी नेता जेल जायेंगे और उन्हें जेल जाना भी चाहिए। और आईडीएफ (इज़रायली सेना) को जेल जाना चाहिए। मैं कई आईडीएफ सैनिकों को सुनता हूं। उन्होंने ग़ा़ज़ा में जो अपराध किया है, उसके कारण वह परेशान हैं।